
यूपी में कानून व्यवस्था की असलियत, दलित महिला की हत्या और युवती के अपहरण से सुलगा मेरठ का कपसाड़
मेरठ के सरधना के कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की हत्या के बाद उनकी बेटी रूबी के अपहरण ने सूबे की सियासत में नया उबाल ला दिया है।
यूपी में, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बीजेपी नेता और कार्यकर्ता और उनके प्रशंसक एक सख्त प्रशासक के रूप में प्रचारित करते रहे हैं, उनके समर्थक दावा करते हैं कि योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रदेश की कानून व्यवस्था पटरी पर ला दी, वहीं मेरठ के कपसाड गांव की वारदात उन दावों की कलई खोलती है। साथ ही, पिछले चौदह साल में 'बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ' के जिस नारे का ढोल सबसे ज्यादा पीटा गया, उस पर भी सवाल खड़े होते हैं।
वह भी किसी की बेटी ही थी, जिसे सरेआम गुंडे उठाकर ले गए। उसकी मां पर धारदार हथियार से हमला करके मार डाला और तीन दिन बाद भी उस अपहृत युवती का पता नहीं चल पाया है। घटना मेरठ जिले के कपसाड़ गांव की है।
गांव की किलेबंदी
किसी गांव में अगर 20 इंस्पेक्टर, 150 दरोगा समेत 50 हज़ार से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात करना पड़े, तो अंदाजा लगा सकते हैं कि कोई बड़ी वारदात हुई है। मेरठ में कपसाड़ नाम का गांव इस समय छावनी में तब्दील हो गया है। लोगों का आना-जाना दूभर हो गया है।
पुलिस की इस सख्ती की वजह है कि कपसाड़ गांव में एक अनुसूचित जाति परिवार की बेटी का अपहरण और बेटी को अपहरणकर्ताओं से बचाने की जद्दोजहद में मां की हत्या की वारदात। माहौल इस कदर तनावभरा है कि पुलिस को फ्लैग मार्च निकालने की ज़रूरत पड़ गई।
वारदात कैसे हुई?
यह बृहस्पतिवार यानी 8 जनवरी की घटना है। अनुसूचित जाति परिवार की सुनीता अपनी बेटी रुबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं। आरोप है कि कपसाड़ गांव के ही पारस सोम, सुनील और उनके साथियों ने सुनीता पर फरसे से वार कर दिया और उनकी बेटी रूबी का अपहरण कर फरार हो गए थे। रुबी की इसी साल अप्रैल महीने में शादी होने वाली है।
इस हमले में घायल हुए रुबी की मांग सुनीता की उपचार के दौरान मोदीपुरम के अस्पताल में मौत हो गई। इसके बाद पूरा इलाका गुस्से से सुलग उठा। यही नहीं, अपहृत युवती का अभी भी कोई सुराग नहीं लग सका है और न ही नामजद आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार ही कर सकी है।
शुक्रवार को दिनभर युवती की मां सुनीता का शव लेकर परिवार घर में ही बैठा रहा। परिजनों ने दो टूक कह दिया था कि जब तक बेटी मिल नहीं जाएगी वे सुनीता का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
हालांकि बाद में परिवार को सरकार की तरफ से 10 लाख रुपये का चेक दिया गया। परिवार के एक सदस्य को शस्त्र लाइसेंस दिलाने का भरोसा दिया गया है। इसके अलावा सुरक्षा के लिए गांव में पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। इस आश्वसन के बाद रात करीब पौने 8 बजे सुनीता का अंतिम संस्कार हो सका। बेटे नरसी ने मुखाग्नि दी।
इससे पहले सपा, बसपा, भीम आर्मी, असपा नेता-कार्यकर्ता और स्थानीय लोग हंगामा करते रहे। पुलिस ने गांव और आसपास का इलाका भी छावनी में तब्दील कर दिया।वहीं सपा विधायक अतुल प्रधान को भी गांव के बाहर रोकने को लेकर हंगामा हुआ। पीड़ित परिवार ने विधायक को गांव के अंदर प्रवेश कराया।
सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
