नदियों के बीच सूखा, कर्नाटक के नंदी हिल्स की अनसुनी कहानी
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नदियों के बीच सूखा, कर्नाटक के नंदी हिल्स की अनसुनी कहानी

पांच नदियों के उद्गम के बावजूद कर्नाटक में नंदी हिल्स के आसपास के जिले भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं, जहां खराब प्रबंधन और विवादों ने पानी को संकट बना दिया है।


कर्नाटक के नंदी हिल्स के आसपास स्थित चिक्कबल्लापुर, कोलार और बेंगलुरु ग्रामीण—ये तीनों जिले आज भी भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। यह स्थिति तब और विडंबनापूर्ण हो जाती है, जब यही क्षेत्र दक्षिण पिनाकिनी, उत्तर पिनाकिनी, अर्कावती, चित्रावती और पालार जैसी पाँच अहम नदियों का उद्गम स्थल है। इन नदियों का पानी तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे पड़ोसी राज्यों में बह जाता है, जबकि पानी से समृद्ध इस बेल्ट के स्थानीय समुदाय लगातार बढ़ते सूखे की मार झेल रहे हैं।

नंदी हिल्स क्षेत्र में पाँच नदियों के संगम के बावजूद जारी जल संकट का सबसे बड़ा खामियाजा स्थानीय किसानों को उठाना पड़ रहा है। अंगूर, रेशम और बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसान, नदियों के पास होने के बावजूद, सिंचाई के लिए पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं।

जल-समृद्ध क्षेत्र का विरोधाभास

इस क्षेत्र में सिंचाई और पीने के पानी की कमी, अपने आप में एक गहरा विरोधाभास है। स्थिति को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि ये नदियां अंतर-राज्यीय जल विवादों के केंद्र में भी रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

नदियों का मार्ग और उनका महत्व

नंदी हिल्स क्षेत्र से निकलने वाली इन पांचों नदियों का ऐतिहासिक महत्व रहा है, लेकिन कमजोर संरक्षण और खराब प्रबंधन ने इन्हें बदहाल स्थिति में पहुँचा दिया है।

अर्कावती नदी

अर्कावती बेंगलुरु ग्रामीण, बेंगलुरु शहर, मगडी, रामनगरम और कनकपुरा से होकर तमिलनाडु में प्रवेश करती है। यह नदी कभी हेसरघट्टा झील और थिप्पगोंडनहल्ली जलाशय के ज़रिये बेंगलुरु को पीने का पानी उपलब्ध कराती थी। लेकिन अब प्रदूषण के कारण इसका पानी उपयोग के लायक नहीं रह गया है।

उत्तर पिनाकिनी नदी

उत्तर पिनाकिनी नदी चिक्कबल्लापुर, कोलार और तुमकुरु जिलों से होकर पूर्व दिशा में बहती है और आंध्र प्रदेश में प्रवेश करती है। मंजनहल्ली और गौरीबिदनूर जैसे इलाकों में यह सीमित सिंचाई का सहारा देती है, लेकिन इसका अधिकांश पानी दूसरे राज्यों की ओर मोड़ दिया जाता है।

दक्षिण पिनाकिनी नदी

यह नदी बेंगलुरु ग्रामीण जिले से बहते हुए तमिलनाडु में प्रवेश करती है। होसुर और कृष्णगिरि जैसे क्षेत्रों से गुजरते हुए यह बंगाल की खाड़ी में मिलती है। नदी के अधिकांश मार्ग के किनारे झीलें हैं, जो औद्योगिक कचरे के कारण बुरी तरह प्रदूषित हो चुकी हैं।

चित्रावती नदी

चित्रावती नदी आंध्र प्रदेश में पुट्टापर्थी और अनंतपुर के पास राज्य में प्रवेश करती है और कडप्पा के पास उत्तर पिनाकिनी में मिल जाती है। इस नदी पर चित्रावती बैलेंसिंग रिज़र्वायर स्थित है, जो एक अहम जल भंडारण परियोजना है।

पालार नदी

पालार नदी चिक्कबल्लापुर और कोलार से होकर दक्षिण-पूर्व दिशा में बहती है, फिर आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से गुजरते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है। अपने महत्व के बावजूद, खराब संरक्षण और प्रबंधन के कारण इसका प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

खराब जल प्रबंधन की मार

अगर इन पाँचों नदियों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया गया होता, तो ये अपने मार्ग में आने वाले सैकड़ों गांवों को पानी उपलब्ध करा सकती थीं। मानसून के दौरान रणनीतिक रूप से बांध बनाकर और पानी का कुशल भंडारण करके, साल भर सिंचाई और पीने के पानी की जरूरतें पूरी की जा सकती थीं।

बेंगलुरु दक्षिण, कोलार और चिक्कबल्लापुर की कृषि भूमि रेशम, फूलों और बागवानी फसलों के लिए भरपूर पानी से फल-फूल सकती थी। लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण ये नदियाँ लगभग अनुपयोगी बनी हुई हैं। पानी पड़ोसी राज्यों की ओर बह जाता है और स्थानीय क्षेत्र स्थायी जल संकट से जूझते रहते हैं।

2021 से 2023 के बीच कोलार और चिक्कबल्लापुर जिलों में 120 टीएमसी (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) से अधिक वर्षा जल प्राप्त हुआ, इसके बावजूद इस पानी को सहेजने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। औसत से अधिक बारिश के बावजूद, जल संरक्षण की कोई गंभीर पहल नहीं हुई, जिससे ये जिले लगातार सूखे की स्थिति में फंसे हुए हैं।

अंतर-राज्यीय जल विवाद

दक्षिण पिनाकिनी (जिसे तमिलनाडु में पेन्नार कहा जाता है) कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कानूनी विवाद का कारण बनी हुई है। कोलार के यारागोल में बांध बनाने की कर्नाटक की योजना पर तमिलनाडु ने आपत्ति जताई है, उसका कहना है कि इससे नदी का प्रवाह बदलेगा और उनके हिस्से के पानी पर असर पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद के समाधान के लिए जल विवाद न्यायाधिकरण गठित करने का निर्देश दिया है, लेकिन कर्नाटक की ओर से ठोस रुख न अपनाए जाने पर राज्य के जल अधिकारों की रक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर, तमिलनाडु लगातार न्यायाधिकरण गठन की मांग कर रहा है।

तात्कालिक कार्रवाई की जरूरत

जल नीति विशेषज्ञ आर रंगास्वामी का कहना है कि कर्नाटक को इस संकट से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे। इन नदियों में विशाल कृषि क्षेत्रों को पानी देने की क्षमता है, लेकिन खराब योजना और प्रबंधन के कारण ये क्षमता बेकार जा रही है। प्रभावी जल भंडारण और बेहतर प्रबंधन से राज्य के शुष्क क्षेत्रों की तस्वीर बदली जा सकती है, लेकिन सरकार अब तक कोई दीर्घकालिक समाधान लागू नहीं कर पाई है।

राज्य अब भी मौसमी बारिश के भरोसे है। यदि समय रहते ठोस हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो ये जिले लगातार इसके दुष्परिणाम झेलते रहेंगे। कर्नाटक सरकार को अपने जल संसाधनों के और क्षरण को रोकने के लिए तेज़ और निर्णायक कदम उठाने होंगे, वरना आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।

(यह लेख मूल रूप से द फेडरल कर्नाटक में प्रकाशित हुआ था।)

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