क्या ईवी चार्जिंग और स्मार्ट लॉक सुरक्षित हैं? इंदौर हादसे ने उठाए सवाल
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क्या ईवी चार्जिंग और स्मार्ट लॉक सुरक्षित हैं? इंदौर हादसे ने उठाए सवाल

इंदौर में ईवी चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट से लगी आग में 8 की मौत हो गई। इस घटना ने ईवी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए।


इंदौर का पुंगलिया परिवार संपन्न परिवारों में से एक। सुख सुविधा की कोई कमी नहीं। लेकिन एक हादसे में पूरा परिवार उजड़ गया। उन्होंने सोचा नहीं होगा कि इस इलेक्ट्रिक कार को वो इस्तेमाल कर रहे थे वो उनके परिवार पर आफत बन कर टूट पड़ेगी। यह नहीं सोचा होगा कि जिस डिजिटल लॉक को उन्होंने अपने घर की हिफाजत के लिए लगवाया था वो उनके लिए तबाही की वजह बनेगा। घर के बाहर चार्जिंग पर लगी ईवी कार में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी और देखते ही देखते पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। यहां हम आपको बताएंगे कि ईवी आधारित कार और डिजिटल लॉक के खतरे क्या हैं और उससे कैसे बचा जा सकता है।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के मुताबिक पुंगलिया परिवार ने अपनी ईवी कार को रात में घर के बाहर चार्जिंग पर लगाया था और सभी सदस्य सोने चले गए थे। तड़के करीब 4 बजे चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे कार में आग भड़क उठी। शुरुआत में आग सीमित थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में उसने विकराल रूप ले लिया।

कार से उठी आग तेजी से घर के अंदर फैल गई। आग की लपटों ने घर में रखे गैस सिलेंडरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद एक के बाद एक धमाके हुए, जिससे पूरा इलाका दहल गया। विस्फोट इतना तेज था कि मकान का एक हिस्सा ढह गया। अंदर सो रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।

मृतकों और घायलों की जानकारी

इस हादसे में मकान मालिक मनोज जैन पुंगलिया (60 वर्ष) सहित कुल 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में सिमरन (30 वर्ष), विजय सेठिया, सुमन सेठिया, राशि (15 वर्ष), छोटू सेठिया और मासूम तनय शामिल हैं। वहीं सौरभ (32 वर्ष), सुनीता (58 वर्ष) और सोमिल को रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया। तनय पहले लापता बताया गया था, लेकिन बाद में उसका शव मलबे से बरामद हुआ।

ईवी चार्जिंग में आग क्यों लगती है?

इलेक्ट्रिक वाहनों में लिथियम-आयन बैटरियां होती हैं, जो अत्यधिक ऊर्जा स्टोर करती हैं। यदि चार्जिंग के दौरान किसी तरह की तकनीकी गड़बड़ी हो जाए, तो “थर्मल रनअवे” नाम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसमें बैटरी का तापमान तेजी से बढ़ता है और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।इस मामले में शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग का कारण बताया जा रहा है। संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं:

खराब या लोकल चार्जर का इस्तेमाल

ओवरचार्जिंग

वायरिंग में गड़बड़ी

चार्जिंग के दौरान वेंटिलेशन की कमी

इलेक्ट्रॉनिक लॉक क्या होता है और आग में क्यों फंस जाते हैं लोग?

आधुनिक कारों में इलेक्ट्रॉनिक लॉक सिस्टम होता है, जो बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट पर निर्भर करता है। सामान्य स्थिति में ये सिस्टम सुरक्षित और सुविधाजनक होता है, लेकिन आग या शॉर्ट सर्किट की स्थिति में यही सिस्टम खतरा बन सकता है। इस तरह के लॉक को लोग अब घरों के मुख्य दरवाजे में भी लगाते हैं।

जब आग लगती है, तो बैटरी या इलेक्ट्रॉनिक सर्किट फेल हो सकता है, दरवाजों का ऑटोमैटिक लॉक सिस्टम जाम हो सकता है,पावर सप्लाई बंद होने से दरवाजे खुलना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में अंदर फंसे लोगों के लिए बाहर निकलना बेहद कठिन हो जाता है, जैसा कि इस हादसे में भी देखने को मिला।

इस घटना पर चिंता जताते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह पूरी दुनिया के लिए सोचने वाली बात है। उन्होंने कहा हम ईवी के युग में प्रवेश कर रहे हैं। अगर ईवी चार्जिंग से इस तरह की आग लगती है, तो यह बेहद अलार्मिंग है। हमें इसकी गहराई से जांच करनी होगी। उन्होंने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि इस घटना की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाए और एक स्पष्ट एसओपी (Standard Operating Procedure) तैयार की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

ईवी सुरक्षा पर उठे सवाल

यह हादसा ऐसे समय में हुआ है, जब पूरी दुनिया पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और पर्यावरणीय चिंताओं के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बढ़ रही है। सरकारें भी ईवी को बढ़ावा दे रही हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ईवी सामान्यतः सुरक्षित होते हैं, लेकिन गलत उपयोग, खराब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा मानकों की अनदेखी से खतरे बढ़ सकते हैं।

ईवी बैटरी और चार्जिंग से जुड़े सेफ्टी टिप्स

ऐसे हादसों से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। हमेशा कंपनी द्वारा दिए गए ओरिजिनल चार्जर का इस्तेमाल करें। ओवरचार्जिंग से बचें। चार्जिंग के दौरान वाहन को खुली और हवादार जगह पर रखें। वायरिंग और चार्जिंग पॉइंट की नियमित जांच कराएं। रातभर बिना निगरानी के चार्जिंग से बचें। घर के अंदर चार्जिंग करते समय फायर सेफ्टी उपकरण रखें।

इंदौर का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। जहां एक तरफ दुनिया तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

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