जम्मू-कश्मीर में कुदरत का कहर, रामबन में भारी बारिश से तबाही
x

जम्मू-कश्मीर में कुदरत का कहर, रामबन में भारी बारिश से तबाही

जम्मू-कश्मीर के रामबन में बादल फटने से फ्लैश फ्लड ने तबाही मचा दी है। तीन की मौत, चार लापता, दर्जनों घर बर्बाद हुए हैं। अगस्त में आपदाओं से 36 से ज्यादा मौतें हुई हैं।


Ramban Cloud Burst News: जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के राजगढ़ क्षेत्र में बादल फटने और भारी बारिश से एक बार फिर फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति बन गई है। इस आपदा में अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

प्रशासन ने बताया कि कई मकान पूरी तरह बाढ़ में बह गए हैं और कई को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हालात को देखते हुए राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिए गए हैं। रेस्क्यू टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं ताकि लापता लोगों को ढूंढा जा सके। वहीं, प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी राहत शिविर भी बनाए गए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बचाव दल भेजे जाएंगे। भारी बारिश की वजह से नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

अगस्त 2025, तबाही का महीना

इस महीने जम्मू-कश्मीर के कई जिलों जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी और डोडा में लगातार फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ पिछले एक हफ्ते में ही 36 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से सिर्फ रियासी और डोडा जिलों में 9 मौतें दर्ज हुई हैं।

इससे पहले, 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के चिशोटी गांव में क्लाउडबर्स्ट हुआ था। यह इलाका माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर 9,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस घटना में कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल और लापता हुए थे। अचानक आए सैलाब ने श्रद्धालुओं के कैंप, घर और पुल बहा दिए। आश्चर्य की बात यह रही कि उस समय इलाके में सामान्य बारिश ही दर्ज की गई थी, लेकिन क्लाउडबर्स्ट के कारण सीमित क्षेत्र में अचानक पानी का सैलाब उतर आया।

क्लाउडबर्स्ट क्या है?

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, किसी छोटे क्षेत्र (20–30 वर्ग किमी) में एक घंटे में 10 सेंटीमीटर या उससे अधिक बारिश को क्लाउडबर्स्ट कहा जाता है। यह प्रायः पहाड़ी इलाकों में होता है। जब नमी से भरी हवाएं पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं, तो ठंडी होकर घने बादल बना लेती हैं। बादलों में पानी का भार जब असहनीय हो जाता है, तो अचानक भारी बारिश के रूप में सारा पानी गिर पड़ता है।

इससे मिनटों में फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और मडफ्लो जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के चलते इस तरह की घटनाओं की संख्या और तीव्रता दोनों तेजी से बढ़ रही हैं।

Read More
Next Story