
EC ने बंगाल चुनाव के तारीखों के साथ ही राज्य के मुख्य - गृह सचिव को पद से हटाया, TMC का संसद में वॉकआउट
चुनाव आयोग ने दुष्यंत नरियाला को राज्य का मुख्य सचिव और संघमित्रा घोष को प्रमुख सचिव (गृह एवं पहाड़ी मामलों) के पद पर नियुक्त करने का निर्देश दिया है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के चंद घटों के बाद चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी सरकार के दो बड़े अधिकारियों को उनके पद से हटाने का फरमान सुना दिया है. चुनाव आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को उनके पद से हटा दिया है.
चुनाव आयोग ने रविवार देर रात (15 मार्च 2026) राज्य सरकार को भेजे गए पत्र में आयोग ने 1993 बैच के आईएएस अधिकारी दुष्यंत नरियाला को राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया है जबकि 1997 बैच की IAS अधिकारी संघमित्रा घोष को प्रमुख सचिव (गृह एवं पहाड़ी मामलों) के पद पर नियुक्त करने का निर्देश दिया है. आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा द्वारा हस्ताक्षर किए गए पत्र में कहा गया, “जिन अधिकारियों का तबादला किया गया है, उन्हें चुनाव समाप्त होने तक किसी भी चुनाव संबंधी पद पर तैनात नहीं किया जाएगा. ” चुनाव आयोग ने कहा कि यह फैसला राज्य में चुनाव तैयारियों की समीक्षा के बाद लिया गया है. आयोग ने निर्देश दिया कि आदेश तुरंत लागू किए जाएं और सोमवार (16 मार्च) दोपहर 3 बजे तक नए अधिकारियों के कार्यभार संभालने की रिपोर्ट भेजी जाए.
पश्चिम बंगाल के हाल के प्रशासनिक इतिहास में इस तरह का फेरबदल असाधारण माना जा रहा है. यह कदम उस समय उठाया गया है जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमुल कांग्रेस सरकार राज्य में चल रही स्पेंशल इंटेसिल रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की लगातार आलोचना कर रही थी. चुनाव आयोग ने रविवार को ही पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव कराने का फैसला किया है जबकि 4 मई को मतों की गिनती की जाएगी.
टीएमसी ने राज्यसभा से किया वॉकआउट
आयोग के इस फैसले की गूंज संसद में भी सुनाई दी. राज्यसभा में टीएमसी के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार पर इस आदेश का ठीकरा फोड़ा. उन्होंने कहा कि रात के अंधेरे में चुनाव आयोग के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और गृह सचिव को उनके पद से हटा दिया है. डेरेक ने कहा, चुनाव आयोग को इसका अधिकार है लेकिन टीएमसी इस फैसले के विरोध में पूरे दिन के लिए राज्यसभा की कार्रवाई का बहिष्कार करते हुए सदन से वॉकआउट करती है. टीएमसी के इस फैसले पर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजूजु ने कहा, चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके फैसले पर सवाल खड़ा करना ठीक नहीं है.

