अपार्टमेंट्स के लिए PNG अनिवार्य, लेकिन तमिलनाडु काफी पीछे
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अन्य राज्यों, खासकर महानगरों में, पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को तेजी से अपनाया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार तमिलनाडु सरकार अब भी इस दिशा में हिचकिचाहट दिखा रही है।

अपार्टमेंट्स के लिए PNG अनिवार्य, लेकिन तमिलनाडु काफी पीछे

कमजोर पाइपलाइन ढांचा, राजनीतिक अनिच्छा और “सिलेंडर ही काफी है” जैसी सोच इस क्षेत्र में प्रगति में बाधा बन रही है।


स्वच्छ, सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय घरेलू ईंधन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने उन क्षेत्रों में अपार्टमेंट्स के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन अनिवार्य कर दिया है, जहां इसकी आधारभूत संरचना उपलब्ध है।

24 मार्च को जारी नए आदेश के तहत, ऐसे घरों में यदि निवासी PNG पर स्विच नहीं करते हैं, तो तीन महीने के बाद एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी।

यह कदम वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बीच आयातित एलपीजी पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है और इसका खास असर उन राज्यों पर पड़ेगा जो PNG अपनाने में पीछे हैं, जैसे कि तमिलनाडु।

त्वरित कार्रवाई की मांग

विशेषज्ञों और शहरी योजनाकारों ने तमिलनाडु सरकार से तुरंत कदम उठाने की अपील की है। उनका सुझाव है कि:

* PNG को अनिवार्य बनाने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं

* तमिलनाडु कॉमन बिल्डिंग रूल्स में संशोधन किया जाए

* स्थानीय निकायों द्वारा सख्ती से लागू किया जाए

साथ ही, संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक आधारभूत ढांचे को तेजी से विकसित कर सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जाए।

धीमी प्रगति के कारण

चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण (CMDA) के अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु में धीमी प्रगति का कारण “जागरूकता की कमी और राजनीतिक दृष्टि व इच्छाशक्ति का अभाव” है।

वे बताते हैं कि राज्य में सड़कों का चौड़ीकरण किया जा रहा है, जिसमें सीवेज, गैस और बिजली लाइनों के लिए अलग-अलग डक्ट्स और पैदल मार्ग भी शामिल किए जा रहे हैं।

इसके बावजूद आलोचकों का मानना है कि PNG को अपनाने में राजनीतिक अनिच्छा सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

पानी को प्राथमिकता, PNG पीछे

एसोसिएशन ऑफ प्रोफेशनल टाउन प्लानर्स के अध्यक्ष के.एम. सदानंद ने *The Federal* से बातचीत में स्पष्ट कहा: “चेन्नई में केवल कुछ ही कंपनियां इस पर काम कर रही हैं। समुद्र तट और बंदरगाह के पास राष्ट्रीय राजमार्ग के जरिए शहर-से-शहर गैस भंडारण की व्यवस्था है, लेकिन शहर के भीतर अभी तक ऐसी कोई योजना नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा,“शहरी विकास प्राधिकरण तभी सक्रिय होता है जब बहुत जरूरी हो। PNG बहुत सस्ता है। विकसित देश इसका उपयोग कर रहे हैं, लेकिन हम नहीं कर रहे। हम बार-बार पानी, ड्रेनेज और बिजली लाइनों के लिए सड़कों को खोदते रहते हैं। निजी कंपनियां इस परियोजना को बेहतर तरीके से लागू कर सकती हैं।”

राजनीतिक और संरचनात्मक बाधाएं

सदानंद के अनुसार, तमिलनाडु इस मामले में “न तो सक्रिय है और न ही पहल करने वाला”, क्योंकि राज्य का ध्यान मुख्य रूप से स्टॉर्म वाटर और ड्रेनेज समस्याओं पर है।

उन्होंने कहा,“पहले साल में एक बार बाढ़ आती थी, लेकिन हम उसी को लेकर चिंतित हैं, PNG सेवा को लेकर नहीं।”

उन्होंने संभावित स्वार्थों की ओर भी इशारा किया: “कई निजी एलपीजी कंपनियां राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों द्वारा चलाई जाती हैं, इसलिए राजनीतिक नेता PNG सेवा पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि LPG सिलेंडर सिस्टम की तुलना में PNG सबसे सुरक्षित विकल्प है।”

तमिलनाडु में PNG के केवल कुछ ही खिलाड़ी सक्रिय

The Federal की जांच से पता चलता है कि चेन्नई के अधिकांश निजी अपार्टमेंट अभी भी थोक एलपीजी सिलेंडर खरीदते हैं और उन्हें पाइप के जरिए अलग-अलग घरों तक पहुंचाते हैं। केवल कुछ नए बने अपार्टमेंट्स ने PNG अपनाया है, जहां निजी कंपनियों ने आपूर्ति शुरू की है।

दो निजी कंपनियां, Torrent Gas Chennai Pvt Ltd और THINK Gas (AGP CGD India Pvt Ltd के रूप में संचालित), चेन्नई और इसके उपनगरों में इस दिशा में प्रयासों का नेतृत्व कर रही हैं। इन्हें Petroleum and Natural Gas Regulatory Board (PNGRB) से सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) के विशेष अधिकार मिले हुए हैं।

PNG रोलआउट के शुरुआती चरण में उत्तर और मध्य चेन्नई के कई इलाकों—मनाली, माधवरम, पेरंबूर, रॉयापुरम और तिरुवोट्टियूर—के निवासी अब घरेलू कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

