पीएनजी कनेक्शन की दौड़ में फंसी दिल्ली, गैस संकट की जमीनी सच्चाई
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पीएनजी कनेक्शन की दौड़ में फंसी दिल्ली, गैस संकट की जमीनी सच्चाई

केंद्र सरकार के पर्याप्त गैस भंडार के दावे के बावजूद दिल्ली में LPG की किल्लत बनी है। PNG अनिवार्यता से किराएदार और अनधिकृत कॉलोनियों के लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं।


पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच केंद्र सरकार का दावा है कि देश में तेल, एलपीजी सिलेंडर और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की कोई कमी नहीं है। सरकार के अनुसार, देश के पास करीब 60 दिनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति इससे अलग नजर आ रही है, जहां लोगों को एलपीजी सिलेंडर की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने निर्देश दिया है कि जिन इलाकों में PNG लाइन बिछ चुकी है, वहां रहने वाले लोगों के लिए PNG कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो 90 दिनों के भीतर एलपीजी कनेक्शन निरस्त किया जा सकता है। यह फैसला खासकर उन क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है, जहां पाइपलाइन तो है, लेकिन कॉलोनियां अनधिकृत हैं या बड़ी संख्या में किराएदार रहते हैं।

जमीनी स्तर पर क्या कुछ हो रहा है, इसे समझने के लिए द फेडरल देश की टीम ने दिल्ली के तीन इलाकों—न्यू अशोक नगर, लक्ष्मीनगर और जामिया नगर—का दौरा किया।

IGL कस्टमर केयर तक पहुंच मुश्किल

PNG कनेक्शन को लेकर बढ़ती मांग के बीच IGL के कस्टमर केयर तक पहुंचना भी लोगों के लिए चुनौती बन गया है। उपलब्ध हेल्पलाइन नंबर पर कई बार संपर्क करने की कोशिश के बावजूद या तो कॉल का जवाब नहीं मिला, या लाइन व्यस्त रही। पहले जहां आसानी से बात हो जाती थी, अब लंबी कतार और इंतजार का सामना करना पड़ रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि PNG कनेक्शन को लेकर लोगों पर दबाव काफी बढ़ गया है।

न्यू अशोक नगर: किराएदारों को सबसे बड़ी दिक्कत

पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर में जमीनी हकीकत समझने पर सामने आया कि पाइपलाइन होने के बावजूद सभी लोगों ने PNG कनेक्शन नहीं लिया है।

स्थानीय निवासी शकील के अनुसार, “सबसे बड़ी परेशानी किराएदारों के सामने है। किराएदारों का ठिकाना स्थायी नहीं होता, ऐसे में PNG कनेक्शन लेने का खर्च उनके लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। अगर वे मकान छोड़ते हैं, तो लगाया गया पैसा डूब सकता है।”

शकील की बात को आगे बढ़ाते हुए राजेश कहते हैं, “सरकार की तरफ से PNG को लेकर जो नियम आया है, उससे कई लोग वाकिफ नहीं हैं। मेरी तरह सैकड़ों लोग हैं।”

राजेश आगे कहते हैं, “इसमें दो मत नहीं कि ईरान जंग की वजह से मुश्किल बढ़ी है, लेकिन सवाल यह है कि एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी क्यों नहीं रुक रही?”

इस पर संदीप कहते हैं, “सरकार कहती है कि वह कार्रवाई कर रही है, लेकिन वह जमीन पर दिखनी भी चाहिए। अब सरकार ने PNG को लेकर फैसला किया है, तो आम लोग क्या कर सकते हैं?”

लक्ष्मीनगर: NOC और खर्च की दिक्कत

लक्ष्मीनगर में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। यहां अधिकृत और अनधिकृत दोनों तरह की कॉलोनियां मौजूद हैं।निवासी सुभाष चंद्र गुप्ता के अनुसार, “अधिकांश जगहों पर PNG कनेक्शन लिया जा चुका है, लेकिन किराएदारों के लिए यह बड़ा संकट है। सरकार के निर्देश के अनुसार एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा, लेकिन नया कनेक्शन लेने के लिए मकान मालिक से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) जरूरी है, जो हमेशा मिल पाना आसान नहीं होता।” उन्होंने आगे कहा, “अगर किराएदार मकान छोड़ देता है, तो न्यूनतम खर्च कौन उठाएगा, यह भी एक बड़ी चिंता है।”

जामिया नगर: जहां पाइपलाइन ही नहीं

दक्षिण दिल्ली के जामिया नगर में समस्या और अलग है। यहां कई ऐसे इलाके हैं, जैसे अबुल फजल और शाहीन बाग, जहां अभी तक PNG पाइपलाइन नहीं पहुंची है। स्थानीय निवासी शाहिद का कहना है, “ऐसे में LPG कनेक्शन सरेंडर करने का नियम हमारे लिए कैसे लागू होगा, इस पर स्पष्टता जरूरी है। पहले जहां बिना बुकिंग के भी गैस मिल जाती थी, अब इसके लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।”

बढ़ती मांग और व्यावहारिक चुनौतियां

दिल्ली-एनसीआर में PNG उपभोक्ताओं की संख्या 19 लाख से अधिक है और हर दिन 1200–1300 नए आवेदन आ रहे हैं। IGL का कहना है कि वह तेजी से कनेक्शन देने की कोशिश कर रहा है। नियमों में बदलाव करते हुए किराएदारों को भी NOC के जरिए कनेक्शन लेने की अनुमति दी गई है। हालांकि, जमीनी स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती मकान मालिकों के रवैये और प्रक्रियात्मक दिक्कतों की है, जो इस पूरी व्यवस्था को जटिल बना रही है।

कुल मिलाकर, सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। PNG को बढ़ावा देने की नीति जहां दीर्घकालिक समाधान के रूप में देखी जा रही है, वहीं वर्तमान में इससे सबसे ज्यादा प्रभावित किराएदार और अनियमित कॉलोनियों में रहने वाले लोग हो रहे हैं।

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