गुरुग्राम नगर निगम: टैक्स डिफाल्टरों का बोझ, खजाने में 450 करोड़ रुपये; सैलरी का बढ़ता संकट
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गुरुग्राम नगर निगम: टैक्स डिफाल्टरों का बोझ, खजाने में 450 करोड़ रुपये; सैलरी का बढ़ता संकट

Property Tax Defaulter: गुरुग्राम नगर निगम में प्रॉपर्टी टैक्स डिफाल्टरों का बकाया बढ़ रहा है. 29,191 डिफाल्टरों पर 291 करोड़ रुपये का बकाया है. निगम के पास 450 करोड़ रुपये ही बचे हैं, जो सालाना खर्च से कम हैं.


Gurugram Municipal Corporation: गुरुग्राम नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स डिफाल्टरों की बढ़ती संख्या से बड़ा संकट सामने आ रहा है. अभी तक 29,191 डिफाल्टरों पर 291 करोड़ 91 लाख रुपये का बकाया है. यह स्थिति तब है, जब निगम के पास खजाने में केवल 450 करोड़ रुपये हैं, जो सालाना खर्च का आधा भी नहीं है। अगर यही हालात रहे तो कर्मचारियों की सैलरी तक देने में मुश्किल हो सकती है.

नोटिस समाधान नहीं

निगम ने डिफाल्टरों से टैक्स वसूलने के लिए केवल नोटिस भेजने तक ही अपनी जिम्मेदारी सीमित कर दी है. न तो इनकी संपत्तियों की नीलामी की जा रही है और न ही कोई सख्त कार्रवाई की जा रही है. इसी वजह से टैक्स की रिकवरी में कमी आई है.

टैक्स रिकवरी में 16% की गिरावट

गुरुग्राम नगर निगम की प्रॉपर्टी टैक्स से होने वाली आय में पिछले साल की तुलना में 16% की गिरावट आई है. वर्ष 2023-24 में जहां निगम ने 278.49 करोड़ रुपये की टैक्स रिकवरी की थी. वहीं, 2024-25 में यह घटकर 262.12 करोड़ रुपये रह गई है. यह कमी तब आई है, जब शहर में कुल सात लाख से ज्यादा संपत्तियां हैं और अगर समय पर टैक्स की वसूली की जाती तो यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता था.

बकाएदारों पर कार्रवाई

नगर निगम के आयुक्त प्रदीप दहिया का कहना है कि प्रॉपर्टी टैक्स डिफाल्टरों को नोटिस भेजे जा रहे हैं. जो लोग टैक्स नहीं जमा करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. अगर यही स्थिति बनी रही तो शहर में कई विकास कार्य रुक सकते हैं और निगम को सरकारी फंड पर निर्भर रहना पड़ेगा.

शहर में कुल संपत्तियां

गुरुग्राम में कुल 7,05,602 संपत्तियां हैं, जिनमें रिहायशी, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थानिक, और अन्य श्रेणियों में बांटी गई हैं. इनमें से 4,37,111 रिहायशी संपत्तियां, 92,457 व्यावसायिक संपत्तियां, 6,561 औद्योगिक संपत्तियां, 4,408 संस्थानिक संपत्तियां और 1,11,361 खाली प्लॉट हैं.

आगे की योजना

निगम की योजना है कि डिफाल्टरों से टैक्स की समय पर वसूली हो, ताकि शहर में चल रहे विकास कार्यों को वित्तीय सहयोग मिल सके. साथ ही, बकाएदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे, ताकि निगम के खजाने में धन की आवक हो सके.

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