दिल्ली से देहरादून अब 2 घंटे में, एक्सप्रेसवे की क्या हैं बड़ी सुविधाएं?
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दिल्ली से देहरादून अब 2 घंटे में, एक्सप्रेसवे की क्या हैं बड़ी सुविधाएं?

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 14 अप्रैल को होगा। इसके शुरू होने से सफर 6 घंटे से घटकर 2 से 2.5 घंटे रह जाएगा।


दिल्ली से देहरादून की यात्रा अब पहले से कहीं ज्यादा तेज, आसान और सुविधाजनक होने जा रही है। Delhi-Dehradun Expressway को 14 अप्रैल से आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस हाई-स्पीड कॉरिडोर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।

करीब 213 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून का सफर, जो पहले 6 घंटे या उससे अधिक समय लेता था, अब महज 2 से 2.5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। यह परियोजना खासतौर पर वीकेंड ट्रैवल को आसान बनाने वाली है—अब लोग सुबह दिल्ली में नाश्ता कर पहाड़ों में दोपहर का खाना खा सकेंगे।

इस एक्सप्रेसवे पर वाहन 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगे, जिससे यात्रा न सिर्फ तेज होगी बल्कि अधिक सुगम भी बनेगी। यह मार्ग अक्षरधाम मंदिर (Akshardham Temple) से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के बागपत, शामली और सहारनपुर से होते हुए उत्तराखंड की राजधानी देहरादून तक जाता है। इसके साथ ही यह हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी जाने वाले यात्रियों के लिए भी बड़ी राहत लेकर आएगा।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा किया गया है। करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे में 6 लेन का हाई-स्पीड कॉरिडोर, आधुनिक इंटरचेंज, सर्विस रोड, इमरजेंसी लेन और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी, एम्बुलेंस और हेल्पलाइन की भी व्यवस्था की गई है।

दिल्ली में इस एक्सप्रेसवे का एंट्री और एग्जिट पॉइंट शास्त्री पार्क के पास बनाया गया है, जिससे कश्मीरी गेट, विकास मार्ग, गीता कॉलोनी, सिग्नेचर ब्रिज जैसे प्रमुख इलाकों से आने-जाने वाले लोगों को सुविधा होगी। टोल की बात करें तो नए एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का सफर लगभग 675 रुपये का पड़ेगा, जबकि 24 घंटे के भीतर वापसी करने पर दोनों तरफ के लिए 1,010 रुपये चुकाने होंगे, जिससे यात्रियों को कुछ राहत मिलेगी। हालांकि अक्षरधाम से लोनी बॉर्डर तक का लगभग 18 किलोमीटर हिस्सा टोल-फ्री रखा गया है, ताकि दिल्ली के स्थानीय ट्रैफिक पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

एनएचएआई का अनुमान है कि इस एक्सप्रेसवे से सालाना 900 से 950 करोड़ रुपये की आय हो सकती है, जिससे परियोजना की लागत करीब 13 वर्षों में वसूल की जा सकेगी। यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ दिल्ली और देहरादून के बीच दूरी को कम करेगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी नई रफ्तार देगा।

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