
इंदौर में दूषित पानी से मौतें: हर स्तर पर लापरवाही, साल 2022 की चेतावनी भी की गई नजरअंदाज
Indore Water Deaths: स्टडी की मुख्य चेतावनी थी कि सीवेज और पीने के पानी की पाइपलाइनों का मौजूदा ढांचा संरचनात्मक रूप से दूषित होने की आशंका बढ़ाता है।
Indore Water Contamination: जिस शहर को देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है, वही अब गंदे पानी और लापरवाही का चेहरा बन गया है। पुरानी चेतावनियां नजरअंदाज की गईं, ऐसे में प्रशासन की नींद और सिस्टम की खामियों ने 10 से अधिक जिंदगियों को निगल लिया। इंदौर का यह हादसा महज पानी का संकट नहीं है, यह एक चेतावनी है कि जब सिस्टम थक जाए और जवाबदेही गायब हो तो जनता को जान की कीमत चुकानी पड़ती है।
इंदौर में दूषित पानी से मौतों के मामले में शुरुआती जांच में यह पता चला है कि यह घटना पूरी तरह लापरवाही का नतीजा है। रिपोर्ट और रिसर्च बताते हैं कि यह लापरवाही हर स्तर पर हुई। दरअसल, साल 2022 में इस खतरे को लेकर पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। यही अनदेखी अब लोगों की जान लेने का कारण बन गई।
साल 2022 में बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी ने एक स्टडी की थी। इसमें पाया गया कि भोपाल और आसपास के पुराने इलाकों में सीवेज (गंदे पानी) और पीने के पानी की पाइपलाइनें अक्सर एक ही जगह से गुजरती हैं। इसका मतलब यह है कि अगर पाइपलाइन टूट जाए या जोड़ खराब हो जाए तो सीवेज का गंदा पानी सीधे पीने के पानी में मिल सकता है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी थी कि इससे गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।
रिसर्च का दायरा
इस रिसर्च में भोपाल के 19 नगर निगम क्षेत्रों में से 14 (अब 21) क्षेत्र और 400 घरों का सर्वे किया गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि शहर के पुराने हिस्सों और झुग्गी बस्तियों वाले बाहरी इलाके सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। इन इलाकों में पाइपलाइनें अक्सर टूट जाती हैं और उनकी मरम्मत सही से नहीं होती। पानी की सप्लाई अनियमित रहती है, इसलिए लोग सार्वजनिक हैंडपंप और टैंकरों पर निर्भर रहते हैं। सीवेज और पीने के पानी की लाइनें बहुत पास या एक ही खाई में होती हैं, जिससे रिसाव होने पर गंदा पानी पीने की मुख्य लाइनों में आसानी से मिल जाता है।
पॉश और नए इलाकों में स्थिति बेहतर
हालांकि, शहर के नए और पॉश इलाके बेहतर योजना और इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण सुरक्षित हैं। यहां पानी की सप्लाई ज्यादा भरोसेमंद है और पाइपलाइनें अलग रखी गई हैं। इससे साफ पता चलता है कि खतरे का असर पूरे शहर में समान नहीं है। गरीब और घनी आबादी वाले इलाके ज्यादा जोखिम में हैं।
चेतावनी
स्टडी की मुख्य चेतावनी थी कि सीवेज और पीने के पानी की पाइपलाइनों का मौजूदा ढांचा संरचनात्मक रूप से दूषित होने की आशंका बढ़ाता है। अगर इसे समय रहते सुधार नहीं किया गया तो ऐसे हादसे और बढ़ सकते हैं। इंदौर जल संकट इस बात की गवाही है कि पुरस्कार तभी मायने रखते हैं, जब लोगों को साफ पानी मिले।

