
दिल्ली में बेटियों के लिए नई सौगात, रेखा गुप्ता सरकार लाई ‘लखपति बिटिया योजना’
दिल्ली की भाजपा सरकार ने लखपति बिटिया योजना का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुआई में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई। इसके साथ ही 2008 में लॉन्च की गई लाडली योजना को बंद कर दिया गया है।
दिल्ली की भाजपा सरकार ने बेटियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना’ का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही वर्ष 2008 से चल रही ‘लाडली योजना’ को बंद करने का फैसला भी किया गया है।
ग्रेजुएशन पर मिलेगा एक लाख रुपये
लखपति बिटिया योजना के तहत दिल्ली में जन्मी और दिल्ली की निवासी बेटियों को ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद न्यूनतम एक लाख रुपये की एकमुश्त राशि दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हर परिवार की दो बेटियों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
31 मार्च तक बंद होगी लाडली योजना
कैबिनेट की मंजूरी के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 31 मार्च तक लाडली योजना को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और उसकी जगह लखपति बिटिया योजना लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब 12वीं पास करने पर नहीं, बल्कि ग्रेजुएशन पूरा करने पर राशि की मेच्योरिटी मिलेगी, ताकि उच्च शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके।
पहले से ज्यादा बढ़ेगी निवेश राशि
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले लाडली योजना के तहत प्रति बच्ची 36 हजार रुपये का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर 56 हजार रुपये किया गया है। अब हर चरण में 20-20 हजार रुपये जोड़े जाएंगे और ग्रेजुएशन के बाद कुल राशि न्यूनतम एक लाख रुपये तक पहुंच जाएगी।
योजना की मुख्य शर्तें
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने योजना से जुड़ी शर्तों की जानकारी देते हुए कहा कि लाभार्थी बच्ची का टीकाकरण पूरा होना जरूरी होगा। बच्ची का मान्यता प्राप्त स्कूल में पढ़ना अनिवार्य है। यदि 18 वर्ष की उम्र से पहले विवाह होता है, तो योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
सरकार पर आएगा 160 करोड़ रुपये का खर्च
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना पर सरकार को करीब 160 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। हालांकि जरूरत पड़ने पर सरकार इसके लिए अतिरिक्त फंड भी उपलब्ध कराएगी।
लाडली योजना क्यों की गई बंद?
रेखा गुप्ता ने बताया कि लाडली योजना 2008 में शुरू की गई थी, लेकिन जांच में सामने आया कि इसके तहत करोड़ों रुपये बैंकों में अनक्लेम्ड पड़े हैं। करीब 1.86 लाख बेटियों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया था। सरकार ने एक साल में करीब 30 हजार बच्चियों को खोजकर 90 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इसके अलावा 41 हजार और बच्चियों की पहचान हुई है, जिन्हें लगभग 100 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी।