सरधना के कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की हत्या के बाद उनकी बेटी रूबी के अपहरण ने सूबे की सियासत को गरम कर दिया है। शुक्रवार को एक तरफ अपहृत बेटी के लिए बिलखता परिवार था तो दूसरी तरफ गांव में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी लगी रही।
सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के जमावड़े को देखते हुए सुबह से ही गांव के चारों ओर पुलिस की तैनाती से गांव छावनी में तब्दील हो गया था। गांव की सीमा से ढाई किमी पहले ही बैरिकेडिंग कर दी गई थी। एसएसपी, एसपी देहात, एसपी ट्रैफिक, चार सीओ, 20 इंस्पेक्टर, 150 दरोगा समेत 500 से अधिक पुलिसकर्मी गांव में तैनात रहे। आरआरएफ की टीम भी मुस्तैद दिखाई दी।
सपा विधायक अतुल प्रधान को रोका गया
सुबह 7:30 बजे से ही कपसाड़ गांव के बॉर्डर पर तनाव चरम पर पहुंच गया। पुलिस ने गांव की घेराबंदी कर दी थी। परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक सुनीता का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया था। सपा विधायक अतुल प्रधान, भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष चरण सिंह और अन्य कार्यकर्ताओं के अलावा कांग्रेस नेता गांव जाने के लिए निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें सीमा पर ही रोक लिया।
करीब 19 घंटे की जद्दोजहद के बाद पूर्व विधायक संगीत सोम, एसपी देहात अभिजीत कुमार, एडीएम सिटी की मौजूदगी में पुलिस ने लिखित वादा किया कि 48 घंटे के भीतर रुबी को तलाश कर लिया जाएगा। परिवार के एक सदस्य को स्थानीय चीनी मिल में स्थायी रोजगार दिया जाएगा।
इस पर विधायक समेत सभी लोग गांव के बाहर ही सड़क पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान काफी गहमागहमी की स्थिति रही। एक बार तो लगा कि पुलिस लाठीचार्ज न कर दे हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। सपा विधायक ने कहा कि अनुसूचित जाति की महिला की हत्या और बेटी का अपहरण हुआ है। यदि दूसरे समुदाय का यह मामला होता तो अब तक बुलडोजर की कार्रवाई हो चुकी होती।
पीड़ित परिवार विधायक के साथ धरने पर बैठा
करीब डेढ़ घंटे तक चली नारेबाजी और नोकझोंक के बाद मृतका सुनीता के पति सतेंद्र और बेटे भी वहां पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। माहौल इतना बिगड़ा कि पुलिस को रास्ता देना पड़ा। इसके बाद सभी लोग मृतक सुनीता के घर पहुंचे।
धरने के दौरान सबसे भावुक कर देने वाला पल तब आया जब सुनीता का बड़ा बेटा नरसी रोते हुए विधायक अतुल प्रधान से लिपट गया। उसने सिसकते हुए पूछा- विधायक जी, बस इतना बता दो मेरी बहन अब वापस आएगी या नहीं। इस सवाल ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।
परिवार की मांग है कि बेटी रूबी को अपहर्ताओं के चंगुल से मुक्त कराकर सुरक्षित वापस लाया जाए। मुख्य आरोपी पारस सोम और उसके साथियों की तत्काल गिरफ्तारी हो। आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलाया जाए। परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
पुलिस ने निकाला फ्लैग मार्च
गांव के बिगड़ते हालात को देखते हुए डीआईजी कलानिधि नैथानी, जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार और एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने खुद मोर्चा संभाला। भारी पुलिस बल के साथ गांव की गलियों में फ्लैग मार्च निकाला गया। जिलाधिकारी और एसएसपी दोपहर 12 बजे के आसपास गांव में पहुंच गए थे। दोनों अधिकारी दो घंटे तक गांव में मौजूद रहे और पीड़ित परिवार से बात की। वहीं प्रशासन के अधिकारियों ने पांच बार परिजनों के साथ बंद कमरे में वार्ता की।

