
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज
अदालत ने कहा कि नामजद आरोपियों के अलावा दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता भी सामने आई है, जिनकी पहचान और भूमिका की जांच की जाएगी।
प्रयागराज के झूंसी थाने में ज्योतिर्मठ पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी सहित दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ बाल यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई इलाहाबाद जिला न्यायालय की विशेष पॉक्सो अदालत के आदेश पर की गई।
कोर्ट के निर्देश पर दर्ज हुई एफआईआर
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने शनिवार को झूंसी पुलिस को लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे। अदालत में दाखिल अर्जी में आरोप लगाया गया था कि माघ मेले के दौरान गुरु सेवा के नाम पर दो बालकों का कथित यौन शोषण किया गया।
अदालत ने पीड़ित बालकों को न्यायालय में पेश कर उनके बयान दर्ज कराए और पुलिस आयुक्त से विस्तृत रिपोर्ट तलब की। रिपोर्ट और बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपों को गंभीर मानते हुए स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच के आदेश दिए। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि वह आरोपों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है।
मेडिकल परीक्षण और डिजिटल साक्ष्यों की जांच
अपने 14 पृष्ठीय आदेश में अदालत ने कहा कि पीड़ितों और आरोपियों का चिकित्सीय परीक्षण कराया जा सकता है। पुलिस को गवाहों के बयान दर्ज करने, घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने, मोबाइल लोकेशन, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सहित डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने कहा कि नामजद आरोपियों के अलावा दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता भी सामने आई है, जिनकी पहचान और भूमिका की जांच की जाएगी।
पुलिस की भूमिका पर टिप्पणी
अदालत ने यह भी नोट किया कि पीड़ितों ने थाने से लेकर कमिश्नर कार्यालय तक शिकायत की, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई। जांच रिपोर्ट में पीड़ितों के ऑडियो-वीडियो बयान प्रथम दृष्टया विश्वसनीय पाए गए हैं। अदालत ने कहा कि मामला जटिल है और सच्चाई तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञ जांच आवश्यक है।
मौनी अमावस्या से जुड़ा पुराना विवाद
गौरतलब है कि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेले में शंकराचार्य और जिला प्रशासन के बीच पालकी से संगम स्नान को लेकर विवाद हुआ था। बाद में शंकराचार्य धरने पर बैठ गए थे और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी। मामला तूल पकड़ने पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार की आलोचना की थी।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

