
दिल्ली: 9 महीने में बजट खर्च नहीं कर पाई भाजपा सरकार, बढ़ी चुनौतियां
दिल्ली की रेखा सरकार के सामने बजट खर्च का बड़ा संकट। जल बोर्ड सहित कई विभाग सुस्त। मुख्य सचिव ने दी अफसरों को कार्रवाई की चेतावनी, साप्ताहिक होगी निगरानी।
Delhi Government's Budget : दिल्ली की सत्ता में 27 साल बाद लौटी भारतीय जनता पार्टी के लिए पहला साल चुनौतियों भरा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के समापन में अब बेहद कम समय बचा है। लेकिन सरकार अपने बजट का पूरा उपयोग करने में अब तक विफल रही है। नौ महीने बीत जाने के बाद भी विकास कार्यों की रफ्तार काफी धीमी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार अब विभागों की सुस्ती से नाराज है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट अल्टीमेटम दे दिया है। लक्ष्य पूरा न होने पर संबंधित विभाग प्रमुखों पर सख्त कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
खर्च के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता:
वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने विकास कार्यों के लिए 59,300 करोड़ रुपये का आवंटन किया था। दिसंबर 2025 तक कुल पूंजीगत बजट का महज 42.57 प्रतिशत ही खर्च हुआ। यानी नौ महीनों में आधा बजट भी जमीन पर नहीं उतर सका। अब आखिरी तिमाही में 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना बड़ी चुनौती है। विभागीय सुस्ती ने सरकार की विकास योजनाओं की राह में बाधा डाली है।
जल बोर्ड के कारण फंसी सरकार:
दिल्ली जल बोर्ड का प्रदर्शन भाजपा सरकार के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बना है। बोर्ड को करीब 9,000 करोड़ रुपये का विशाल बजट आवंटित हुआ था। इसके बावजूद 10 महीनों में विभाग 60 प्रतिशत खर्च भी नहीं कर पाया। हरियाणा से दिल्ली तक पाइपलाइन बिछाने का 200 करोड़ का काम रुका है। मुनक नहर की मरम्मत के लिए मिले 50 करोड़ भी नहीं खर्चे गए। पुरानी पाइपलाइन और सीवर बदलने का काम भी कछुआ गति से चल रहा है।
पीडब्ल्यूडी से उम्मीदें, पर राह कठिन:
लोक निर्माण विभाग (PWD) के पास भविष्य की कई बड़ी परियोजनाएं मौजूद हैं। बारापूला फेज-3 जैसे प्रोजेक्ट्स की लागत अब बढ़कर 1,635 करोड़ रुपये हो गई है। आगामी बजट में सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर और मिनी सचिवालय के लिए फंड प्रस्तावित है। लेकिन वर्तमान बजट का समय पर उपयोग न होना विभाग की क्षमता पर सवाल है। सरकार अब खर्च की क्षमता के आधार पर ही अगला फंड देगी।
साप्ताहिक निगरानी और दंडात्मक एक्शन: मुख्य सचिव राजीव वर्मा ने समीक्षा बैठक में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में बजट खर्च करने से पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। अब हर हफ्ते विभागों के काम की बारीकी से निगरानी की जाएगी। विशेष रूप से स्वास्थ्य और परिवहन विभाग को अपनी कार्यप्रणाली सुधारनी होगी। अगर समय पर लक्ष्य पूरे नहीं हुए, तो जवाबदेही तय की जाएगी।
जनता के पैसे पर जवाबदेही की मांग:
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि बजट वास्तविक होना चाहिए। जिन विभागों ने लापरवाही बरती है, उनके आवंटन में कटौती की जा सकती है। सरकार चाहती है कि विकास कार्य कागजों के बजाय धरातल पर नजर आएं। दिल्ली की जनता को आवंटित धन का सीधा लाभ मिलना जरूरी है। बजट खर्च करने की यह चुनौती भाजपा सरकार के रिपोर्ट कार्ड को प्रभावित कर सकती है।
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