दिल्ली के हस्तसाल में डर-अफवाहों का साया, ईद से पहले 50% मुस्लिमों का पलायन
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दिल्ली के हस्तसाल में डर-अफवाहों का साया, ईद से पहले 50% मुस्लिमों का पलायन

दिल्ली के हस्तसाल जे जे कॉलोनी में सोशल मीडिया अफवाहों और हालिया घटना के बाद डर का माहौल है, जिससे 50% से ज्यादा मुस्लिम परिवार अस्थायी रूप से इलाके से पलायन कर चुके हैं।


Hastsal J J Colony News: अगर मुस्लिम समाज के लोग हस्तसाल के इलाके को छोड़ कर नहीं जाएं तो करें। सोशल मीडिया पर जिस तरह से ईद पर खून की होली खेले जाने की बात कही गई है, ऐसी सूरत में हमारे समाज के लोग क्या करें। आप खुद इस सवाल का जवाब दो। यह बात सच है कि हस्तला जे जे कॉलोनी में 26 साल के तरुण के साथ जो कुछ हुआ वो गलत था। जिन लोगों ने तरुण को मारा, सजा तो उनको मिलनी चाहिए। आम मुसलमान का कसूर क्या है। इस तरह का जवाब कमोबेश हस्तसाल कॉलोनी में रहने वाले मुस्लिम समाज का है। द फेडरल देश की टीम मौके पर पहुंची और यह समझने की कोशिश की क्या वास्तव में ईद से पहले मुस्लिम समाज के लोग इलाके को छोड़ रहे हैं।

हस्तसाल जे जे कॉलोनी में रहने वालों से हमारा सीधा सवाल था कि क्या सोशल मीडिया पर जो कुछ लिखा गया क्या वही वजह है। क्या ईद से पहले पीछे के वर्षों में मुस्लिम समाज के लोग इस इलाके को छोड़ कर नहीं जाते थे। इस सवाल पर बिना कैमरे पर आए ज्यादातर संख्या में महिलाओं ने कहा कि पिछले कई वर्षों से हमारे समाज के खिलाफ नफरत की जो बीज बोई गई उसका नतीजा आप देख रहे हैं। हकीकत तो यह है कि अगर हम अपनी दिक्कतों को कहते हैं तो हमें देशद्रोही करार दिया जाता है। हमारी बातों को तोड़मरोड़ कर पेश किया जाता है। हमें शक की नजरों से देखा जाता है। हम अपनी बात किससे कहें। आज हमें नेशनल मीडिया में विलेन की तरह पेश किया जा रहा है। हमारे इलाके को बदनाम किया जा रहा है।


ऐसे में सवाल था कि आखिर वो कौन लोग हैं जो बदनाम कर रहे हैं इसके जवाब में महिलाएं कहती हैं कि आप लोग इतने भोले मत बनिए। आप लोग नहीं जानते हैं कि कौन लोग बदनाम कर रहे हैं। महिलाएं कहती हैं कि जिस इलाके में इस समय आप हैं यहां हिंदू और मुस्लिम आबादी मिलीजुली संख्या है। पिछले पचास सालों से तो किसी तरह की दिक्कत नहीं थी। लेकिन एक घटना की वजह से हम सब लोगों की नजरों में दुश्मन हो गए हैं। खून की होली खेले जाने की धमकी दी जा रही है। लेकिन हमारी टीम की कोशिश थी कि कैमरे के सामने आकर कोई अपनी परेशानी और डर को बयां करें। करीब दो घंटे की मशक्क्त और समझाने के बाद कुछ लोग कैमरे पर बोलने के लिए तैयार हुए। उनमें से रियाज, रेहान और शुभम (बदले हुए नाम) ने विस्तार से पूरी बात बताई।

