
इस्तीफे के ऐलान से हिली कांग्रेस, तमिलनाडु में टिकट बंटवारे पर मचा घमासान
तमिलनाडु में कांग्रेस उम्मीदवार सूची को लेकर विवाद गहरा गया है। सेल्वापेरुन्थगई के इस्तीफे के ऐलान और जोथिमणि के विरोध से पार्टी में संकट भी बढ़ चुका है।
तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी के भीतर पिछले कुछ समय से चल रहा आंतरिक तनाव अब खुलकर सामने आ गया है। 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए 27 उम्मीदवारों की घोषणा के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के सेल्वापेरुन्थगई ने चुनाव परिणाम आने के बाद अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है।
चुनाव परिणाम के बाद इस्तीफे का ऐलान
शुक्रवार (3 अप्रैल) देर रात जारी एक कड़े बयान में सेल्वापेरुन्थगई ने कहा कि वे 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे पहले ही पार्टी नेता राहुल गांधी को सूचित कर चुके हैं।सेल्वापेरुन्थगई उन 12 मौजूदा विधायकों में शामिल हैं जिन्हें इस बार भी पार्टी ने टिकट दिया है। उन्होंने कहा कि अब वे श्रीपेरंबुदूर क्षेत्र के लोगों की सेवा के लिए सीधे काम करने के लिए तैयार हैं और आम जनता के बीच एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह काम करेंगे।
अंदरूनी खींचतान बनी वजह
फरवरी 2024 में प्रदेश अध्यक्ष बने सेल्वापेरुन्थगई का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पार्टी के अंदर गुटबाजी, राज्य इकाई की अनदेखी और नई दिल्ली में सीटों को लेकर मोलभाव जैसी खबरें सामने आ रही थीं।पार्टी सूत्रों के अनुसार, उन्होंने अपने समर्थकों को टिकट दिलाने की कोशिश की थी, लेकिन उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया—जिसमें शॉर्टलिस्टिंग, दिल्ली में स्क्रीनिंग और अंतिम समय में बदलाव शामिल थे—से कई वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई।
सांसद एस. जोथिमणि का विरोध
इसी बीच पार्टी की वरिष्ठ सांसद एस जोथिमणि ने भी उम्मीदवारों की सूची और चयन प्रक्रिया की कड़ी आलोचना की है। करूर से सांसद जोथिमणि ने जहां मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट दिए जाने का स्वागत किया, वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर नए लोगों को प्राथमिकता दी गई है।उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास जनसमर्थन, अनुभव और जीतने की क्षमता है, उन्हें टिकट नहीं दिया गया, जबकि हाल ही में पार्टी में शामिल हुए लोगों को मौका मिल गया।
समुदायों की अनदेखी का आरोप
जोथिमणि ने खास तौर पर कोंगु क्षेत्र के प्रमुख समुदायों की अनदेखी पर सवाल उठाया। उनके अनुसार, कोंगु वेल्लालर गाउंडर समुदाय और अरुंधतियार (अनुसूचित जाति का उपसमूह) को उम्मीदवार सूची में स्थान नहीं दिया गया, जो राज्य की चुनावी राजनीति में अभूतपूर्व है।उन्होंने इसे कांग्रेस की सामाजिक न्याय की विचारधारा और राहुल गांधी की उस नीति के खिलाफ बताया, जिसमें समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की बात कही जाती है।
जीकेएम तमिल कुमारन की उम्मीदवारी पर विवाद
उम्मीदवारों की सूची में एक नाम जिसने पार्टी के अंदर नाराजगी बढ़ा दी है, वह है जीकेएम तमिल कुमारन। वे जी के मणि के बेटे हैं और हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं। उन्हें पेन्नागरम सीट से टिकट दिया गया है, जो पहले उनके पिता के पास थी।जोथिमणि ने पहले ही सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया था और तमिल कुमारन की उम्मीदवारी ने इस असंतोष को और बढ़ा दिया।
चुनावी गठबंधन और स्थिति
इस चुनाव में कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है और 234 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। मदुरै जिले की मेलूर सीट के लिए उम्मीदवार की घोषणा अभी बाकी है।
पार्टी के लिए बढ़ती मुश्किलें
सेल्वापेरुन्थगई और जोथिमणि के बयान ही नहीं, बल्कि इससे पहले सांसद मणिक्कम टैगोर जैसे नेताओं का अहम चुनावी जिम्मेदारियों से इस्तीफा देना भी पार्टी के लिए परेशानी का कारण बना है।मतदान में अब सिर्फ तीन हफ्ते का समय बचा है और ऐसे में पार्टी के अंदर खुला विरोध विपक्षी दलों के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर “गंभीर आंतरिक मतभेद” का आरोप लगाते हुए तंज कसा है।
अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस 2021 के चुनाव में जीती 18 सीटों के अपने प्रदर्शन को इस बार बेहतर कर पाएगी, जबकि पार्टी के अंदर हालात अस्थिर बने हुए हैं। इसका जवाब 4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद ही मिलेगा।

