
खामेनेई विरोध प्रदर्शन: सांसद और पूर्व मेयर पर ‘भ्रामक सामग्री’ फैलाने का केस दर्ज
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के विरोध में कश्मीर घाटी में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। अब पुलिस ने श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रूहउल्ला मेहदी और पूर्व मेयर जुनैद अजीम मट्टू के खिलाफ FIR दर्ज की है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी और पूर्व श्रीनगर मेयर जुनैद अजीम मट्टू के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका-इज़राइल की संयुक्त कार्रवाई में हत्या के बाद “भ्रामक” ऑनलाइन सामग्री फैलाने में भूमिका निभाई। खामेनेई की हत्या के एक दिन बाद, रविवार (1 मार्च) को कश्मीर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। घाटी में 5 अगस्त 2019 (अनुच्छेद 370 हटने) के बाद पहली बार इतनी बड़ी तादाद में लोग सड़कों पर उतरे।
श्रीनगर में कैसे बिगड़े हालात?
खामेनेई को लेकर पहले दिन प्रदर्शन अधिकतर शांतिपूर्ण रहे। लोग शहर के केंद्र लाल चौक स्थित ऐतिहासिक घंटाघर पर इकट्ठा हुए, जहां अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ नारे लगाए गए। रमज़ान का महीना होने के कारण प्रदर्शनकारियों ने वहीं दोपहर की नमाज अदा की और खामेनेई के समर्थन में नारे लगाए।
सोमवार (2 मार्च) को कश्मीर में 2019 के बाद पहली बार ऐसा बंद देखने को मिला। यह बंद हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक के आह्वान पर हुआ था, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी समर्थन दिया था।हालांकि, सोमवार को प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते पाबंदियां लगा दीं। इसके बाद श्रीनगर-बारामूला हाईवे पर एक जगह पत्थरबाजी की घटना हुई, जिसमें पुलिसकर्मियों समेत एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल बताए गए। पिछले तीन दिनों से घंटाघर इलाके को पुलिस ने सील कर रखा है।
सांसद और पूर्व मेयर के खिलाफ कार्रवाई
पुलिस ने बयान में कहा कि उन्हें “झूठी, मनगढ़ंत और भ्रामक” सामग्री डिजिटल और सोशल मीडिया पर फैलाए जाने की पुख्ता जानकारी मिली थी। यह सामग्री डर का माहौल बनाने, शांति भंग करने और गैरकानूनी गतिविधियों को उकसाने के इरादे से फैलाई जा रही थी। इसी आधार पर रूहुल्लाह और मट्टू के खिलाफ कार्रवाई की गई।
आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता हैं और धार्मिक नेता के रूप में घाटी के मुसलमानों, खासकर शिया समुदाय (जिसकी संख्या लगभग 15 लाख है) पर उनका खासा प्रभाव माना जाता है। वहीं, जुनैद अजीम मट्टू श्रीनगर के पूर्व मेयर और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता हैं। दोनों नेताओं ने 2 मार्च को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की निंदा की।
मेहदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें महिला प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प दिखाई दे रही थी। वहीं मट्टू ने लिखा, “शोक और दर्द में डूबे लोगों की भावनाओं का हर हाल में सम्मान होना चाहिए। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग का कोई नैतिक औचित्य नहीं है।”