रियाज कहते हैं कि मुस्लिम समाज के करीब 50 फीसद लोग इस इलाके को छोड़ चुके हैं और उसके पीछे सोशल मीडिया पर खून की होली वाला पोस्ट जिम्मेदार है। अगर आप यहां कि कॉलोनी को देखें तो इससे बेहतर सांप्रदायिक सौहार्द की मिशाल आपको कहीं और देखने में नजर नहीं आएगा। अगर एक लेन में कुल 20 मकान हैं तो उनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों के मकान हैं। दोनों समाज के लोग एक दूसरे के कामकाज में सहयोग करते हैं। ऐसे में हमारा सवाल था कि इलाके को छोड़कर कौन लोग जा रहे हैं।

इस सवाल के जवाब में रेहान बताते हैं कि ज्यादातर लोग बिहार और यूपी के रहने वाले हैं। यहां छोटे मोटे काम करते हैं, वो लोग ज्यादा डरे हुए हैं, लेकिन यहां से वो लोग भी घर छोड़ कर गए हैं जो पिछले 50 साल से रह रहे थे। कहीं न कहीं लोगों के मन में सोशल मीडिया पोस्ट का डर समा गया है। इन सबके बीच शुभम कहते हैं कि चार मार्च की जो घटना हुई वो नहीं होनी चाहिए थी। उनकी उम्र करीब 55 साल है। इस कॉलोनी में कहासुनी होती थी। लेकिन लोग आपस में निपटा लेते थे। हालांकि इस समय माहौल थोड़ा तनाव वाला है। ऐसे में हमारा सवाल था कि क्या इलाके में भाइचारा कमेटी इलाके को छोड़कर जाने वालों को नहीं समझा रहीं कि आप लोग मत जाइए। इस सवाल पर शुभम कहते हैं कि यह जिम्मेदारी तो प्रशासन की होनी चाहिए। प्रशासन जो आज एक्टिव नजर आ रहा है। हमारे इलाकों की किलेबंदी कर दी गई है उससे कहीं अधिक तत्परता से सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की होती तो यह स्थिति नहीं बनती।

इस पूरे मामले को हमने उत्तमनगर जामा मस्जिद के सदर आदिल अली से समझने की कोशिश की। आदिल अली कहते हैं कि जिस तरह से पुलिस प्रशासन की तरफ सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। उसकी नौबत क्यों आन पड़ी। पुलिस के लोग सोशल मीडिया पर नफरत की बात लिखने वालों या कहने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करती। हमारा सवाल था कि कितनी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग इस इलाके को छोड़कर गए हैं, उनका जवाब था कि 50 फीसद से ऊपर। हमारा सवाल था कि आप लोग क्यों नहीं समझा पा रहे। इस सवाल पर आदिल अली कहते हैं कि समझाने की कोशिश हो रही है। लेकिन डर को आप समझ सकते हैं। जिस तरीके से पीड़ित परिवार के समर्थन में नफरत फैलाने वालों ने तकरीरें की उससे लोग और भयभीत हो गए। 50 फीसद से अधिक लोग जो इलाके को छोड़ कर गए हैं वो रोज कमाई पर निर्भर रहते हैं, उन्हें ऐसा लगने लगा कि इस समय माहौल बेहतर नहीं है, लिहाजा अपने अपने घरों के लिए चले गए।

बता दें कि चार मार्च 2026 को होली वाले दिन मृतक तरुण के घर की एक नाबालिग ने पानी से भरे गुब्बारे को एक मुस्लिम महिला पर फेंका और वहां से विवाद बढ़ गया। पीड़ित को आरोपी के परिवार से मारपीट की और उस घटना में तरुण की मौत हो गई थी। इलाके के लोग कहते हैं कि तात्कालिक वजह भले ही गुब्बारे का फेंका जान रहा हो। हकीकत में पीड़ित और आरोपी दोनों परिवारों के बीच कई वर्ष से विवाद था और उस दिन की घटना ने भयावह रूप लिया। कुछ लोगों ने उस घटना पर रोटियां सेंकी और सांप्रदायिक रंग दिया। यहीं नहीं अब जिस तरह से सोशल मीडिया पर नफरत से भरे पोस्ट किए उसके बाद मुस्लिम समाज के एक बड़े तबके में डर घर कर गया।

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