दक्षिण चेन्नई में ओल्ड महाबलीपुरम रोड (OMR), ईस्ट कोस्ट रोड (ECR), शोलिंगनल्लूर, सिरुसेरी और तांबरम में विस्तार कार्य तेजी से चल रहा है। वहीं, पश्चिम चेन्नई के अंबत्तूर, अवडी और पूनामल्ली में पाइपलाइन बिछाने का काम जारी है।

योजना और क्रियान्वयन में बड़ी चुनौतियां

हालांकि PNG कनेक्शन को लेकर लोगों में अच्छी स्वीकार्यता है, लेकिन इसे सही तरीके से लागू करना आसान नहीं है।

तमिलनाडु में जमीन अधिग्रहण और पाइपलाइन बिछाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक निजी PNG वितरक कंपनी के कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा: “अगर सरकार जमीन अधिग्रहित करके हमें सौंप दे, तो हम इस परियोजना को बहुत तेजी से पूरा कर सकते हैं।”

लॉजिस्टिक्स और अनुमति सबसे बड़ी बाधा

Torrent Gas और THINK Gas दोनों ही घरेलू उपभोक्ताओं, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, उद्योगों और CNG स्टेशनों के लिए पाइपलाइन नेटवर्क तेजी से बढ़ा रहे हैं।

1 जनवरी को PNGRB द्वारा एकीकृत पाइपलाइन टैरिफ लागू होने के बाद Torrent Gas ने कीमतों में प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (scm) ₹2 तक की कटौती की और THINK Gas ने ₹4 प्रति scm तक कीमत घटाई। इससे PNG, LPG से भी सस्ता हो गया है।

एक प्रमुख निजी गैस वितरण कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर हरी के अनुसार, कांचीपुरम और चेंगलपट्टू जिलों के लगभग 70% आवासीय क्षेत्रों—जैसे तांबरम, केलंबक्कम, सेम्मनचेरी, थलंबूर और करप्पक्कम—में PNG कनेक्शन पहुंच चुका है।

फिर भी, राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों से समय पर अनुमति मिलना एक बड़ी समस्या बना हुआ है।

उन्होंने कहा, “मेट्रो रेल का निर्माण 24 घंटे चलता है, लेकिन हमें पाइपलाइन बिछाने की अनुमति केवल रात 12 बजे से 3 बजे के बीच ही मिलती है।”

उन्होंने आगे कहा कि जहां सरकार-से-सरकार (G2G) परियोजनाओं को पूरा सहयोग मिलता है, वहीं निजी कंपनियां अब भी नुकसान में रहती हैं। उन्होंने प्रशासनिक सहयोग बढ़ाने की मांग की।

हरी ने यह भी बताया कि तमिलनाडु में जमीन की कीमतें पिछले दो वर्षों में 30-40 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं, जिसके कारण कंपनियों को जमीन खरीदने के बजाय दीर्घकालिक लीज मॉडल अपनाना पड़ रहा है।

व्यवहारिक सोच भी बड़ी बाधा

सबसे बड़ी समस्या “सिलेंडर ही काफी है” वाली सोच है।

ऊंची इमारतों वाले अपार्टमेंट्स में, जहां लगभग 70 प्रतिशत निवासी किरायेदार होते हैं, कई घरों में दिन में तीन बार खाना नहीं बनता। इसके अलावा लोग सिक्योरिटी डिपॉजिट, मीटरिंग चार्ज और घर के अंदर पाइप आने से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को लेकर भी संदेह में रहते हैं।

हरी ने जोर देकर कहा, “इस सोच को बदलना होगा।”

अन्य महानगरों में PNG की सफलता

जहां तमिलनाडु देरी से जूझ रहा है, वहीं देश के बड़े महानगरों ने PNG को बड़ी सफलता के साथ अपनाया है—जिससे स्वच्छ हवा, निर्बाध आपूर्ति और लागत में बड़ी बचत मिली है।

दिल्ली: एक आदर्श मॉडल

* Indraprastha Gas Limited (IGL) ने जनवरी 2026 तक 33 लाख से अधिक घरेलू PNG कनेक्शन दिए

* हर महीने हजारों नए कनेक्शन जुड़ रहे हैं

* नेटवर्क अब राजधानी के अधिकांश हिस्सों तक फैल चुका है, जिसमें 350 में से 260 गांव भी शामिल हैं

* LPG आपूर्ति की मौजूदा चिंताओं के बीच, IGL रोजाना 1,300–1,500 नए कनेक्शन लगा रहा है

* PNG के लिए आवेदन में 200% की वृद्धि हुई है

नतीजा—लाखों लोगों के लिए बेहतर वायु गुणवत्ता और बिना झंझट खाना पकाने की सुविधा

अन्य शहर भी आगे

* मुंबई और पुणे में Mahanagar Gas Limited के तहत मजबूत PNG नेटवर्क

* अहमदाबाद और सूरत में व्यापक पाइपलाइन, जो अब अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रही है

* बेंगलुरु में GAIL Gas समेत अन्य कंपनियों द्वारा तेजी से विस्तार

राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति

* भारत में लगभग 1.6 करोड़ PNG कनेक्शन हैं

* इनमें से 1 करोड़ से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं

* मार्च के पहले तीन हफ्तों में ही 3.5 लाख से ज्यादा नए घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन जुड़े

यह तेजी एलपीजी पर दबाव कम करने की जरूरत के चलते आई है।

अब तमिलनाडु की बारी

केंद्र सरकार की तीन महीने की समयसीमा नजदीक है। अब गेंद तमिलनाडु के पाले में है—

क्या राज्य इस मौके का फायदा उठाएगा, या फिर दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों की तरह PNG की सफलता से पीछे ही रह जाएगा?

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