
महाराष्ट्र में 2 नगर परिषदों में बीजेपी ने कांग्रेस और औवैसी से मिलाया हाथ, फडणवीस हुए आग बबूला
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बीजेपी नेताओं द्वारा कुछ सीटों पर कांग्रेस और AIMIM से गठबंधन करने पर फटकार लगाई है। उन्होंने ऐसे नेताओं पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही।
महाराष्ट्र की दो नगर परिषदों में काबिज होने के लिए बीजेपी ने कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ गठबंधन कर लिया। ये बात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बहुत नागवार गुजरी है। उन्होंने बुधवार को सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि ये स्वीकार नहीं है।
फडणवीस ने कहा,“बीजेपी कभी भी कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ गठबंधन नहीं कर सकती। ऐसे गठबंधन पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
यह बयान उस समय आया, जब हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों के बाद अंबरनाथ में बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन व्यवस्थाओं को खत्म करने के निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए हैं और इसमें शामिल नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा,“अगर किसी स्थानीय बीजेपी नेता ने बिना अनुमति इन दलों (एआईएमआईएम, कांग्रेस) के साथ गठबंधन किया है, तो यह पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
इससे पहले बुधवार को, बीजेपी ने कांग्रेस और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ के बैनर तले चुनाव बाद गठबंधन किया था, ताकि अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता बनाई जा सके। इस गठबंधन में सहयोगी शिवसेना को किनारे कर दिया गया। इसी तरह का एक गठबंधन अकौला जिले की अकोट नगर परिषद में बीजेपी और एआईएमआईएम के बीच भी बनाया गया।
फडणवीस ने स्पष्ट किया कि इन दोनों में से किसी भी गठबंधन को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी नहीं थी। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “स्थानीय नेताओं द्वारा एकतरफा लिया गया कोई भी फैसला पार्टी अनुशासन के लिहाज़ से गलत है।”
अंबरनाथ चुनाव नतीजे
इस विवाद ने महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन—जिसमें बीजेपी, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना शामिल हैं—को भी कटघरे में ला खड़ा किया है।
अंबरनाथ में 60 सदस्यीय नगर निकाय में बीजेपी–कांग्रेस–एनसीपी गठबंधन ने 31 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया, जबकि शिवसेना 27 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। बीजेपी पार्षद तेजश्री करंजुले पाटिल को परिषद अध्यक्ष चुना गया, जिन्होंने शिवसेना की मनीषा वलेकर को हराया।
विपक्ष का आरोप: बीजेपी ने ‘गठबंधन धर्म’ तोड़ा
घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने बीजेपी पर अवसरवाद का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता हथियाने के लिए बीजेपी किसी के साथ भी हाथ मिलाने को तैयार है।
शिवसेना विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने इस कदम को “गठबंधन धर्म” से विश्वासघात बताया और इसे बीजेपी के राष्ट्रीय नारे “कांग्रेस-मुक्त भारत” के भी खिलाफ करार दिया।
अकोट में बीजेपी ने एआईएमआईएम और कई अन्य दलों के समर्थन से ‘अकोट विकास मंच’ बनाया और मेयर पद पर जीत हासिल की। बीजेपी की माया ढुले को मेयर चुना गया। यह गठबंधन 13 जनवरी को होने वाले डिप्टी मेयर और समिति चुनावों से पहले जिला प्रशासन के पास औपचारिक रूप से पंजीकृत भी कराया गया।

