
Ground Report: आखिर क्यों की गई थी मेरठ के कपसाड़ की नाकेबंदी?
मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और बेटी के अगवा होने से योगी सरकार की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
Meerut Kapsad Case: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार दावा करती है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज है। अब मेरठ के कपसाड़ गांव में जिस तरह से दलित समाज की महिला की हत्या हुई, बेटी को अगवा करने वाला आरोपी तीन दिन तक फरार रहा, ऐसे में आप खुद से सवाल कर सकते हैं कि यूपी में जंगलराज है या रामराज। कपसाड़ के आरोपियों के खिलाफ योगी जी की पुलिस तो कुछ कर नहीं पा रही। लेकिन आरोप विपक्ष पर लगा रही है। कुछ इस तरह से सरधना विधानसभा के समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान बरस पड़े। यहां आपको बता दें कि कपसाड़ गांव, सरधना विधानसभा का हिस्सा है, जहां दलित समाज की सुनीता अब इस दुनिया में नहीं हैं।
सरधना विधानसभा के कपसाड़ की तस्वीर कैसी है, इलाके के लोगों का क्या कहना है उसे समझने के लिए द फेडरल देश की टीम मौके पर पहुंची थी। हमारा मकसद उस गांव तक पहुंचना था। लेकिन सुरक्षा के ऐसे बंदोबस्त की परिंदा पर ना मार सके। कपसाड़ तक जाने वाले जितने भी रास्ते हैं उस पर पुलिस और आरएएफ का पहरा। हमारी टीम दिल्ली से जब चली तो गंग नहर के किनारे पहले अटेरना पहुंची और वहां से कपसाड़ जाना था। लेकिन पुलिस ने मना कर दिया कि किसी को इजाजत नहीं है। यहां बता दें कि अटेरना और कपसाड़ के बीच की दूरी करीब तीन किमी है। अटेरना में जिस समय हमारी टीम पहुंची वहां एसपी ग्रामीण अभिजीत कुमार मौजूद थे। एसपी साहब से जानने की कोशिश हुई कि कपसाड़ मामले में आरोपी की गिरफ्तारी और अगवा लड़की के बारे में क्या जानकारी है। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कैमरे पर कुछ भी नहीं कहा। हालांकि अनौपचारिक तौर पर कहा कि मामला संवेदनशील है इस पर बयान डीएम और एसएसपी साहब ही दे सकते हैं वो कुछ नहीं बोलेंगे। यानी कि उन्होंने अपने मुंह को बंद रखा था। मौके पर पुलिस के दूसरे अधिकारियों ने कहा कि जब बड़े साहब कुछ नहीं बोल रहे तो हम लोग क्या बोलें।
एक तरफ गंग नहर पर बने अटेरना पुल पर पुलिस का बंदोबस्त तो दूसरी तरफ अलग अलग राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की नारेबाजी। एक तरफ चंद्रशेखर रावण के समर्थक, भीम सेना तो दूसरी तरफ किसान मोर्टा के कार्यकर्ता बार बार एक ही बात कर रहे थे कि योगी कि पुलिस जिस मुस्तैदी के साथ यहां तैनात है अगर उतनी ही सतर्क रही होती तो दलित समाज की महिला की हत्या नहीं होती। उसकी बेटी अगवा नहीं होती। रसूखदार जाति से नाता रखने वाला आरोपी सलाखों के पीछे होता। अब जब वो दलित समाज से आने वाले परिवार के साथ दुख दर्द साझा करना चाहते हैं तो पुलिस जाने नहीं दे रही है। इन सबके बीच राष्ट्रीय किसान मोर्चा के महामंत्री विपिन मलिक ने कहा कि आप मामले की गंभीरता को ऐसे समझ सकते हैं कि मेरठ जिले और मंडल के अधिकारी एक नहीं कई दफा कपसाड़ का दौरा कर रहे हैं।
अटेरना पुल से आगे बढ़ने की इजाजत जब हमें नहीं मिली तो द फेडरल देश की टीम ने मदारपुर,कुंजलवन के रास्ते कपसाड़ जाने की कोशिश की। लेकिन कामयाबी नहीं मिली। कुंजलवन गांव के लोगों ने कहा कि उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती को नहीं देखा। इन गांवों के लोगों ने कहा कि हालात इस समय ऐसे हैं कि पुलिस अनावश्यक उन्हें भी आने जाने से रोक रही है। इलाके में कपसाड़ कांड को लेकर तरह तरह की बातें हैं। लेकिन लोगों में खासतौर से दलित समाज में इस बात को लेकर गुस्सा नजर आया कि आखिर आरोपी के घर पर बुलडोजर कब चलेगा। क्या बुलडोजर सिर्फ दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के घरों पर चलेगा।
कुंजलवन से निकलने के बाद हमारी मुलाकात मदारपुर गांव में सरधना के समाजवादी पार्टी विधायक अतुल प्रधान से हुई। उन्होंने पूर्व विधायक (संगीत सोम का नाम सीधे नहीं लिया) के बारे में कहा कि कपसाड़ कांड के बाद उनका व्यवहार समझ के परे है। योगी आदित्यनाथ की सरकार से बीजेपी के नेताओं से अगर आप सवाल करिए तो वो समाजवादी पार्टी की बात करने लगते हैं। आखिरकार समाजवादी पार्टी को कब तक कोसते रहेंगे। हकीकत तो यह है कि कपसाड़ की घटना को रोका जा सकता था। निश्चित तौर पर यही शासन-प्रशासन दोनों की लापरवाही है।
बता दें कि कपसाड़ में मृतक महिला सुनीता और उसकी बेटी गन्ने के खेत पर जा रहे थे जहां उसका पति गन्ना छीलने का काम कर रहा था। गांव से बाहर निकलते ही दो से तीन लड़के एक खेत के करीब टकराते हैं और वो सुनीता की बेटी का हाथ खींचते हैं और अगवा करने की कोशिश करते हैं। सुनीता जब उन लड़कों को बदतमीजी और अगवा करने से रोकती है तो आरोपी फरसे से हमला कर देते हैं और लड़की को लेकर भाग जाते हैं। मौके से गुजर रहीं कुछ लड़कियां खेत में पड़ी महिला के बारे में गांव वालों को जानकारी देते हैं। गांव वाले सुनीता को अस्पताल में भर्ती कराते हैं। लेकिन दो दिन के बाद उसकी मौत हो जाती है और उसके बाद से इस मामले पर सियासत भी जोरशोर से शुरू हो जाती है।

