अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी सरकार में टकराव बढ़ा, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कहा समाधान की कोशिश होगी
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अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी सरकार में टकराव बढ़ा, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कहा समाधान की कोशिश होगी

अखाड़ा परिषद अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में समाधान की कोशिश करेगा।अध्यक्ष रवीन्द्र पुरी ने अविमुक्तेश्वरानंद के योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी का विरोध किया है।साथ ही कहा है कि वो इसके समाधान की कोशिश करेंगे।


अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती और योगी सरकार में टकराव जारी है।अब अखाड़ा परिषद ने यह कहकर अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती पर हमला किया है कि माघ मेला में शाही स्नान नहीं होता।साथ ही उनको मुख्यमंत्री को अपशब्द नहीं कहना चाहिए।वहीं यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए कहा है कि कुछ कालनेमि धर्म की आड़ में सनातन को बदनाम करने की साज़िश कर रहे हैं। इस बीच प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बाहर दूसरा नोटिस चस्पा कर दिया है।

संतों का इस तरह राजनीति करना ठीक नहीं : रवीन्द्र पुरी

माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और योगी सरकार का टकराव बढ़ गया है। इस बीच संत समाज भी दो ख़ेमे में बँटा नज़र आ रहा है।कुछ संत अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में आ गए हैं तो कुछ ने हठ बताकर उनका विरोध किया है।अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी इस मुद्दे पर अविमुक्तेश्वरानंद की आलोचना की है।अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने कहा है कि मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करना ग़लत है।उन्होंने कहा कि'अविमुक्तेश्वरानंद के साथ प्रशासन ने ग़लत किया तो उनको हमको फ़ोन करना चाहिए था,हमसे या अन्य संतों से बात करनी चाहिए थी न कि अखिलेश यादव से।संतों का इस तरह राजनीति करना ठीक नहीं।’

बाल बटुकों को मारने, शिखा खींचने पर वाले पर हो कार्रवाई-

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने द फ़ेडरल देश से ख़ास बातचीत में कहा कि माघ मेले में शाही स्नान जैसी कोई बात नहीं होती, महाकुंभ और कुंभ में होती है।ऐसे में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को हठ छोड़कर गंगा स्नान करना चाहिए था।रवींद्र पुरी यह भी कहते हैं कि पहले भी अविमुक्तेश्वरानंद मोदी और योगी का विरोध करते रहे हैं।राम मंदिर को लेकर भी उन्होंने बयान दिया था।रवींद्र पुरी कहते हैं कि ‘अविमुक्तेश्वरानंद के इस रवैये का हम विरोध करते हैं लेकिन बाल बटुकों को मारना यह उनकी शिखा पकड़ कर खींचना ग़लत है।रवींद्र पुरी का कहना है कि अखाड़ा परिषद ने कमिश्नर से बात की है कि जिन बाल बटुकों और संतों को मारा पीटा गया उसकी जाँच होनी चाहिए और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

अभिमुक्तेश्वरानंद को फिर प्रशासन ने दिया नोटिस-

इस बीच प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस दे देकर यह कहा है कि भारी भीड़ में वो आरक्षित पुल संख्या 2 में बैरियर को तोड़ते हुए बग्गी से जाने की जिद कर रहे थे और उनके समर्थकों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी थी।ऐसे में भगदड़ और जनहानि हो सकती थी।नोटिस में कहा गया है कि ऐसे में क्यों न आपकी संस्था को दी जा रही भूमि और सुविधाओं को निरस्त कर आपको सदैव के लिए मेले में प्रवेश पर प्रतिबंधित कर दिया जाए।इधर कई धर्माचार्य और संत अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में आ गए हैं और कहा है कि बटुकों की शिखा खींचना और स्नान से शंकराचार्य को रोकना भयंकर भूल ही नहीं युद्ध को आमंत्रण देना है।स्वामी आनंद स्वरूप का कहना है कि ‘अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य हैं या नहीं अभी यह तय करने का वक्त नहीं है।अभी सनातन की परंपरा का जो अपमान हुआ उसका विरोध होना चाहिए।इसके लिए सभी संतों को बातचीत कर कोशिश करनी चाहिए।’

योगी ने कहा कुछ कालनेमि सनातन को बदनाम करने की साज़िश कर रहे-

इधर माघ मेले विवाद के बीच योगी आदित्यनाथ ने पहली बार बयान दिया है।उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा है कि किसी संत के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं।उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नहीं, धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी है।अगर कोई राष्ट्र के स्वाभिमान को चुनौती देता है तो हमें खुलकर उसके सामने खड़े हो जाना चाहिए।उसकी चुनौती का मुकाबला करना चाहिए।ऐसे तमाम कालनेमि होंगे जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को बदनाम करने को की साज़िश रच रहे होंगे।हमें इनसे सावधान रहना होगा।

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