पुलिस ने अपने बयान में कहा कि जो सामग्री साझा की गई, वह पहली नजर में तोड़ी-मरोड़ी गई बातों और अपुष्ट जानकारी पर आधारित है, जिससे जन असंतोष और सामाजिक अशांति फैल सकती है। पुलिस ने यह भी कहा कि गलत जानकारी फैलाने की ऐसी कोशिशें शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं। इसी आधार पर साइबर पुलिस स्टेशन, श्रीनगर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 197(1)(d) और 353(1)(b) के तहत एफआईआर संख्या 02/2026 और 03/2026 दर्ज की गई है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रूहुल्लाह ने कहा, “ये मूर्खतापूर्ण हरकतें मुझे नहीं रोक पाएंगी।” रूहुल्लाह और मट्टू दोनों ने कड़े बयान जारी करते हुए कहा कि वे भारत के नागरिक हैं और यह कार्रवाई उन्हें मानवता के लिए आवाज उठाने से नहीं रोक सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी सुरक्षा घटा दी गई है या वापस ले ली गई है।
अपने बयान में रूहुल्लाह ने कहा, “जम्मू-कश्मीर पुलिस और प्रशासन के कुछ लोग सोचते हैं कि मेरी सुरक्षा कम या खत्म कर देने और मेरा फेसबुक अकाउंट सस्पेंड कर देने से मैं उनकी ज्यादतियों के खिलाफ बोलना बंद कर दूंगा। यह हंसी की बात है। न तो मुझे इन छोटी चीजों का शौक है और न ही इनके बिना मुझे डर लगता है। मेरे पिता अपने लोगों के लिए खड़े रहते हुए शहीद हुए थे। वही मुझे प्रेरित करता है। वही मेरा रास्ता है।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं इस देश का नागरिक हूं और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए आपके अत्याचार, कानूनों के उल्लंघन, आजादी और लोकतंत्र के खिलाफ आखिरी बूंद तक आवाज उठाऊंगा। जो कुछ आपके पास बचा है, कर लीजिए। ये मूर्खतापूर्ण हरकतें मुझे नहीं रोक सकतीं।”
मट्टू ने कहा, “ईरान और अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई की शहादत पर मेरे बयानों और ईरान पर अमेरिका-इज़राइल के हमले को लेकर भाजपा सरकार की चुप्पी की आलोचना करने के कारण मेरी सुरक्षा तुरंत प्रभाव से हटा दी गई है। यह मुझे चुप कराने की कोशिश है।”
उन्होंने कहा कि आज के समय में एक मुख्यधारा के कश्मीरी नेता को या तो इज़राइल द्वारा की जा रही हत्याओं और एक राष्ट्राध्यक्ष की हत्या पर शर्मनाक चुप्पी साधनी पड़ती है, या फिर “नए भारत” में परिणाम भुगतने पड़ते हैं। या फिर आपको शोक मना रहे लोगों को उपदेश देते हुए प्रशासन और पुलिस की तारीफ करनी पड़ती है। माफ कीजिए, मैं इनमें से कोई भी काम नहीं कर सकता,” मट्टू ने कहा।
उन्होंने आगे कहा, “आज के कश्मीर में, जहां कई मुख्यधारा के नेता भाजपा सरकार के सामने झुक चुके हैं और अयातुल्लाह खामेनेई की हत्या तथा ईरान-फिलिस्तीन पर युद्ध के मुद्दे पर कूटनीतिक भाषा बोल रहे हैं, मैं अंतरात्मा रखने का ‘अपराध’ करता रहूंगा।”
“हम पाकिस्तान नहीं हैं”: मट्टू
मट्टू ने कहा, “मैं विनम्रता के साथ इस फैसले को स्वीकार करता हूं। मुझे अधिकारियों की मजबूरी समझ में आती है। लेकिन मेरी आवाज दबाने की ये कोशिशें मुझे मानवता, न्याय और ईरान के मुद्दे पर अपने देश और नेतृत्व की नैतिक चुप्पी पर सवाल उठाने से नहीं रोकेंगी।”
उन्होंने कहा कि कश्मीर में कई मीडिया अकाउंट्स को सोशल मीडिया पर रोक दिया गया है और खामेनेई की शहादत पर हो रहे जन शोक को कवर न करने का दबाव है। “मैं मांग करता हूं कि मीडिया पर लगी ये पाबंदियां तुरंत हटाई जाएं। हम भारत में रहते हैं, इज़राइल में नहीं। हमारे संस्थानों को कानून और अभिव्यक्ति की आज़ादी की रक्षा करनी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “भाजपा के विचार संविधान से ऊपर नहीं हैं, भले ही उन्होंने अभी भारत की गुटनिरपेक्ष विदेश नीति को नजरअंदाज कर दिया हो। हमारे संस्थान विदेशी शक्तियों को खुश करने के लिए अपने ही नागरिकों की भावनाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नहीं दबा सकते।” अंत में मट्टू ने कहा, “हम पाकिस्तान नहीं हैं।”

