
बंगाल में नगर निकायों पर BJP की नजर, TMC का शहरी गढ़ दबाव में
पश्चिम बंगाल में नगर निकायों को लेकर BJP और TMC के बीच टकराव तेज हो गया है। KMC विवाद और पार्षदों के इस्तीफों से राजनीतिक तनाव बढ़ा।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद अब भाजपा राज्य के नगर निकायों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पकड़ कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके शुरुआती संकेत कोलकाता नगर निगम (KMC) में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफों के रूप में सामने आने लगे हैं।
शुक्रवार (22 मई) को यह टकराव उस समय और गहरा गया, जब KMC का मासिक सत्र मुख्य सदन में आयोजित नहीं हो सका। आरोप है कि नगर निगम अधिकारियों ने सभा कक्ष नहीं खोला, जिसके बाद TMC पार्षदों को कोलकाता स्थित मुख्यालय भवन के अंदर काउंसिलरों के मनोरंजन कक्ष में बैठक करनी पड़ी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब KMC प्रशासन ने TMC सांसद Abhishek Banerjee और उनके परिवार से जुड़ी कोलकाता की संपत्तियों के दस्तावेज मांगे थे। इस कदम के बाद यह सवाल उठने लगे कि नगर निगम की निर्वाचित इकाई के पास अब कितनी प्रशासनिक शक्ति बची है, खासकर तब जब मेयर Firhad Hakim समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया कि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी ही नहीं थी।
TMC को साजिश का शक
इन घटनाओं ने TMC की उस आशंका को और मजबूत कर दिया है कि भाजपा सरकार नगर प्रशासन और भ्रष्टाचार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर उन नगर निकायों में अस्थिरता पैदा कर रही है, जो लंबे समय से पार्टी के शहरी राजनीतिक नेटवर्क की रीढ़ रहे हैं।
एक वरिष्ठ TMC नेता ने कहा,
“अब यह सब संयोग नहीं लग रहा। उद्देश्य नगर निकायों के भीतर भ्रम पैदा करना, पार्षदों को अलग-थलग करना और धीरे-धीरे संगठनात्मक ढांचे को कमजोर करना है।”TMC प्रमुख Mamata Banerjee और मेयर फिरहाद हकीम की टिप्पणियों में भी यह चिंता साफ दिखाई दी। KMC में शुक्रवार को हुए विवाद के बाद नगर निगम की चेयरपर्सन Mala Roy ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई।
ममता बनर्जी ने पार्षदों से कहा- इस्तीफा मत दो
ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कालीघाट स्थित अपने आवास पर पार्षदों की बैठक में कहा, “इस्तीफा मत दो। जैसे ही आप इस्तीफा देंगे, वे कब्जा कर लेंगे। जमीन पर डटे रहिए और लोगों की सेवा करते रहिए।” वहीं फिरहाद हकीम ने KMC के अंदर हुई घटना को “नगरपालिका के लिए काला दिन” बताया और अधिकारियों से टकराव की बजाय आम जनता के हित में मिलकर काम करने की अपील की।
BJP ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
भाजपा ने TMC के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह केवल वर्षों से चले आ रहे भ्रष्टाचार, वसूली और प्रशासनिक अव्यवस्था को उजागर कर रही है।भाजपा विधायक Sajal Ghosh ने कहा, “यह नगर निगम है, तृणमूल कांग्रेस का पार्टी कार्यालय नहीं। यहां कानून नियमों के अनुसार चलेगा, न कि फिरहाद हकीम या TMC की इच्छा से।” उन्होंने TMC पर राज्य की सत्ता खोने के बाद नगर निकायों में “कृत्रिम अराजकता” पैदा करने का आरोप भी लगाया।
उत्तर 24 परगना में बढ़ी अस्थिरता
नगर निकायों में अस्थिरता के सबसे स्पष्ट संकेत उत्तर 24 परगना और आसपास के औद्योगिक इलाकों में दिखाई दे रहे हैं।भाटपाड़ा नगर पालिका में 35 में से 30 पार्षदों ने इस्तीफा दिया, जिनमें चेयरपर्सन रेबा राहा भी शामिल हैं। हलिशहर नगर पालिका में 23 में से 16 पार्षदों ने पद छोड़ा।कांचरापाड़ा नगर पालिका में भी 14 पार्षदों ने इस्तीफा दिया।
सार्वजनिक तौर पर कई पार्षदों ने व्यक्तिगत कारण या संगठनात्मक विवाद को वजह बताया, लेकिन अंदरखाने TMC नेताओं का कहना है कि पुलिस कार्रवाई और भ्रष्टाचार जांच का डर तेजी से फैल रहा है।
लगातार गिरफ्तारियों से बढ़ा दबाव
हाल के दिनों में TMC से जुड़े कई नगर नेताओं की गिरफ्तारी ने भी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।बिधाननगर नगर निगम के वार्ड 34 के पार्षद और बरो-5 चेयरमैन रंजन पोद्दार को कथित अवैध वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया।बिधाननगर के ही पार्षद सम्राट बरुआ को भी एक अन्य उगाही मामले में पकड़ा गया।
कूचबिहार में TMC पार्षद उज्ज्वल तर को चुनाव प्रचार के दौरान धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
इसके अलावा, साउथ दमदम नगर पालिका के एक TMC पार्षद की संदिग्ध मौत ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच चिंता और बढ़ा दी है।
BJP की दोहरी रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा दोहरी रणनीति पर काम कर रही है। एक ओर वह नगर निकायों में भ्रष्टाचार और सिंडिकेट राज के खिलाफ प्रशासनिक सफाई अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर इसका दबाव TMC के स्थानीय राजनीतिक ढांचे को कमजोर कर रहा है।
सिलीगुड़ी के वरिष्ठ पत्रकार Probir Pramanik कहते हैं, “बंगाल की नगरपालिकाएं सिर्फ प्रशासनिक संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि राजनीतिक इकोसिस्टम हैं। ये ठेके, लाइसेंस, स्थानीय प्रभाव और संगठनात्मक नेटवर्क को नियंत्रित करती हैं। इन्हें कमजोर करना मतलब पार्टी संगठन को कमजोर करना।”
KMC में बढ़ता टकराव
KMC में शुक्रवार को हुआ विवाद निर्वाचित TMC प्रतिनिधियों और भाजपा सरकार के अधीन काम कर रहे प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है।चेयरपर्सन माला रॉय ने नगर सचिव किशोर कुमार बिस्वास पर सदन की बैठक कराने में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। इसके बाद TMC बोर्ड ने प्रशासनिक बाधा डालने के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया।मेयर फिरहाद हकीम ने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम के अंदर यह टकराव जारी रहा, तो नागरिक सेवाओं और मानसून तैयारियों पर असर पड़ सकता है।
अभिषेक बनर्जी की संपत्ति पर नोटिस से बढ़ा विवाद
अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों से जुड़े नोटिस ने विवाद को और बढ़ा दिया। TMC नेताओं का मानना है कि इससे यह संदेश गया कि KMC का प्रशासनिक ढांचा अब पूरी तरह पार्टी नेतृत्व के नियंत्रण में नहीं रहा।
अभिषेक बनर्जी ने भाजपा सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया और पूछा कि आखिर उनकी संपत्तियों में अवैध क्या है।हालांकि ममता बनर्जी ने पार्षदों और मेयर परिषद के सदस्यों को भरोसा दिलाया कि पार्टी उनके साथ खड़ी है और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता भी देगी, लेकिन इसके बावजूद संगठन के भीतर दबाव और असहजता के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं।

