
CBI से CBFC तक: क्या विजय पर कसता जा रहा है शिकंजा? टॉकिंग सेंस विद श्रीनी
श्रीनिवासन ने कहा कि एक्टर-पॉलिटिशियन से पूछताछ और जना नायगन फिल्म सर्टिफिकेशन में देरी तमिलनाडु चुनावों से पहले बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत देती है।
तमिलनाडु की राजनीति में बदलते समीकरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। 41 लोगों की जान लेने वाली करूर भगदड़ मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा अभिनेता से नेता बने विजय को दिल्ली बुलाकर पूछताछ किए जाने के फैसले ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उठाए गए इस कदम के समय और मंशा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। 'द फेडरल' के एडिटर-इन-चीफ एस श्रीनिवासन ने कार्यक्रम 'Talking Sense with Srini' में कहा कि विजय से पूछताछ करना कानून के दायरे में है, लेकिन इसे जिस तरीके और समय पर किया गया, वह राजनीतिक संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि कानून में ऐसा कोई नियम नहीं है कि पूछताछ तमिलनाडु में ही हो या दिल्ली में। यह पूरी तरह जांच अधिकारी के विवेक पर निर्भर करता है। लेकिन जब समय और जगह दोनों को साथ देखा जाए तो राजनीतिक संकेतों को नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाता है।
चुनाव से पहले माहौल
श्रीनिवासन के मुताबिक, चुनाव में अब सिर्फ दो महीने बचे हैं और तमिलनाडु में इस बार का प्री-पोल माहौल असामान्य रूप से अस्थिर है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर यहां चुनाव में डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीधी टक्कर होती है। लेकिन इस बार वह स्पष्टता नहीं दिख रही। दोनों ही खेमों में गठबंधन अभी तय नहीं हुए हैं।
विजय की एंट्री से बदली तस्वीर
विजय की राजनीति में एंट्री ने हालात और जटिल बना दिए हैं। श्रीनिवासन का कहना है कि जो मुकाबला दो ध्रुवों का माना जा रहा था, वह अब तीन-तरफा लड़ाई में बदल सकता है। उन्होंने विजय को अभी तक परखे न गए, लेकिन सियासी तौर पर हलचल पैदा करने वाले नेता के रूप में बताया, जिनकी मौजूदगी ने स्थापित पार्टियों को अपनी रणनीति दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है।
करूर भगदड़ केस में देरी पर सवाल
करूर भगदड़ मामले को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। श्रीनिवासन ने कहा कि घटना को लगभग 100 दिन हो चुके हैं। अब अचानक कार्रवाई क्यों और विजय को दिल्ली क्यों बुलाया गया? उन्होंने इसकी तुलना राजीव गांधी हत्याकांड से की, जिसकी जांच तमिलनाडु में ही हुई थी, जबकि उसका राष्ट्रीय सुरक्षा से कहीं ज्यादा बड़ा जुड़ाव था।
‘जना नायकन’ विवाद ने बढ़ाया सियासी तापमान
विवाद तब और बढ़ गया, जब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने विजय की आने वाली फिल्म 'जना नायकन' को मंजूरी देने से इनकार कर दिया, जबकि निर्माता सुझाए गए बदलाव करने पर सहमत थे। श्रीनिवासन ने कहा कि अब आरोप लग रहे हैं कि सिर्फ जांच एजेंसियां ही नहीं, बल्कि CBFC जैसे नियामक संस्थानों का भी दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बयानों का हवाला दिया।
तमिलनाडु की राजनीति का केंद्र बनते विजय
इन सभी घटनाओं को जोड़ते हुए श्रीनिवासन ने कहा कि पूछताछ, फिल्म प्रमाणन विवाद और गठबंधन की अनिश्चितता—तीनों बातें इस ओर इशारा करती हैं कि विजय तमिलनाडु की राजनीति के केंद्र में आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह अभी साफ नहीं है कि विजय सिर्फ एक डिसरप्टर साबित होंगे या गंभीर दावेदार बनेंगे। लेकिन इतना तय है कि राज्य की राजनीति की बातचीत अब उनके इर्द-गिर्द घूमने लगी है।

