5 राज्यों का महासंग्राम, किस दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती?
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5 राज्यों का महासंग्राम, किस दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती?

पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान आज हो सकता है। घोषणा के साथ ही इन राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी।


देश के पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का औपचारिक ऐलान आज होने की संभावना है। चुनाव आयोग शाम 4 बजे नई दिल्ली के विज्ञान भवन में में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव कार्यक्रम घोषित करेगा।जैसे ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होगी, इन सभी राज्यों में तुरंत आदर्श चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हो जाएगी। इसके बाद राज्य सरकारें नई योजनाओं की घोषणा या किसी भी लोक-लुभावन फैसले को लागू नहीं कर सकेंगी।

इन चुनावों का महत्व केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं है। इन पांच राज्यों के नतीजे आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति के शक्ति-संतुलन और गठबंधन की दिशा को भी प्रभावित कर सकते हैं।

सीटों का गणित और सियासी दांव

इन पांचों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा सीटों की संख्या अलग-अलग है। असम में 126, केरल में 140, तमिलनाडु में 234 और पश्चिम बंगाल में 294 सीटें हैं, जबकि पुडुचेरी विधानसभा में 30 सीटें हैं।सीटों की यह विविधता इन चुनावों को रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाती है। कुछ राज्यों में सत्तारूढ़ दल के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है, तो कहीं विपक्ष पहली बार सत्ता हासिल करने की कोशिश में है।

बंगाल से केरल तक बीजेपी की चुनौती

इन पांच राज्यों में से पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल ऐसे राज्य हैं जहां Bharatiya Janata Party (भाजपा) अब तक सत्ता में नहीं पहुंच सकी है। इसके उलट असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है, जबकि पुडुचेरी में वह दूसरी बार सरकार बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रही है। इस दृष्टि से ये चुनाव भाजपा के विस्तार की रणनीति और विपक्षी दलों की पकड़ दोनों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

पश्चिम बंगाल- ममता की अग्निपरीक्षा

ममता बनर्जी पिछले 15 वर्षों से पश्चिम बंगाल की सत्ता में हैं। अगर All India Trinamool Congress इस बार भी जीत दर्ज करती है, तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनकर एक नया राजनीतिक रिकॉर्ड बना सकती हैं। 2021 के चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि भाजपा 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष के रूप में उभरी थी। इस बार चुनाव का राजनीतिक समीकरण अधिक जटिल है। एक ओर भाजपा सत्ता हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है, वहीं Indian National Congress और वाम दलों के लिए यह चुनाव अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने का भी सवाल बन गया है।

तमिलनाडु- पारंपरिक द्वंद्व में तीसरे मोर्चे की एंट्री

तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से डीएमके और एआईएडीएमकेके बीच घूमती रही है। पिछले छह दशकों में यहां न तो भाजपा और न ही कांग्रेस सीधे सत्ता में आ सकी है। इस बार भाजपा, एआईएडीएमके के साथ गठबंधन में है, जबकि कांग्रेस डीएमके के साथ खड़ी है। इसके अलावा अभिनेता विजय (Vijay) की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) की एंट्री ने मुकाबले को संभावित रूप से त्रिकोणीय बना दिया है।

2021 में M. K. Stalin के नेतृत्व में डीएमके ने 133 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी। इस बार उनके सामने सत्ता बचाने की चुनौती है, जबकि एआईएडीएमके वापसी की कोशिश में है।

केरल: वाम बनाम कांग्रेस का पारंपरिक मुकाबला

केरल भारतीय राजनीति में एक अनोखा उदाहरण रहा है, जहां आमतौर पर हर चुनाव में सत्ता बदलती रही है। हालांकि 2021 में एलडीएफ (Left Democratic Front) ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर इस परंपरा को तोड़ दिया।मुख्यमंत्री पी विजयन (Pinarayi Vijayan) के नेतृत्व में एलडीएफ इस बार भी सत्ता बचाने की कोशिश में है, जबकि यूडीएफ (United Democratic Front) जिसका नेतृत्व कांग्रेस के पास है, सत्ता में वापसी की रणनीति बना रहा है।

केरल का चुनाव मुख्य रूप से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच ही माना जाता है, हालांकि भाजपा भी अपने जनाधार को बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

असम-भाजपा की हैट्रिक या कांग्रेस की वापसी?

असम में भाजपा पिछले एक दशक से सत्ता में है। 2016 में पहली बार सत्ता में आने के बाद पार्टी ने 2021 में भी जीत हासिल की थी। वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में भाजपा तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है। 2021 के चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीएन ने 126 में से 75 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 50 सीटें मिली थीं।इस बार कांग्रेस ने कई क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर भाजपा को चुनौती देने की रणनीति बनाई है, जिससे मुकाबला कड़ा होने की संभावना है।

पुडुचेरी- छोटे राज्य में बड़ा सियासी संदेश

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभा भले ही केवल 30 सीटों वाली हो, लेकिन यहां का चुनाव भी राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जाता है।2021 में All India N.R. Congress और भाजपा के गठबंधन ने 16 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी और एन रंगासामी N. Rangasamy मुख्यमंत्री बने थे।

इस बार कांग्रेस ने डीएमके के साथ गठबंधन कर सत्ता में वापसी की कोशिश शुरू कर दी है। ऐसे में यहां भी मुकाबला मुख्य रूप से एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच माना जा रहा है।

इन पांच राज्यों के चुनाव परिणाम सिर्फ क्षेत्रीय सरकारों का भविष्य तय नहीं करेंगे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि बंगाल से लेकर तमिलनाडु और असम से केरल तक सभी प्रमुख दल इन चुनावों को प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं।

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