
बिहार में नाबालिग को आवास, परिवहन में करोड़ों की चपत, CAG रिपोर्ट से हड़कंप
CAG रिपोर्ट में बिहार के परिवहन, आवास, कृषि व राजस्व विभागों में करोड़ों के नुकसान और अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।
बिहार की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवहन, प्रधानमंत्री आवास योजना, कृषि इनपुट सब्सिडी और राजस्व विभागों में व्यापक गड़बड़ियों और करोड़ों रुपये के नुकसान का खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट गुरुवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश की गई।
परिवहन विभाग में सैकड़ों करोड़ की चूक
रिपोर्ट के मुताबिक पटना और गोपालगंज में डीलरों ने आपस में ही बीएस-4 वाहनों का पंजीकरण कराया। ई-चालान से जुड़े 203 करोड़ रुपये की वसूली लंबित रखी गई। वाहन सॉफ्टवेयर में खरीद की तिथि गलत दर्ज होने से 4.35 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि डीलरों पर 13.97 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाना था।
अन्य मदों में भी भारी राजस्व हानि सामने आई है। गैर-परिवहन वाहनों से 85.20 करोड़ रुपये का संभावित राजस्व नहीं मिला। माल वाहनों के स्वामित्व हस्तांतरण में 57 लाख रुपये का नुकसान हुआ। ट्रैक्टर-ट्रेलर मालिकों को सर्वक्षमा योजना का अनुचित लाभ देने से 1.62 करोड़ रुपये की क्षति हुई। स्थायी परमिट जारी करने में 28.09 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। फिटनेस प्रमाणपत्र नवीनीकरण शुल्क में 2.27 करोड़ रुपये की कमी पाई गई। नमूना जांच में 50.40 करोड़ रुपये की गड़बड़ी उजागर हुई।
प्रधानमंत्री आवास योजना में अपात्रों को लाभ
वर्ष 2019 से 2022 के बीच चार जिलों में 21 ऐसे परिवारों को आवास स्वीकृत किया गया, जिनके पास पहले से पक्का मकान था। इन पर 24.30 लाख रुपये खर्च किए गए।इसके अलावा कुछ नाबालिगों को भी 2.50 लाख रुपये का भुगतान कर आवास स्वीकृत कर दिया गया, जबकि उनके माता-पिता जीवित थे। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि अपात्र लोगों को लाभ देने के कारण कई पात्र परिवार योजना से वंचित रह गए।
कृषि इनपुट सब्सिडी में नियमों की अनदेखी
वर्ष 2019 में 10 ऐसे जिलों में 21.48 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित की गई, जिन्हें बाढ़ प्रभावित घोषित नहीं किया गया था। इसी तरह 14 अन्य जिलों में 4.03 करोड़ रुपये का भुगतान ऐसे क्षेत्रों के नाम पर किया गया, जो आपदा प्रभावित सूची में शामिल नहीं थे।रबी और खरीफ सीजन 2019-20 के दौरान 151.92 करोड़ रुपये की सब्सिडी 1.34 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में वितरित की गई, जो निर्धारित फसल क्षति क्षेत्र से अधिक था।
राजस्व विभाग में हजारों करोड़ लंबित
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की 961 इकाइयों में से 66 की जांच की गई। जांच में 3546.95 करोड़ रुपये के सैरात मामलों का निपटारा लंबित पाया गया। रिपोर्ट में राजस्व वसूली की स्थिति को चिंताजनक बताया गया है।
सदन में पेश हुई रिपोर्ट, अब होगी जांच
वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने प्रश्नोत्तर काल के बाद सीएजी की चार लेखा परीक्षा रिपोर्ट सदन के पटल पर रखीं। इससे पहले महालेखाकार (लेखापरीक्षा-II) हाउतिनल्ल स्वानतक और अन्य अधिकारियों ने रिपोर्ट की प्रतियां विधान परिषद सभापति अवधेश नारायण सिंह तथा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को सौंपीं।
अब इन रिपोर्टों की विस्तृत समीक्षा बिहार विधानसभा की लोक लेखा समिति द्वारा की जाएगी, जिससे आगे की कार्रवाई का रास्ता तय होगा।

