बंगाल में हटाए गए 54 लाख वोटर,1 करोड़ नाम और हटेंगे: ममता का चुनाव आयोग और बीजेपी पर बड़ा आरोप
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मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग (ईसी) व्हाट्सऐप पर चल रहा है और हर दिन कई बार एसआईआर (SIR) के नियम बदल रहा है।

'बंगाल में हटाए गए 54 लाख वोटर,1 करोड़ नाम और हटेंगे': ममता का चुनाव आयोग और बीजेपी पर बड़ा आरोप

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 54 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए और इसके लिए उन्होंने चुनाव आयोग और भाजपा पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया।


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अब ये तय लग रहा है कि इस साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) का मामला बड़ा मुद्दा होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी से सीधे टक्कर ले रही हैं। उन्होंने मंगलवार (13 जनवरी) को आरोप लगाया कि राज्य में एसआईआर अभ्यास के दौरान निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) की शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए ड्राफ्ट मतदाता सूची से एकतरफा रूप से 54 लाख नाम हटा दिए गए।

एक करोड़ और नाम हटाने की योजना

यह दावा करते हुए कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ मूल एसआईआर सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थी और इसे नाम हटाने को बढ़ाने के लिए बाद में जोड़ा गया, ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग का गठजोड़ अंतिम मतदाता सूची से एक करोड़ और नाम हटाने की योजना बना रहा है।

टीएमसी प्रमुख ने कहा, “चुनाव आयोग ने बीएलए-2 को सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को इस काम के लिए जुटा नहीं सकी।”

मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया कि चुनाव आयोग व्हाट्सऐप पर चल रहा है और हर दिन कई बार एसआईआर के नियम बदल रहा है। उन्होंने कहा कि एसआईआर नियमों के अनुसार माइक्रो-ऑब्ज़र्वर की अनुमति नहीं थी, फिर भी उन्हें पश्चिम बंगाल में तैनात किया गया। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया, “भाजपा कार्यकर्ता नाम कटवाने के लिए बड़ी मात्रा में गणना फॉर्म ले जाते हुए रंगे हाथ पकड़े गए।”

भाजपा का ERO और AERO पर दबाव

इसी बीच, टीएमसी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता और पार्टी के बूथ-स्तरीय एजेंट अधिकारियों पर दबाव बनाकर मतदाताओं के बड़े पैमाने पर नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 की थोक जमा करवा रहे हैं।

टीएमसी ने एक्स (X) पर एक पोस्ट में कहा, “हमें बेहद चिंताजनक रिपोर्टें मिली हैं कि भाजपा नेता, पार्टी सदस्य और उनसे जुड़े बूथ लेवल एजेंट एसडीओ और डीएम कार्यालयों में धावा बोल रहे हैं और ईआरओ व एईआरओ पर अनुचित दबाव डाल रहे हैं, ताकि मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाने के लिए फॉर्म-7 की थोक जमा करवाई जा सके।”

पोस्ट में आगे कहा गया, “बताया जा रहा है कि बिहार और झारखंड जैसे राज्यों से लोगों को लाया जा रहा है और हजारों फॉर्म से भरे वाहनों को एक साथ जमा करने के लिए लाया जा रहा है।”

बंगाल में SIR के कारण अब तक 84 मौतें

राज्य सचिवालय में पत्रकारों से बात करते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ने आगे दावा किया कि मंगलवार तक कुल 84 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से चार ने आत्महत्या की, जबकि 17 लोगों की मौत एसआईआर नोटिस मिलने के बाद ब्रेन स्ट्रोक या हार्ट स्ट्रोक से हुई।

मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर भाजपा का मोहरा बनकर काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के निर्देश पर एआई के जरिए नाम हटाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “दिल्ली में बैठा चुनाव आयोग भाजपा द्वारा बनाए गए एआई टूल्स का इस्तेमाल कर नाम हटा रहा है। एसआईआर डेटा में नामों की असंगति को आधार बनाकर एआई सॉफ्टवेयर के जरिए नाम काटे गए। शादी के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं के नाम भी हटा दिए गए।”

ममता बनर्जी ने कहा, “आज सुबह तक 84 लोगों की मौत हो चुकी है; 4 ने आत्महत्या की, और 17 की मौत एसआईआर नोटिस मिलने के बाद ब्रेन स्ट्रोक या हार्ट स्ट्रोक से हुई। इन सभी मौतों की जिम्मेदारी चुनाव आयोग को लेनी चाहिए। भाजपा को भी इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए; यहां तक कि दुर्योधन और दुशासन को भी इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए… भाजपा के निर्देश पर एआई के जरिए नाम हटाए जा रहे हैं। हमारी जानकारी के अनुसार, झारखंड, बिहार और ओडिशा से लोग यहां आकर बंगाल में वोट डाल रहे हैं।”

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