
ED की रेड और हरी फाइल विवाद, क्या कानूनी शिकंजे में फंस सकती हैं ममता बनर्जी?
ED का कहना है कि छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच में बाधा डाली और रेड के दौरान अहम सबूत जबरन हटाकर ले गईं।
ED raid: जब जांच एजेंसी की रेड से ज़्यादा सुर्ख़ियों में मुख्यमंत्री खुद आ जाएं तो मामला सिर्फ कानूनी नहीं रह जाता, वह सियासी तूफान बन जाता है। ऐसे में पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले सत्ता, कानून और सियासत आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं।
गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने राजनीतिक सलाह देने वाली कंपनी I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया। हालात तब और गरमा गए, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद रेड वाली जगह पर पहुंच गईं। उन्होंने ED पर आरोप लगाया कि चुनाव से पहले उनकी पार्टी से जुड़े अहम दस्तावेज जब्त करने की कोशिश की जा रही है।
ED का पक्ष
ED का कहना है कि यह छापेमारी कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई थी। एजेंसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच में बाधा डाली और रेड के दौरान अहम सबूत जबरन हटाकर ले गईं।
I-PAC और TMC का क्या है रिश्ता?
I-PAC मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को राजनीतिक सलाह देता है। इसके अलावा यह पार्टी के आईटी और मीडिया से जुड़े काम भी संभालता है। I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन TMC की आईटी सेल के प्रमुख भी हैं।
मामला पहुंचा कोर्ट
ED की रेड के दौरान हुए पूरे घटनाक्रम के बाद मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। ED ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने की अनुमति मांगी है, जिसमें उसने जांच में दखल देने का आरोप लगाया है। वहीं, I-PAC ने भी हाई कोर्ट का रुख किया है और ED की कार्रवाई को गलत बताते हुए उसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को हाई कोर्ट में होगी।
ममता बनर्जी का बड़ा कदम
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने न सिर्फ रेड वाली जगह से एक हरे रंग की फाइल उठाई, बल्कि ED के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया। उनका कहना है कि ये फाइलें और दस्तावेज पार्टी के चुनावी काम से जुड़े थे, जिनका किसी वित्तीय जांच से कोई लेना-देना नहीं है।
किसका पलड़ा भारी?
कानून के जानकारों के मुताबिक, इस मामले में ED की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ED के पास PMLA कानून की धारा 67 का अधिकार है। जब तक यह साबित नहीं होता कि ED के अधिकारियों ने निजी फायदे के लिए दस्तावेज लिए, तब तक उनके खिलाफ कार्रवाई मुश्किल है। अगर ED यह साबित कर दे कि मुख्यमंत्री जांच से जुड़ी अहम फाइलें अपने साथ ले गईं तो गिरफ्तारी की आशंका भी बन सकती है। इस तरह के मामलों में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया के उदाहरण दिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री को नहीं मिलती विशेष छूट
जानकारों के मुताबिक, मुख्यमंत्री होने के नाते ममता बनर्जी को कोई संवैधानिक छूट नहीं मिली है। संविधान सरकार के मुखिया को विधानसभा के अंदर विशेषाधिकार देता है, लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं है।
गुरुवार को क्या-क्या हुआ?
ED ने सॉल्ट लेक सेक्टर-5 में I-PAC के ऑफिस और लाउडन स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा। दोपहर करीब 12 बजे ममता बनर्जी अचानक प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं। कुछ देर बाद कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा भी मौके पर पहुंचे। ममता बनर्जी करीब 20–25 मिनट अंदर रहीं और फिर हाथ में एक हरा फोल्डर लेकर बाहर आईं। बाहर आकर उन्होंने ED पर आरोप लगाया कि एजेंसी TMC के आईटी सेल और चुनावी दस्तावेज जब्त कर रही थी।
ममता का बयान
ममता बनर्जी ने कहा कि ED ने हमारी पार्टी के आईटी सेल के इंचार्ज के घर और ऑफिस पर छापा मारा। वे विधानसभा चुनाव से जुड़े उम्मीदवारों की जानकारी और हार्ड डिस्क ले जा रहे थे। मैंने ये दस्तावेज वापस ले लिए हैं। इनका किसी भी आर्थिक जांच से कोई संबंध नहीं है।

