1020 करोड़ के टेंडर घोटाले पर ईडी रिपोर्ट, तमिलनाडु में सियासी भूचाल
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1020 करोड़ के टेंडर घोटाले पर ईडी रिपोर्ट, तमिलनाडु में सियासी भूचाल

ईडी की 258 पन्नों की रिपोर्ट में मंत्री केएन नेहरू पर 1020 करोड़ रुपए टेंडर घोटाले का आरोप लगाया है। हाईकोर्ट ने एफआईआर के आदेश दिए वहीं विपक्ष हमलावर है।


तमिलनाडु में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक विस्तृत 258 पन्नों की रिपोर्ट ने बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। इस रिपोर्ट में नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति (एमएडब्ल्यूएस) मंत्री के.एन. नेहरू पर 1,020 करोड़ रुपए से अधिक के टेंडर हेरफेर और रिश्वतखोरी का संगठित नेटवर्क चलाने का आरोप लगाया गया है। 3 दिसंबर 2025 को ईडी के चेन्नई जोनल ऑफिस-I द्वारा भेजे गए पत्र में इन आरोपों का विस्तार से उल्लेख है। आगामी 2026 विधानसभा चुनावों से पहले इन खुलासों ने विपक्ष के हमलों को तेज कर दिया है और अदालत के हस्तक्षेप को भी जन्म दिया है।

व्यवस्थित रैकेट का आरोप

ईडी की जांच अप्रैल 2025 में नेहरू के परिवार और सहयोगियों से जुड़े परिसरों पर छापों के दौरान जब्त डिजिटल साक्ष्यों से शुरू हुई। इनमें व्हाट्सऐप चैट, फोटो, कॉल लॉग और टेंडर दस्तावेज शामिल थे। यह छापेमारी एक अब बंद हो चुके बैंक धोखाधड़ी मामले से जुड़ी थी। जांच एजेंसी का दावा है कि जब्त सामग्री से यह संकेत मिलता है कि एमएडब्ल्यूएस के अंतर्गत सरकारी टेंडरों को निविदा खुलने से पहले ही पूर्व-निर्धारित ठेकेदारों के पक्ष में सेट कर दिया जाता था और इसे अक्सर “पार्टी फंड” के योगदान के रूप में दिखाया जाता था।

ईडी ने कवी प्रसाद को इस कथित नेटवर्क का अहम कड़ी बताया है। उन्हें नेहरू परिवार का लंबे समय से करीबी सहयोगी और पारिवारिक कंपनियों का पूर्व निदेशक बताया गया है। आरोप है कि कवी प्रसाद एमएडब्ल्यूएस और मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के बीच समन्वय करते थे, कार्यों का प्रबंधन करते थे, टेंडर आवंटन को प्रभावित करते थे और आईएएस/आईपीएस अधिकारियों को उच्च स्तर से जोड़ते थे। डोजियर के अनुसार उन्होंने रिश्वत देने वालों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रक्रियाओं में हेरफेर किया, जबकि पारदर्शिता का दिखावा बनाए रखा।

अन्य नामों में डी. रमेश और के.एन. मणिवन्नन शामिल हैं। ईडी का दावा है कि इनके मोबाइल फोन से मिले साक्ष्य ठेकेदारों और अधिकारियों से रिश्वत वसूली की ओर संकेत करते हैं। कथित तौर पर यह रकम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क, बैंक ट्रांसफर और अन्य माध्यमों से धनशोधन के जरिए घुमाई गई।

'प्रत्यक्ष लाभार्थी' का उल्लेख

रिपोर्ट में मुख्य रूप से नेहरू और उनके नेटवर्क पर ध्यान केंद्रित किया गया है, लेकिन एक जांच रिपोर्ट में अप्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री का भी उल्लेख है। द्रमुक (डीएमके) अध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को कथित रूप से पार्टी फंड के रूप में दी गई रिश्वत का प्रत्यक्ष लाभार्थी बताया गया है। इसी तरह उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के लिए भी संकेत दिए गए हैं। हालांकि ईडी की आधिकारिक संचार में स्टालिन या उदयनिधि की व्यक्तिगत संलिप्तता का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है।

ईडी ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव, डीजीपी और सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) से धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) सहित संबंधित कानूनों के तहत प्राथमिकी दर्ज कर व्यापक जांच शुरू करने का आग्रह किया है।

नेहरू का जवाब

के.एन. नेहरू ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे दुष्प्रचार अभियान और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि ईडी के दावों में जरा भी सच्चाई नहीं है और वे अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे। मामला तब और गंभीर हो गया जब 20 फरवरी को मद्रास उच्च न्यायालय ने डीवीएसी को निर्देश दिया कि वह एमएडब्ल्यूएस में कथित नौकरी के बदले नकद घोटाले से जुड़े ईडी के दस्तावेजों के आधार पर तुरंत आपराधिक मामला दर्ज” करे। आरोप है कि भर्ती में प्रति पद ₹25 से 35 लाख तक की रिश्वत ली गई।

उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप

उच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर 2025 को ईडी द्वारा साझा किए गए विस्तृत दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया। सूत्रों के अनुसार अदालत द्वारा प्रथम दृष्टया गंभीर भ्रष्टाचार के प्रमाणों की पुष्टि किए जाने के बाद अपील की गुंजाइश सीमित रह गई है। हालांकि कुछ सूत्रों का कहना है कि डीवीएसी मैनुअल में एफआईआर से पहले विस्तृत जांच की आवश्यकता का हवाला देकर सर्वोच्च न्यायालय से स्थगन या राहत मांगी जा सकती है। लेकिन उच्च न्यायालय ने संभावित देरी और साक्ष्य से छेड़छाड़ के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, जिससे आगे की अपील सत्तारूढ़ दल के लिए जोखिम भरी मानी जा रही है।

विपक्ष का हमला

विपक्षी दलों, जिनमें अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) भी शामिल है, ने इन घटनाक्रमों को लेकर द्रमुक सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रही है और मंत्री के इस्तीफे या स्वतंत्र जांच की मांग की है। अभिनेता-राजनेता विजय ने भी नेहरू को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की।

भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु इकाई के प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने मुख्यमंत्री से नेहरू को तुरंत बर्खास्त करने और मामले की सीबीआई जांच के आदेश देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि द्रमुक सरकार भ्रष्टाचार को ढाल दे रही है और कहा कि मुख्य न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने सत्तारूढ़ दल के कथित कदाचार का “परदा फाश” कर दिया है।

एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

द्रमुक सांसद कनिमोझी ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ के लिए आयकर विभाग, सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि द्रमुक को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और पार्टी कानूनी रूप से इन आरोपों का सामना करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि नेहरू जांच में पूरा सहयोग करेंगे और अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।

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