
ग्रेटर नोएडा हादसा: युवराज की मौत पर NGT का संज्ञान, पर्यावरण उल्लंघन पर उठाए सवाल
Greater Noida accident: इस घटना ने न सिर्फ ग्रेटर नोएडा में निर्माण सुरक्षा की गंभीर खामियों को उजागर किया है, बल्कि पर्यावरणीय नियमों और नियामक लापरवाही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
NGT concern: ग्रेटर नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत ने सबको हिला कर रख दिया। पानी से भरे गड्ढे में एसयूवी के डूबने के बाद 90 मिनट तक जंग हारी जिंदगी की कहानी, केवल एक हादसा नहीं, बल्कि पर्यावरणीय उल्लंघन और निर्माण लापरवाही का बड़ा चेहरा है। इसको लेकर अब NGT ने संज्ञान लिया और सवाल उठाए कि क्या यही है हमारी शहरी विकास की हकीकत, जहां मॉल की जमीन तालाब में बदल जाती है और इंसान इसकी कीमत चुकाता है?
NGT ने कहा कि यह घटना गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन और नियामक लापरवाही की ओर इशारा करती है। NGT ने यह भी उल्लेख किया कि जिस जमीन पर हादसा हुआ, उसे मूलरूप से एक प्राइवेट मॉल प्रोजेक्ट के लिए आवंटित किया गया था। लेकिन वर्षों में यह बारिश के पानी और पास के हाउसिंग सोसायटी के गंदे पानी के कारण तालाब में बदल गया।
हादसे का विवरण
घटना 17 जनवरी की सुबह के समय हुई, जब मेहता की कार ATS Le Grandiose के पास लगभग 30 फुट गहरे पानी भरे गड्ढे में जा गिरी। उस समय घने कोहरे और कम विजिबिलिटी के कारण बचाव कार्य बहुत कठिन हो गया। पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, मेहता की मौत अस्फ़िक्सिएशन और कार्डियक फेलियर के कारण हुई। लगभग 90 मिनट तक बर्फ जैसे पानी में फंसे रहने के बाद मेहता ने अपनी कार की छत पर चढ़कर मोबाइल की टॉर्च से मदद मांगी और पिता को कॉल किया, लेकिन बचाव प्रयास असफल रहे।
रेस्क्यू ऑपरेशन
पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRF और NDRF ने बचाव अभियान चलाया। गड्ढे की गहराई, पानी और कम उपकरण के कारण बचाव कठिन रहा। एक डिलीवरी वर्कर भी मदद के लिए गड्ढे में कूदा, लेकिन उन्हें मेहता नहीं मिले। शव लगभग सुबह 4:30 बजे बरामद किया गया।
जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई
निर्माण कंपनी Wiztown Planners के निदेशक अभय कुमार को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि गड्ढा जिस कंपनी की जमीन पर था, वहां निर्माण और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ। कुमार पर लापरवाही से मौत, ह्यूमन लाइफ को खतरे में डालने और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया। FIR में यह भी कहा गया कि हादसे के स्थल पर बैरिकेड, फेंसिंग और रिफ्लेक्टर नहीं थे। ट्रैफिक प्रबंधन अधिकारी को नोटिस जारी किया गया।
SIT का गठन और जांच
उत्तर प्रदेश सरकार ने घटना के बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया। नोएडा अथॉरिटी के CEO को हटाया गया और निर्माण स्थलों की सुरक्षा निरीक्षण का आदेश दिया गया। SIT ने अब अधिकारियों, डेवलपर्स और गवाहों के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है। टीम सिविक एजेंसियों की भूमिका, रोड सेफ्टी और निर्माण व पर्यावरणीय नियमों की पालना की जांच कर रही है।
स्थानीय निवासियों की नाराजगी
निवासियों का आरोप है कि हादसे से पहले कई बार खतरे की चेतावनी दी गई, लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया। बैरिकेड केवल तब लगाए गए, जब लोगों ने मेहता के लिए न्याय की मांग में कैंडल मार्च और प्रदर्शन किया। इस घटना ने न सिर्फ ग्रेटर नोएडा में निर्माण सुरक्षा की गंभीर खामियों को उजागर किया है, बल्कि पर्यावरणीय नियमों और नियामक लापरवाही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

