दिल्ली का 'काला पानी': जहाँ जूतों से नहीं, 'गम बूट्स' से होती है इंसान की पहचान
किराड़ी के शर्मा कॉलोनी में अगस्त 2025 से भरा है गंदा पानी। सांपों के डर और जलभराव के कारण लोग घर छोड़ने को मजबूर। बच्चों की पढ़ाई और सेहत पर गहरा संकट।

किराड़ी फाइल्स : देश की राजधानी दिल्ली को अक्सर विकास का मॉडल कहा जाता है। स्मार्ट सिटी और विश्वस्तरीय सुविधाओं के दावे हर रोज होते हैं। लेकिन इन दावों के पीछे एक काली सच्चाई छिपी है। यह सच्चाई है किराड़ी के शर्मा एनक्लेव की। यहां की तस्वीरें देखकर आपकी रूह कांप जाएगी। यह दिल्ली का वो हिस्सा है जिसे भुला दिया गया है। यहां लोग अगस्त 2025 से नरक जैसी जिंदगी जी रहे हैं। आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन हालात बदतर होते जा रहे हैं। यहां लोगों की पहचान अब उनके चेहरों से नहीं होती। यहां पहचान पैरों में पहने 'गम बूट्स' से होती है। बच्चा हो या बुजुर्ग, सबके पैरों में रबर के बूट हैं। गंदे पानी और कीचड़ ने पूरी कॉलोनी को घेर रखा है। गलियों का गंदा पानी अब लोगों के बेडरूम तक घुस चुका है। शासन की अनदेखी ने इस कॉलोनी को 'काला पानी' बना दिया है।
जूते-चप्पल नहीं, गम बूट्स हैं सहारा
शर्मा एनक्लेव में अब फैंसी जूतों का कोई काम नहीं है। यहां के निवासियों के लिए 'गम बूट्स' ही जीवनरेखा हैं। सुबह सोकर उठने से लेकर रात को सोने तक संघर्ष जारी है। बिना बूट्स पहने घर की दहलीज पार करना नामुमकिन है। यह बूट्स अब यहां के निवासियों की मजबूरी बन गए हैं। चाहे ऑफिस जाना हो या बाजार, बूट पहनना अनिवार्य है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे जूते पहनना भूल चुके हैं। आठ महीने से जमा पानी ने जीना मुहाल कर दिया है। प्रशासन का कोई भी अधिकारी सुध लेने नहीं आता। लोग अब इसी गंदे और बदबूदार पानी के बीच रहने को मजबूर हैं।
सांप, बीमारी और मौत का साया
खतरा सिर्फ गंदगी या बदबू तक सीमित नहीं है। यहां हर पल जान का खतरा भी बना हुआ है। गलियों में घुटनों से लेकर कमर तक पानी भरा रहता है। इस ठहराव वाले पानी में अक्सर जहरीले सांप तैरते दिखते हैं। कई बार जहरीले कीड़े लोगों के घरों में घुस जाते हैं। डर के कारण माता-पिता ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। कंधे पर बस्ता टांगे बच्चों के लिए घर से निकलना जंग जैसा है। करीब 35 गलियां अब तालाब में तब्दील हो चुकी हैं। लोग अपने ही घरों की पहली मंजिल पर कैद होकर रह गए हैं। बीमारी फैलने का खतरा लगातार मंडरा रहा है।
ताले लटके हैं सपनों के आशियानों पर
हालात इतने खराब हैं कि लोगों का सब्र अब टूट चुका है। कई परिवारों ने तंग आकर अपना घर छोड़ दिया है। वे अपनी खून-पसीने की कमाई से बना घर छोड़ने को मजबूर हैं। लोग घरों पर ताला लगाकर किराए के मकानों में शिफ्ट हो गए हैं। ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह रहने लायक नहीं बचे हैं। दीवारों में सीलन और पानी ने मकानों को कमजोर कर दिया है। बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। उनके लिए यह कॉलोनी एक खुली जेल बन गई है। किसी का व्यापार ठप हो गया है तो किसी की पढ़ाई। आर्थिक नुकसान ने लोगों की कमर तोड़ दी है।
वीआईपी दिल्ली बनाम किराड़ी का सच
यह वही दिल्ली है जहां देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति रहते हैं। एनडीएमसी इलाके में पत्ता भी गिरता है तो तुरंत सफाई होती है। लेकिन किराड़ी के शर्मा एनक्लेव में दावों की हवा निकल जाती है। यहां स्वच्छ भारत अभियान का मजाक उड़ता दिखाई देता है। सवाल यह है कि इन लोगों का आखिर कसूर क्या है? क्या दिल्ली की जनता ने इसी 'स्मार्ट' जिंदगी का सपना देखा था? सिस्टम की लाचारी यहां साफ दिखाई देती है।
राजनीती का अखाड़ा बनी परेशानी
जिस तरह से ये समस्या मीडिया सोशल मीडिया पर वायरल हुई, उसे देखते हुए सत्ता पक्ष यानी भाजपा और विपक्ष यानी आम आदमी पार्टी, दोनों की तरफ से एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाये गए। जहाँ आप ने भाजपा सरकार और डीडीए को ज़िम्मेदार ठहराया तो भाजपा और दिल्ली सरकार की तरफ से दिल्ली की पूर्व आप सरकार पर आरोप लगाया गया। इतना ही नहीं स्थानीय विधायक अनिल झा वत्स (आप ) को भी ज़िम्मेदार ठहराया गया। कुछ ऐसा आरोप श्तानीय लोगों द्वारा अनिल झा पर भी लगाया गया।
विधायक और सांसद में तीखी बहस
23 जनवरी को उत्तर पश्चिमी दिल्ल्ली से सांसद योगेन्द्र चंदोलिया ने किराड़ी के शर्मा एन्क्लेव का दौरा किया, तभी आप से क्षेत्रीय विधायक अनिल झा भी अपने कुछ समर्थकों के साथ वहां पहुँच गए। दोनों के बीच काफी बहस हुई और आरोप प्रत्योप लगाये गए।
कैबिनेट मंत्री श्री @p_sahibsingh ने तथ्यों और आंकड़ों के साथ किराड़ी पर AAP-दा द्वारा फैलाए गए झूठ की खोली पोल! pic.twitter.com/A8uOMc0OMo
— BJP Delhi (@BJP4Delhi) January 23, 2026
मंत्री का दावा: बजट पास, जल्द होगा काम
मीडिया में खबर आने के बाद अब सरकारी मशीनरी में हलचल हुई है। स्थानीय लोगों के गुस्से के बाद सरकार जागी है। दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा ने इस समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया है। उन्होंने दावा किया है कि बजट पास कर दिया गया है। उनका कहना है कि जल्द ही समाधान भी हो जाएगा। लेकिन किराड़ी के लोग अब सिर्फ वादे नहीं चाहते। वे जमीनी हकीकत बदलते देखना चाहते हैं। फिलहाल लोग गम बूट पहने सूखी जमीन का इंतजार कर रहे हैं।

