
बजट 2026 में बिहार को क्या मिला? बड़े ऐलान नहीं, उम्मीदें बरकरार
बजट 2026 में बिहार के लिए बड़े ऐलान नहीं हुए, गंगा कॉरिडोर, इनलैंड वाटरवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर से विकास और रोजगार की उम्मीद जगी।
बजट 2026 को एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया। सियासी दल इसकी अलग अलग तरह से व्याख्या कर रहे हैं। सत्ता पक्ष की नजर में यह विकसित भारत के सपने को साकार करेगा तो विपक्ष ने दिशाहीन बजट बताया। इन सबके बीच लोगों की नजरें इस बात पर भी टिकी है कि उनके राज्य को क्या मिला। विपक्ष का कहना है कि सरकार उन राज्यों पर मेहरबान हुई है जहां चुनाव होने हैं। वहीं उन राज्यों का भुला दिया गया है जहां पर चुनाव नहीं हो रहे हैं बिहार उनमें से एक हैं। यहां हम आपको बताएंगे कि बिहार को केंद्रीय बजट 2026 में क्या कुछ मिला है।
अगर बजट 2026 को देखें तो बिहार के लिए कुछ खास ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि कुछ घोषणाओं से राज्य को लाभ मिलने की उम्मीद है। गंगा नदी के किनारे बाजार विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही हाई स्पीड कॉरिडोर का लाभ मिलेगा। यहां बता दें कि वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर का ज्यादातर हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा।
केंद्रीय बजट में बिहार को क्या मिला
गंगा कॉरिडोर, माल ढुलाई की लागत घटेगी
केंद्रीय कर में 1.51 लाख करोड़ की हिस्सेदारी
वाराणसी- सिलीगुड़ी सेमी हाई स्पीड कॉरिडोर बिहार से गुजरेगा
पटना में शिप रिपेयरिंग की सुविधा
गया, मुजफ्फरपुर, पटना टीयर-2, टीयर-3 शहरों का विकास
पांच साल में राज्य के विकास के लिए पांच हजार करोड़ की व्यवस्था
एमएसएमई सेक्टर को 10 हजार करोड़ के फंड से लाभ
पटना में इनलैंड वाटर वे और शिप रिपेयर किया जाएगा। इसका सीधा फायदा पटना, भोजपुर, बेगुसराय, मुंगेर, भागलपुर जिलों को मिलने की उम्मीद है। गंगा कॉरिडोर से माल ढुलाई में इजाफा होगा और उसका फायदा स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में नजर आएगा।
बिहार के आठ शहरों को बड़ा फायदा
केंद्रीय करों में बिहार की हिस्सेदारी
2022-23 में 1.10 लाख करोड़
2023- 24 में 1.50 लाख करोड़
2024-25 में 1.73 लाख करोड़
2025-26 में 2 लाख करोड़ के करीब
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश करने के दौरान कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया गया है। इसमें राज्यों को केंद्रीय टैक्स के 41 फीसद हिस्से को बरकरार रखा गया है। बता दें कि वित्त वर्ष 2026- 27 में केंद्र के जरिए जो टैक्स की वसूली की गई है उसमें 1.51 लाख करोड़ बिहार को मिला है जबकि हिस्सेदारी 1.62 लाख करोड़ का है।

