
मुंबई में 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स': बहुमत के बावजूद क्यों डरे हैं एकनाथ शिंदे?
महायुति के पास 118 सीटें, फिर भी पार्षदों को होटल में किया नजरबंद; हॉर्स-ट्रेडिंग की आशंकाओं के बीच पांच सितारा होटल में 'नजरबंद' हुए पार्षद।
Shinde's Shiv Sena : देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के चुनाव नतीजे आने के बाद मुंबई की राजनीति एक बार फिर 'रिजॉर्ट' के कमरों में सिमट गई है। चुनाव में भाजपा-शिंदे गठबंधन (महायुति) को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद भी हलचल शांत नहीं हुई है। ताजा घटनाक्रम में, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के एक आलीशान फाइव स्टार होटल में शिफ्ट कर दिया है। उद्धव ठाकरे गुट का कहना है कि चुनाव तो खत्म हो गए, लेकिन "असली राजनीति" अभी शुरू होनी बाकी है।
क्या कहते हैं बीएमसी की सीटों के समीकरण?
बीएमसी की कुल 227 सीटों में बहुमत के लिए 114 का आंकड़ा जरूरी है। इस बार के नतीजों ने सबको चौंकाया है:
महायुति (बहुमत पार): भाजपा ने अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 89 सीटें जीती हैं, जबकि शिंदे गुट को 29 सीटें मिली हैं। दोनों का योग 118 होता है, जो बहुमत से 4 ज्यादा है। अजीत पवार की एनसीपी (3 सीटें) भी इनके साथ है।
विपक्ष (ठाकरे गुट व अन्य): शिवसेना (UBT) को 65, मनसे को 6 और शरद पवार की एनसीपी को 1 सीट मिली है (कुल 72)। कांग्रेस (24), AIMIM (8) और सपा (2) को मिलाकर विपक्ष का आंकड़ा 106 तक पहुंचता है, जो बहुमत से महज 8 दूर है।
हॉर्स ट्रेडिंग का डर या अपनों से खतरा?
सवाल यह उठ रहा है कि जब महायुति के पास बहुमत है, तो रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की जरूरत क्यों पड़ी? राजनीतिक जानकारों के मुताबिक इसके दो मुख्य कारण हैं:
विपक्ष की सेंधमारी: अगर पूरा विपक्ष एकजुट हो जाए, तो उन्हें बहुमत के लिए शिंदे गुट के केवल 8 पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। टीम शिंदे इस जोखिम को कम नहीं आंकना चाहती।
मेयर पद की रस्साकशी: असली पेंच मेयर की कुर्सी को लेकर फंसा है। दशकों से मुंबई का मेयर शिवसेना का रहा है। शिंदे पर भारी दबाव है कि वे बालासाहेब ठाकरे की विरासत को बचाने के लिए मेयर पद अपने पास रखें। वहीं, सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा इस बार अपना मेयर बनाना चाहती है। पिछले साल मुख्यमंत्री पद त्यागने के बाद अब मेयर पद भी हाथ से जाना शिंदे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका हो सकता है।
उद्धव ठाकरे की चुनौती और 'सामना' का प्रहार
शिवसेना (UBT) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए शिंदे पर सीधा हमला बोला है। संपादकीय में पूछा गया है, "शिवसेना ने मुंबई को 23 मराठी मेयर दिए हैं, क्या यह परंपरा जारी रहेगी?" उद्धव गुट का आरोप है कि भाजपा ने विकास के नाम पर नहीं, बल्कि 'पैसे और पावर' के दम पर जीत हासिल की है। उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं से यहाँ तक कहा, "मेरा सपना मुंबई में शिवसेना (UBT) का मेयर बिठाने का है और ईश्वर ने चाहा तो यह सच होगा।"
देवेंद्र फडणवीस का तंज
उद्धव के बयान पर चुटकी लेते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "ईश्वर ने पहले ही तय कर दिया है कि मुंबई का मेयर महायुति का ही होगा।" उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी पूछा कि उद्धव ने 'देवा' शब्द का इस्तेमाल भगवान के लिए किया या फडणवीस के लिए (चूंकि उन्हें भी प्यार से देवा बुलाया जाता है)।
फिलहाल, मुंबई की राजनीति में पर्दे के पीछे की उठापटक तेज है। सबकी नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या भाजपा अपने छोटे भाई (शिंदे) को मेयर की कुर्सी देगी या एक बार फिर शिंदे को समझौते की मेज पर झुकना पड़ेगा।
Next Story

