
रेखा गुप्ता सरकार का एक साल: यमुना सफाई और चुनावी वादों का क्या है सच?
दिल्ली में भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार के एक साल पूरे होने पर जनता ने दिया अपना फीडबैक। जानिए यमुना सफाई, मुफ्त सिलेंडर और आर्थिक सहायता पर क्या है जमीनी हकीकत।
Delhi CM Rekha Gupta Government First anniversary : दिल्ली की सत्ता में रेखा गुप्ता की भाजपा सरकार अपने कार्यकाल का पहला साल 20 फरवरी को पूरा करने जा रही है। एक साल का समय किसी भी सरकार के लिए अपनी दिशा तय करने का होता है। सरकार जहां अपनी उपलब्धियों का 'रिपोर्ट कार्ड' तैयार कर रही है, वहीं 'द फ़ेडरल देश' की टीम ने राजधानी की गलियों और यमुना के घाटों पर जाकर हकीकत खंगाली। हमने यह जानने की कोशिश की कि चुनावी वादों का क्या हुआ? क्या यमुना वादे के मुताबिक साफ़ हुई? क्या महिलाओं को आर्थिक मदद मिली? हमने यमुना बाज़ार के मल्लाहों से लेकर राजेंद्र नगर के व्यापारियों तक से लंबी बातचीत की। इस विशेष ग्राउंड रिपोर्ट में आपको दिल्ली की जनता की उम्मीदों, उनकी शिकायतों और सरकार के दावों के बीच का पूरा सच जानने को मिलेगा।
यमुना बाज़ार: वादों की मशीनें हुईं गायब
यमुना की सेहत सुधारना रेखा गुप्ता सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। हमारी टीम सबसे पहले यमुना बाज़ार घाट पहुंची। यहाँ नाव चलाने वाले युवक अभिनन्दन ने बताया कि पिछले एक साल में कोई खास सुधार नहीं हुआ। अभिनन्दन का कहना है कि सरकार बनने के वक्त खरपतवार हटाने वाली दो-चार मशीनें ज़रूर आई थीं, लेकिन अब वे भी गायब हैं। वजीराबाद से आईटीओ की तरफ पानी आज भी काला और बदबूदार है। गंदे नालों का पानी सीधे यमुना में गिरना बंद नहीं हुआ है। छठ के समय जैसे सफाई की जा रही थी लग रहा था सब ठीक हो जायेगा लेकिन अब फिर वाही गंदगी है।
बुजुर्गों और महिलाओं का छलका दर्द
यमुना घाट पर दशकों से रह रही उषा देवी ने कड़वा सच बयां किया। उनका कहना है कि सरकारें बदलती हैं, पर यमुना का नसीब नहीं। मशीनों का काम कुछ ही महीनों में बंद हो गया। वहीं प्रेमवती के परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट है। प्रेमवती का कहना है कि न तो उन्हें मुफ्त गैस सिलेंडर मिला और न ही कोई आर्थिक मदद। उन्हें अब रेहड़ी-पटरी भी लगाने नहीं दी जा रही है। वह कहती हैं कि बाढ़ हर साल आती है, नेता भी आते हैं, लेकिन वादे कभी पूरे नहीं होते।
गंदगी और बीमारियों का डर
यमुना किनारे रहने वाले अमरिका यादव ने साफ़ कहा कि सरकार मुफ्त में कुछ नहीं देगी, यह उन्हें पता है। लेकिन सफाई का जो वादा था, वह कहीं नज़र नहीं आ रहा। वहीं किशन ने बताया कि बचपन से यहीं रहने के बावजूद उन्होंने हालात इतने बुरे नहीं देखे। बाढ़ के बाद जमा हुई गंदगी और गाद अब तक पूरी तरह नहीं हटी है। ठहरा हुआ पानी मच्छरों का घर बन गया है, जिससे बीमारियां फैल रही हैं। लोगों की शिकायतों पर प्रशासन मौन साधे बैठा है।
सोनिया विहार: ढका हुआ क्रूज और अधूरा विकास
सोनिया विहार में स्थिति थोड़ी अलग दिखी। यहाँ यमुना में पानी साफ़ है और जल स्तर भी बेहतर है। सरकार ने यमुना में क्रूज चलाने का वादा किया था। हमारी टीम को वहाँ क्रूज तो मिला, लेकिन वह फिलहाल कवर के नीचे है। संभावना है कि 20 फरवरी को इसका उद्घाटन हो। लेकिन सवाल यह है कि अगर क्रूज ही चलाना था, तो ओखला से वजीराबाद के बीच यमुना साफ़ क्यों नहीं की गई? वजीराबाद बराज के बाद पानी की कमी और गंदगी सरकार के दावों पर सवाल खड़ा करती है।
राजेंद्र नगर: जनता की मिली-जुली राय
शहर के पॉश इलाके राजेंद्र नगर में भी राय बंटी हुई है। राजेंदर सिंह सरकार के काम से पूरी तरह असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि एक साल में सड़कों और नालियों की मरम्मत तक नहीं हुई। पीने के पानी की समस्या ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। वहीं यज्यपति उपाध्याय ने सरकार को घेरे में लेते हुए कहा कि महिलाओं को ₹2500 देने का वादा अब तक कागज़ों पर ही है। केंद्र, निगम और दिल्ली में एक ही पार्टी की सरकार होने के बाद भी बुनियादी ढांचे का बुरा हाल है।
उम्मीद की एक किरण: कुछ लोग अब भी साथ
हालांकि, हर कोई सरकार के खिलाफ नहीं है। ऋषि और सोनिया जैसे निवासियों का मानना है कि किसी भी सरकार को सिस्टम सुधारने में वक्त लगता है। उनका कहना है कि अभी चार साल बाकी हैं, इसलिए इतनी जल्दी नतीजे पर पहुंचना गलत होगा। पारस दुआ ने भी सरकार की इच्छाशक्ति का समर्थन किया। उनका कहना है कि अगर भाजपा सरकार अगले कुछ सालों में प्रदर्शन नहीं सुधारती, तो जनता पांच साल बाद खुद अपना फैसला सुना देगी। फिलहाल, दिल्ली के लोगों की नज़रें 20 फरवरी को आने वाले सरकारी रिपोर्ट कार्ड पर टिकी हैं।
विपक्ष का कड़ा रुख
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि यह सरकार 12 महीनों में 12 मोर्चों पर विफल रही है। प्रदूषण और पर्यावरण के मामले में स्थिति और बिगड़ी है। कांग्रेस के अनुसार सरकार की कथनी और करनी में बहुत बड़ा अंतर है।

