आतिशी मुद्दे पर पंजाब और दिल्ली के बीच टकराव, पंजाब पुलिस ने नोटिस के जवाब के लिए मांगे 10 दिन
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दिल्ली विधानसभा में पंजाब पुलिस स 48 घंटे में नोटिस का जवाब मांगा था, लेकिन पंजाब पुलिस ने कहा हमें और समय दें

आतिशी मुद्दे पर पंजाब और दिल्ली के बीच टकराव, पंजाब पुलिस ने नोटिस के जवाब के लिए मांगे 10 दिन

पंजाब पुलिस के टॉप लेवल के अधिकारियों को भेजे गए नोटिस में दिल्ली विधानसभा के एक वीडियो क्लिप के कथित इस्तेमाल और उसी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज किए जाने पर जवाब मांगा गया था।


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आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी से जुड़े कथित ‘संपादित’ वीडियो को लेकर चल रहे विवाद में अब दो राज्य सरकारों के बीच टकराव की स्थिति आ गई है। दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने का मामला तूल पकड़ने के बाद जब दिल्ली विधानसभा द्वारा पंजाब पुलिस के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया। उन्हें 48 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा गया था लेकिन पंजाब पुलिस इस डेडलाइन में जवाब देने को तैयार नहीं है। पंजाब पुलिस ने उस नोटिस का जवाब देने के लिए दस दिन का अतिरिक्त समय मांगा है।

दिल्ली विधानसभा ने विशेषाधिकारों के उल्लंघन के आरोप में पंजाब के पुलिस महानिदेशक, विशेष पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) और जालंधर के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किए थे। नोटिस में विधानसभा के एक वीडियो क्लिप के कथित इस्तेमाल और उसी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज किए जाने पर जवाब मांगा गया था।

विधानसभा स्पीकर की आपत्ति

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस कार्रवाई को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए कहा था कि संबंधित वीडियो क्लिप दिल्ली विधानसभा की संपत्ति है और इसके उपयोग से सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है। उन्होंने पंजाब पुलिस के अधिकारियों से 48 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स में विधानसभा सचिवालय के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि तीनों अधिकारियों ने अब अपने जवाब के लिए दस दिन का समय मांगा है। उनका कहना है कि मामले से जुड़े तथ्यों और कानूनी पहलुओं को देखते हुए जवाब तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय आवश्यक है।

जवाब के बाद होगी आगे की कार्रवाई

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि पंजाब पुलिस के अधिकारियों के जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। यह मामला अब केवल वीडियो के कथित संपादन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विधानसभा की गरिमा, राज्यों के अधिकार क्षेत्र और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया जैसे संवेदनशील मुद्दों से भी जुड़ गया है।

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