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Indore: ई-रिक्शा चालक की मौत, परिवार का आरोप— दूषित पानी ने ली जान, प्रशासन ने बताया ‘कैंसर’

Indore contaminated water: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में 50 साल के ई-रिक्शा चालक हेमंत गायकवाड़ की मौत हो गई। यह इलाका पिछले कुछ समय से दूषित पीने के पानी की समस्या से जूझ रहा है।


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Indore water contamination: इंदौर के एक छोटे से इलाके में पानी सिर्फ प्यास नहीं बुझा रहा था, वह जिंदगी भी छीन रहा था। ई-रिक्शा चलाकर परिवार पालने वाले हेमंत गायकवाड़ को क्या पता था कि रोज का वही पीने का पानी उनकी मौत की वजह बन जाएगा। प्रशासन इसे बीमारी बता रहा है, लेकिन सवाल अब भी जिंदा है कि क्या यह एक मौत थी या सिस्टम की लापरवाही से हुई हत्या?

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में 50 साल के ई-रिक्शा चालक हेमंत गायकवाड़ की मौत हो गई। यह इलाका पिछले कुछ समय से दूषित पीने के पानी की समस्या से जूझ रहा है, जहां उल्टी-दस्त की बीमारी फैलने से कई लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि हेमंत की मौत का कारण कैंसर था, लेकिन परिवार इस दावे से सहमत नहीं है।

परिवार का आरोप

हेमंत के छोटे भाई संजय गायकवाड़ ने बताया कि उनके भाई पूरी तरह ठीक थे, लेकिन दूषित पानी पीने से बीमार पड़ गए। संजय के मुताबिक, बीमारी के सिर्फ 15 दिन के अंदर मेरे भाई की मौत हो गई। वह परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य थे। सरकार को हमारी मदद करनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

कैंसर से हुई मौत

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि डॉक्टरों के अनुसार हेमंत की मौत कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट से हुई। उन्होंने कहा कि हेमंत कैंसर के मरीज थे और उनका इलाज चल रहा था। कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट वह स्थिति होती है, जिसमें अचानक दिल की धड़कन और सांस दोनों बंद हो जाती हैं।

अंतिम संस्कार का दर्दनाक मंजर

हेमंत की अंतिम यात्रा बुधवार सुबह उनके भागीरथपुरा स्थित घर से निकली। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक था। उनकी पत्नी, मां और चार बेटियां सदमे में थीं। सबसे छोटी बेटी मनाली ने रिश्तेदार की मदद से चिता को आग दी। बड़ी बेटी रिया ने बताया कि दूषित पानी पीने से उनके पिता को दस्त हो गए थे, जिसके बाद उन्हें पहले एक निजी अस्पताल और फिर दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

लंबे समय से दूषित पानी की शिकायतें

स्थानीय लोगों का कहना है कि भागीरथपुरा में दिसंबर के आखिर से लोग उल्टी-दस्त की शिकायत कर रहे थे। कई बार नगर निगम से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जांच में सामने आया है कि इलाके के 51 ट्यूबवेल का पानी दूषित था। लैब रिपोर्ट में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। अधिकारियों के अनुसार, पानी की पाइपलाइन में लीकेज के कारण टॉयलेट का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया था।

मौतों का आंकड़ा बढ़ा, जांच जारी

15 जनवरी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सरकार ने बताया कि उल्टी-दस्त फैलने से अब तक 7 मौतें हुई हैं। वहीं, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की डेथ ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, इस बीमारी से जुड़ी मौतों की संख्या कम से कम 15 हो सकती है। स्थानीय लोगों का दावा है कि अब तक 25 लोगों की जान जा चुकी है, हालांकि नगर निगम ने इस आंकड़े की पुष्टि नहीं की है।

मुआवजा और आगे की कार्रवाई

प्रशासन ने उल्टी-दस्त से जान गंवाने वाले 21 लोगों के परिवारों को 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। कुछ मामलों में मौत अन्य बीमारियों से हुई थी, लेकिन मानवीय आधार पर सहायता दी गई। फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

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