Bihar Rajya Sabha: नीतीश के बेटे निशांत और पवन सिंह का संसद में जाना तय !
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Bihar Rajya Sabha: नीतीश के बेटे निशांत और पवन सिंह का संसद में जाना तय !

बिहार राज्यसभा चुनाव के लिए NDA की संभावित लिस्ट सामने आ गई है। नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री हो रही है, वहीं पवन सिंह को भी मौका मिला है।


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Bihar Politics : बिहार की सियासत में आज की सबसे बड़ी हलचल राज्यसभा चुनाव को लेकर है। एनडीए गठबंधन ने ऊपरी सदन भेजने के लिए अपने धुरंधरों की लिस्ट लगभग फाइनल कर ली है। इस सूची में सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की हो रही है। लंबे समय तक कैमरे और राजनीति से दूर रहने वाले निशांत कुमार अब सक्रिय राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं। जदयू उन्हें राज्यसभा भेजकर भविष्य के नेतृत्व का संकेत दे रही है। इसके अलावा भाजपा ने 'स्टार पावर' और 'जातीय समीकरण' का अनूठा मेल बैठाते हुए पवन सिंह और शिवेश राम पर दांव खेला है। एनडीए की इस लिस्ट ने यह साफ कर दिया है कि वह आगामी चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है। गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन चुकी है। अब केवल औपचारिक घोषणा का इंतजार है।


नीतीश के बेटे निशांत कुमार की ग्रैंड एंट्री की तयारी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री अब महज औपचारिकता रह गई है। पिछले साल विधानसभा चुनाव के बाद से ही निशांत सार्वजनिक कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। वे गांधी मैदान में हुए शपथ ग्रहण समारोह में भी प्रमुखता से दिखाई दिए थे। जदयू कार्यकर्ताओं के बीच उन्हें पार्टी का भविष्य और नीतीश का उत्तराधिकारी बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। पटना की सड़कों पर "नीतीश सेवक, मांगे निशांत" जैसे बैनर और पोस्टर इस बात की गवाही दे रहे हैं। समर्थकों का मानना है कि निशांत के आने से पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी। 2026 को बिहार की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन के साल के रूप में देखा जा रहा है। राज्यसभा जाना उनके लिए इस सफर की पहली बड़ी शुरुआत होगी।

बीजेपी और सहयोगियों का पावर पैक प्लान
भारतीय जनता पार्टी ने इस बार चौंकाने वाले नाम सामने रखे हैं। पार्टी ने भोजपुरी सुपर स्टार पवन सिंह को राज्यसभा भेजने का मन बनाया है। पवन सिंह की युवाओं के बीच जबरदस्त पकड़ है और वे 'स्टार पावर' के जरिए वोटों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। उनके साथ ही दलित चेहरे के रूप में शिवेश राम को मौका दिया जा रहा है। वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को भी राज्यसभा का टिकट मिलना लगभग तय है। जदयू की ओर से रामनाथ ठाकुर जैसे अनुभवी चेहरे पर फिर से भरोसा जताया गया है। रामनाथ ठाकुर जननायक कर्पूरी ठाकुर के बेटे हैं और अति पिछड़ा वर्ग में उनकी गहरी पैठ है। इन नामों के जरिए एनडीए ने बिहार के हर वर्ग और जाति को साधने की सफल कोशिश की है।

विधानसभा का गणित और पांचवीं सीट का 'खेला'
बिहार विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए की स्थिति अत्यंत मजबूत है। भाजपा, जदयू और सहयोगियों को मिलाकर गठबंधन के पास 200 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के प्रथम वरीयता वाले वोट की आवश्यकता होती है। इस संख्या बल के आधार पर एनडीए के लिए चार सीटें जीतना बिल्कुल आसान है। लेकिन दिलचस्प मोड़ तब आ सकता है जब एनडीए पांचवीं सीट पर भी अपना दावा ठोक दे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर विपक्षी खेमा बिखरा हुआ रहा, तो एनडीए 'खेला' कर सकता है। विपक्ष में एकजुटता की कमी का फायदा उठाने के लिए एनडीए की रणनीति तैयार है।

2025 के बाद बदल जाएगा बिहार का सियासी मिजाज
साल 2025 के विधानसभा चुनाव परिणामों ने एनडीए को एक नई मजबूती प्रदान की है। अब राज्यसभा के जरिए वह अपनी इस पकड़ को और गहरा करना चाहता है। भाजपा को दो सीटें और जदयू को एक या दो सीटें मिलने की संभावना है। सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ही नामों का चयन किया गया है। दिल्ली और पटना के शीर्ष नेतृत्व के बीच गहन मंथन के बाद ही यह लिस्ट तैयार हुई है। निशांत कुमार की एंट्री से जहां जदयू के भीतर एक नया उत्साह है, वहीं पवन सिंह के नाम ने युवाओं को आकर्षित किया है। बिहार की यह राज्यसभा जंग न केवल सांसदों का चुनाव करेगी, बल्कि 2026 और उसके बाद की राजनीति की नई दिशा भी तय करेगी।


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