voter list election commission india elections
x

बंगाल SIR संकट: EC ने TMC विधायक के खिलाफ FIR का दिया आदेश, गरमाई सियासत

जहां एक तरफ चुनाव आयोग कानून के सख्त पालन पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर TMC और उससे जुड़े संगठन सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।


Click the Play button to hear this message in audio format

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग (EC) और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच टकराव और तेज हो गया है। चुनाव आयोग ने गुरुवार (22 जनवरी) को मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का से TMC विधायक मनीरुल इस्लाम के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। आरोप है कि हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान सरकारी ऑफिस में तोड़फोड़ की गई। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब एक दिन पहले ही चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित लापरवाही को लेकर 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।

BDO ऑफिस में हुई थी तोड़फोड़

चुनाव आयोग ने मुर्शिदाबाद के जिला मजिस्ट्रेट और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) को निर्देश दिया है कि वे फरक्का विधानसभा क्षेत्र से विधायक मनीरुल इस्लाम के खिलाफ FIR दर्ज करें। मामला इस महीने की शुरुआत में फरक्का ब्लॉक विकास कार्यालय (BDO) में हुई हिंसा और तोड़फोड़ से जुड़ा है। चुनाव आयोग ने कहा है कि इस आदेश का तुरंत पालन किया जाए और किसी भी तरह की देरी या ढिलाई को जानबूझकर अवहेलना माना जाएगा।

क्या हुआ था 14 जनवरी को?

14 जनवरी को मनीरुल इस्लाम अपने समर्थकों के साथ फरक्का BDO कार्यालय पहुंचे थे। उस समय बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आरोप था कि मतदाताओं को बार-बार नोटिस भेजे जा रहे हैं, दस्तावेज मांगे जा रहे हैं और उन्हें परेशान किया जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान विधायक और उनके समर्थक जबरन BDO कार्यालय में घुस गए, सुनवाई के लिए आए मतदाताओं को बाहर भेज दिया और सरकारी फर्नीचर व दस्तावेजों को नुकसान पहुंचाया।

EC नाराज

एक वरिष्ठ चुनाव आयोग अधिकारी ने बताया कि जैसे ही यह मामला आयोग के संज्ञान में आया, इसे उच्च स्तर पर उठाया गया। राज्य के पुलिस महानिदेशक से सीधे बात की गई और साफ कहा गया कि कानून अपना काम करेगा। हालांकि, फरक्का थाने में जो FIR दर्ज हुई थी, उसमें विधायक का नाम शामिल नहीं था। इसी बात से नाराज होकर चुनाव आयोग ने अब जिला मजिस्ट्रेट को व्यक्तिगत रूप से विधायक का नाम शामिल करते हुए FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। चुनाव आयोग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में कानून का चयनात्मक इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विधायक का जवाब: राजनीतिक साजिश

विधायक मनीरुल इस्लाम ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि यह उन्हें फंसाने की राजनीतिक साजिश है। उनका कहना है कि वे और उनकी पार्टी SIR प्रक्रिया के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे, क्योंकि यह आम लोगों को परेशान कर रही है।

SIR को लेकर बढ़ता विरोध

SIR प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल में अब तक 30 लाख से ज्यादा ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं की पहचान की गई है और करीब 96 लाख नामों में तकनीकी गड़बड़ियां बताई गई हैं। इसे लेकर आरोप लग रहे हैं कि असली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश हो रही है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने भी 19 जनवरी को दखल दिया था। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह अधिक पारदर्शिता बरते, जिन मतदाताओं के नाम पर आपत्ति है, उनकी सूची सार्वजनिक करे और सुनवाई ऐसे स्थानों पर कराए जहां लोगों को आसानी हो।

EC ने राज्य प्रशासन को दी सख्त चेतावनी

चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस प्रमुख और जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में सुनवाई शांतिपूर्ण तरीके से कराई जाए। आयोग ने चेतावनी दी है कि किसी भी अव्यवस्था के लिए राज्य प्रशासन जिम्मेदार होगा।

TMC का आरोप

TMC ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को दबाया जा रहा है। इसी बीच TMC समर्थक बुद्धिजीवियों ने ‘देश बचाओ गण मंच’ नाम से एक नया मंच बनाया है, जो SIR प्रक्रिया के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन की तैयारी कर रहा है। मंच का दावा है कि यह लड़ाई बंगाल की पहचान और असली मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए है।

बढ़ता टकराव, बड़ा राजनीतिक संदेश

जहां एक तरफ चुनाव आयोग कानून के सख्त पालन पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर TMC और उससे जुड़े संगठन सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर यह टकराव अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक और संवैधानिक संघर्ष का रूप लेता दिख रहा है।

Read More
Next Story