मुंबई को नए मेयर के लिए करना होगा अभी इंतजार, लॉटरी से तय होगा नया मेयर
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बीजेपी और शिंदे के बीच मेयर पद को लेकर खींचतान हो रही है

मुंबई को नए मेयर के लिए करना होगा अभी इंतजार, लॉटरी से तय होगा नया मेयर

बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच मेयर पद को लेकर खींचतान चल रही है। लेकिन मुंबई का नया मेयर तय करने की एक कानूनी प्रक्रिया भी है जिसे समझना जरूरी है


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मुंबई महानगरपालिका के बहुप्रतीक्षित चुनाव संपन्न हो चुके हैं, लेकिन शहर को तुरंत नया मेयर नहीं मिलने वाला है। इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि विजयी महायुति गठबंधन के साझेदार, बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, इस अहम पद को लेकर आपस में खींचतान में हैं। बल्कि इसलिए भी कि मेयर का चुनाव एक अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है, जो नई सदन (हाउस) के औपचारिक गठन के बाद ही शुरू होती है।

वार्डों के नतीजों के विपरीत, जिन्हें मतदाता सीधे चुनते हैं, मेयर का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाता है। इसके अलावा, मेयर का पद आरक्षण-रोटेशन के तहत आता है। जब तक लॉटरी के जरिए आरक्षण तय नहीं हो जाता और इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं कर सकते। इसी कारण इस सप्ताह मुंबई को मेयर मिलने की संभावना कम है।

मेयर पद के लिए आरक्षण प्रणाली क्या है?

देशभर के अधिकांश शहरी स्थानीय निकायों के कानूनों के तहत मेयर का पद अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं के लिए रोटेशन के आधार पर आरक्षित किया जाता है। यह आरक्षण पहले से तय नहीं होता। बल्कि शहरी विकास विभाग द्वारा कराई जाने वाली लॉटरी (ड्रॉ ऑफ लॉट्स) के जरिए तय किया जाता है।

लॉटरी होने और श्रेणी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही मेयर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसी वजह से मतदान और मतगणना पूरी होने के बाद भी मुंबई को मेयर के लिए कुछ दिन इंतजार करना पड़ सकता है।

रोटेशन के आधार पर आरक्षण क्यों होता है?

मेयर पद के आरक्षण की व्यवस्था 74वें संविधान संशोधन से जुड़ी है, जिसने शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया और नेतृत्व पदों में SC, ST और महिलाओं के लिए आरक्षण अनिवार्य किया। महाराष्ट्र में यह व्यवस्था नगर निगम अधिनियम के जरिए लागू की जाती है, जिसमें OBC के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है।

न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानून यह भी तय करता है कि मेयर का पद हर कार्यकाल में अलग-अलग श्रेणियों के बीच रोटेशन के तहत बदले।

आरक्षण तय करने के लिए लॉटरी का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

लॉटरी प्रणाली का उद्देश्य प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखना है। लॉटरी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि राजनीतिक दल या सरकारें अपने हित में आरक्षण तय न कर सकें। यादृच्छिक ड्रॉ के माध्यम से रोटेशन होने से यह भी सुनिश्चित होता है कि समय-समय पर अलग-अलग सामाजिक वर्गों को मेयर की कुर्सी तक पहुंचने का अवसर मिले, न कि बार-बार एक ही श्रेणी को लाभ हो।

लॉटरी की प्रक्रिया कैसे होती है?

इस प्रक्रिया की शुरुआत शहरी विकास विभाग द्वारा लॉटरी कराने की अधिसूचना जारी करने से होती है। पिछले कार्यकालों के आधार पर अधिकारी पात्र श्रेणियों की एक रोटेशन सूची तैयार करते हैं। इसके बाद सार्वजनिक रूप से लॉटरी निकाली जाती है।

जैसे ही पर्ची निकाली जाती है, आरक्षण की श्रेणी तय मानी जाती है और उसकी औपचारिक अधिसूचना जारी की जाती है। इसके बाद ही बीएमसी पार्षदों की एक विशेष बैठक बुलाई जाती है, जिसमें लॉटरी के अनुसार आरक्षित या सामान्य श्रेणी से मेयर का चुनाव किया जाता है।

मेयर का चुनाव साधारण बहुमत से होता है। मुंबई में इसका मतलब है 227 सदस्यीय सदन में 114 से अधिक पार्षदों का समर्थन। आरक्षण लॉटरी के अनुसार मुंबई के पिछले दो मेयर सामान्य (ओपन) श्रेणी से रहे हैं।

मुंबई के मेयर के पास वास्तव में क्या अधिकार होते हैं?

संविधान और मुंबई नगर निगम अधिनियम के अनुसार, मेयर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) का औपचारिक या सांकेतिक प्रमुख होता है। मेयर को पार्षद अपने बीच से ढाई साल के कार्यकाल के लिए चुनते हैं।

मेयर की भूमिका मुख्य रूप से सामान्य सभा की बैठकों की अध्यक्षता करने, बहस के दौरान व्यवस्था बनाए रखने और बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट देने तक सीमित होती है। इसके अलावा, मेयर आधिकारिक कार्यक्रमों में मुंबई के ‘प्रथम नागरिक’ के रूप में शहर का प्रतिनिधित्व करता है और निर्वाचित प्रतिनिधियों व प्रशासन के बीच सेतु का काम करता है।

हालांकि, मेयर के पास नगर निगम के विभागों या वित्तीय मामलों का नियंत्रण नहीं होता। ये अधिकार नगर आयुक्त के पास होते हैं, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक आईएएस अधिकारी होता है।

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