
मंदिर समिति का बड़ा फैसला, बदरीनाथ-केदारनाथ में गैर-हिंदुओं की एंट्री बंद
इस फैसले को विपक्षी कांग्रेस ने आड़े हाथों लिया है और इसे भाजपा सरकार की ध्यान भटकाने की राजनीति करार दिया है।
उत्तराखंड के बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने 25 जनवरी को यह जानकारी दी और कहा कि इस संबंध में जल्द ही एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा। मंदिर समिति के अनुसार, बीकेटीसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले कुल 45 मंदिरों में गैर-हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मंदिर समिति का बयान
वरिष्ठ भाजपा नेता और बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यह कदम देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से उठाया जा रहा है, जो सर्वोपरि है। द्विवेदी ने दावा किया कि बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में गैर-हिंदुओं को प्रवेश न देने की परंपरा पहले से चली आ रही थी, लेकिन गैर-भाजपा सरकारों के कार्यकाल में इसका उल्लंघन हुआ। उन्होंने कहा कि गैर-भाजपा सरकारों के समय लंबे समय से चली आ रही परंपराओं का उल्लंघन हुआ। इन पवित्र धामों की मर्यादा बनाए रखने और सदियों पुरानी परंपराओं के सही पालन को सुनिश्चित करने के लिए अब मंदिर समिति ठोस कदम उठाएगी।
विपक्ष ने की फैसले की आलोचना
इस फैसले को विपक्षी कांग्रेस ने आड़े हाथों लिया है और इसे भाजपा सरकार की ध्यान भटकाने की राजनीति करार दिया है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि इस तरह के किसी औपचारिक प्रतिबंध की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि गैर-हिंदू वैसे भी इन मंदिरों में प्रवेश नहीं करते। भाजपा राज्य के गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।
स्थानीय विधायक का बयान
गौरतलब है कि पिछले वर्ष केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र की भाजपा विधायक आशा नौटियाल ने बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ गैर-हिंदू तत्व केदारनाथ धाम को “बदनाम” करने वाली गतिविधियों में शामिल हैं। आशा नौटियाल ने कहा था कि हाल ही में केदारनाथ यात्रा प्रबंधन को लेकर एक बैठक हुई थी। उसमें कुछ लोगों ने ऐसे मामलों का मुद्दा उठाया, जो अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं। अगर कोई भी व्यक्ति केदारनाथ धाम की छवि खराब करने का काम कर रहा है, तो ऐसे लोगों के प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि ये निश्चित रूप से गैर-हिंदू लोग हैं, जो वहां आकर ऐसी गतिविधियों में शामिल होते हैं, जिससे धाम की छवि खराब होती है। अगर इस तरह का मुद्दा उठा है तो इसमें कुछ न कुछ जरूर होगा। हम ऐसे लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग करेंगे।
बदरीनाथ धाम का कपाट खुलने की तिथि
छह महीने के शीतकालीन अवकाश के बाद बदरीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोले जाएंगे।

