
सोशल मीडिया की लत पर सख्त रुख, गोवा सरकार की बड़ी तैयारी
मोबाइल और सोशल मीडिया की बढ़ती लत बच्चों की मानसिक सेहत पर असर डाल रही है। इसे देखते हुए गोवा सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सख्त कदम उठाने पर विचार कर रही है।
इसमें दो मत नहीं कि मोबाइल और सोशल मीडिया हर किसी की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हालत ये है कि अगर किसी कमरे में दो चार लोग एक साथ मौजूद हों तो वो आपस में बातचीत कम करते हैं, उंगलिया, मोबाइल के कीपैड पर अधिक चलती हैं। खासतौर से बच्चों को लत पड़ चुकी है। अब इस संबंध में गोवा सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के संबंध में कड़ा कदम उठाने के बारे में सोच रही है।
गोवा सरकार के मुताबिक बच्चे 24 घंटे में ज्यादातर समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर व्यतीत कर रहे हैं। उसका असर आंखों, नींद पर नजर आ रहा है। इसके अलावा बच्चे गलत वीडियो, गलत बातों और गलत लोगों की संगत में आ रहे हैं या उसकी संभावना बढ़ जाती है। साइबर बुलिंग के मामले भी तेजी से बढ़े हैं लिहाजा सरकार सोच रही है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि बच्चे सोशल मीडिया से दूर रहे।
ऑस्ट्रेलिया में पहले से पाबंदी
अगर देश से बाहर की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल के कम उम्र के बच्चों के लिए पहले ही सख्त नियम बना रखे हैं। ऑस्ट्रेलिया में बच्चे इंस्टाग्राम, फेसबुक और टिकटॉक के इस्तेमाल की मनाही है।
सोशल मीडिया का नकारात्मक असर
सोशल मीडिया की वजह से मानसिक सेहत पर पड़ रहा है। घंटों स्क्रीन देखने से तनाव, चिड़चिड़ापन और अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया पर दिखने वाली बेहतर जिंदगी की तस्वीरें बच्चों में हीन भावना और आत्मविश्वास की कमी पैदा कर रही हैं। लाइक और कमेंट की चाह धीरे-धीरे लत में बदल जाती है, जिसकी वजह से एक शख्स दूसरों से तुलना करने लगता है।
शारीरिक सेहत पर भी इसका नकारात्मक असर साफ दिखता है। देर तक मोबाइल इस्तेमाल करने से आंखों में जलन, सिरदर्द और नींद की कमी की समस्या बढ़ रही है। लगातार बैठकर मोबाइल चलाने से शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे मोटापा और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

