फोन एक्टिव था लेकिन तलाश अधूरी रही, जनकपुरी हादसे की दर्दनाक कहानी
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फोन एक्टिव था लेकिन तलाश अधूरी रही, जनकपुरी हादसे की दर्दनाक कहानी

दिल्ली के जनकपुरी में जल बोर्ड के 20 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर युवक की मौत। मोबाइल एक्टिव रहा, लेकिन समय पर मदद न मिलने से परिवार ने पुलिस व सिस्टम पर सवाल उठाए।


दिल्ली को विश्वस्तरीय राजधानी बनाएंगे। यह हकीकत से अधिक जुमला नजर आता है। सियासी दल विपक्ष में रहते हुए दिल्ली को चमकाने की बात तो करते हैं लेकिन सत्ता में आते ही कमियों का रोना रोते हैं। राजधानी दिल्ली के बारे में आपकी सामान्य धारणा यही होगी यह देश का सबसे उम्दा शहर हर एक क्षेत्र में होगा। लेकिन कुछ घटनाएं पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं। दिल्ली के जनकपुरी बी ब्लॉक में दिल्ली जल बोर्ड की ओर से खोदे गए करीब 20 फीट गहरे गड्ढे में गिरने से 25 वर्षीय युवक कमल ध्यानी की मौत हो गई। आरोप है कि समय पर मदद न मिलने के कारण युवक पूरी रात गड्ढे में तड़पता रहा और दम तोड़ दिया।

“पूरी रात ढूंढते रहे, सिस्टम खामोश रहा”

परिजनों मुताबिक बृहस्पतिवार यानी पांच फरवरी की रात कमल के लापता होने के बाद परिवार और दोस्त उसे तलाशते रहे। हम पूरी रात एक-एक थाने के चक्कर लगाते रहे। उसका फोन बजता रहा, लोकेशन मिल रही थी, लेकिन कहीं से ठोस मदद नहीं मिली। कमल के जुड़वा भाई करण का आरोप है कि पुलिस ने यह कहकर तलाश से मना कर दिया कि रात में सर्च संभव नहीं है और शिकायत सुबह दर्ज होगी। परिवार का कहना है कि अगर उसी वक्त गड्ढे वाले रास्ते की ठीक से तलाशी ली जाती, तो शायद कमल की जान बच सकती थी।

फोन एक्टिव था, फिर तलाश क्यों नहीं?

परिवार और दोस्तों का सीधा सवाल है कि जब मोबाइल फोन पूरी रात एक्टिव था और लोकेशन ट्रेस हो रही थी, तो गड्ढे के आसपास सघन तलाशी क्यों नहीं ली गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस सिर्फ मोबाइल फ्लैश के सहारे औपचारिक खोज करती रही, जबकि दिल्ली पुलिस के पास आधुनिक तकनीक और करीब 13 हजार करोड़ रुपये का बजट है।

पुलिस का पक्ष

दिल्ली पुलिस ने परिवार के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के अनुसार परिजन रात करीब 2:50 बजे थाने पहुंचे। मोबाइल लोकेशन ट्रेस की गई और डिस्ट्रिक्ट पार्क व आसपास के इलाकों में तलाश भी की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

“मैंने कलेजे का टुकड़ा खो दिया”

शुक्रवार को जब दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में पोस्टमार्टम हो रहा था, तब पोस्टमार्टम हाउस के बाहर दर्द और खामोशी पसरी हुई थी। कमल के पिता नरेश की आंखों में आंसू थे और शब्द नहीं। उन्होंने बस इतना कहा मेरे पास कहने को कुछ नहीं है। मैंने कलेजे का टुकड़ा खो दिया है।”

जुड़वा भाई की टूटी आवाज

जुड़वा भाई करण अपनी यादों में कमल को ढूंढते रहे। भर्राई आवाज में बोले उसे बाइक का बहुत शौक था। तीन साल पहले अपने जन्मदिन पर अपने पैसों से बाइक खरीदी थी। उसी बाइक के साथ वह आखिरी वक्त तक रहा। पता नहीं किसकी नजर लग गई।”

शादी की सालगिरह से पहले उजड़ा घर

कमल की मां पूरी रात बेटे के लौटने का इंतजार करती रहीं। अगला दिन माता-पिता की शादी की सालगिरह थी। मां ने रोते हुए कहा उसने कहा था कल छुट्टी है, हम आपकी और पापा की एनिवर्सरी मनाएंगे। मेरे बेटे की मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा?”

कब और कैसे हुआ हादसा

मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पोखरा गांव निवासी कमल ध्यानी (25) पालम के कैलाशपुरी में परिवार के साथ रहते थे। वह रोहिणी में एचडीएफसी कॉल सेंटर में कार्यरत थे। भाई करण के अनुसार, रात 11:53 बजे कमल ने फोन कर बताया था कि वह जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर के पास पहुंच गया है और 10–15 मिनट में घर आ जाएगा। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया।

शुक्रवार सुबह 8:03 बजे दमकलकर्मियों की मदद से पुलिस ने कमल को गड्ढे से बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल पहुंचाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

FIR दर्ज, अफसर निलंबित

इस मामले में जनकपुरी थाने में ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है। दिल्ली सरकार ने जांच समिति गठित करते हुए जल बोर्ड के कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर दिया है।

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