Free Gas Cylinder : दिल्ली में चुनावी बिगुल फुंकने से पहले किए गए बड़े-बड़े वादों की जमीनी हकीकत अब सामने आने लगी है। संकल्प पत्र में 'दिल्ली के परिवारों' को मुफ्त सिलेंडर देने का वादा करने वाली सरकार ने कैबिनेट में इस पर मुहर तो लगा दी, लेकिन इसके दायरे को बेहद सीमित कर दिया है। सरकार की इस योजना का लाभ केवल उन लोगों को मिलेगा जिनके पास दिल्ली का सक्रिय राशन कार्ड है। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में केवल 17.5 लाख राशन कार्ड धारक हैं, जबकि दिल्ली की कुल आबादी करोड़ों में है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या चुनाव के समय 'दिल्ली के परिवारों' का मतलब सिर्फ राशन कार्ड धारक ही था? इस फैसले से दिल्ली की एक बहुत बड़ी आबादी, जिसमें मध्यम वर्ग और किराए पर रहने वाले लोग शामिल हैं, खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। सरकार ने 242 करोड़ रुपये का फंड तो जारी किया है, लेकिन लाभ की शर्तों ने लाखों वोटर्स को इस घेरे से बाहर कर दिया है।
सिर्फ राशन कार्ड धारकों को मिलेगा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि संकल्प पत्र में दिल्ली से किया एक और वादा हम पूरा कर रहे हैं। सभी राशनकार्ड धारकों को होली और दिवाली पर निशुल्क गैस सिलेंडर दिया जाएगा। शुरुआत इस वर्ष होली के त्योहार से हो रही है। DBT ( डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर ) से सभी लाभार्थियों के खाते में सीधे पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। बजट पास कर दिया गया है। लेकिन, जब मुख्यमंत्री ने विस्तार से इस बारे में बताया तो मालूम हुआ कि ये लाभ दिल्ली की सभी गरीब महिलाओं को नहीं बल्कि चन्द महिलाओं को ही मिल पायेगा।
चुनावी सभाओं में जब 'फ्री सिलेंडर' का नारा गूंजा था, तब किसी भी मंच से राशन कार्ड जैसी कोई बात नहीं कही गयी थी। अब कैबिनेट के फैसले में स्पष्ट किया गया है कि केवल रजिस्टर्ड 17.5 लाख राशन कार्ड धारकों के बैंक खाते में ही ₹853 भेजे जाएंगे।
किराएदारों और प्रवासियों को लगा बड़ा झटका
दिल्ली की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले किराएदार और प्रवासी मजदूर, जो दूसरे राज्यों से आकर यहाँ बसे हैं, इस योजना से पूरी तरह वंचित रहेंगे। इनमें से अधिकांश के पास दिल्ली का राशन कार्ड नहीं है, लेकिन वोटर कार्ड और आधार कार्ड है। सरकार ने पीएनजी (PNG) इस्तेमाल करने वालों को पैसे देने की बात तो कही है, लेकिन वहाँ भी 'राशन कार्ड' की शर्त एक बड़ी बाधा बन गई है। ऐसे में चुनावी वादा केवल एक सिमित वर्ग तक ही सिमट कर रह गया है।
बजट का गणित: क्या 242 करोड़ काफी हैं?
सरकार ने इस योजना के लिए 242 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यदि दिल्ली के हर परिवार को यह लाभ दिया जाता, तो यह बजट हजारों करोड़ में पहुँचता। जानकारों का मानना है कि बजट को कम रखने और वित्तीय बोझ से बचने के लिए सरकार ने 'राशन कार्ड' का फिल्टर लगाया है। यह रणनीति सरकारी खजाने के लिए तो ठीक हो सकती है, लेकिन उन वोटर्स के लिए एक कड़वा अनुभव है जिन्होंने 'सबके लिए फ्री' के वादे पर भरोसा किया था।
राजनीति और संकल्प पत्र के 'शब्दों' का मायाजाल
विपक्ष ने सरकार के इस कदम को 'आंशिक वादा खिलाफी' करार दिया है। जब संकल्प पत्र जारी हुआ था, तब 'दिल्ली की गरीब महिलाओं' शब्द का प्रयोग व्यापक था। अब कैबिनेट मीटिंग के बाद इसे केवल एक श्रेणी तक सीमित कर देना एक स्टंट माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि वह धीरे-धीरे सभी वादे पूरे करेगी, लेकिन होली पर मिलने वाले इस पहले तोहफे ने दिल्ली की एक बड़ी आबादी के बीच असंतोष के बीज बो दिए हैं।