तेलंगाना में महाराष्ट्र से आए 5 बाघों के चलते हाई अलर्ट, वन विभाग ने बढ़ाई सतर्कता
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तेलंगाना में महाराष्ट्र से आए 5 बाघों के चलते हाई अलर्ट, वन विभाग ने बढ़ाई सतर्कता

बाघों की गतिविधियों के बढ़ने के कारण वन विभाग ने पेट्रोलिंग बढ़ा दी है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि लाल रंग के कपड़े न पहनें, समूह में रहें, रात में जंगल में न जाएँ और बाघ दिखाई देने पर अलार्म बजाएं।


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तेलंगाना के वन विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया है, क्योंकि पड़ोसी महाराष्ट्र से 5 बाघ गोदावरी और पेंगंगा नदियों को पार कर राज्य के जंगलों में प्रवेश कर गए हैं। यह अलर्ट कावल, सिद्धिपेट और जगतियाल सहित कई क्षेत्रों में जारी किया गया है। वन अधिकारियों का कहना है कि आदिलाबाद, कोमारम भीम असीफाबाद, मुलुगु, करीमनगर और जगतियाल जिलों में बाघों की गतिविधियां बढ़ गई हैं, जिसके चलते वन और वन्यजीव टीमों की निगरानी भी कड़ी कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि महाराष्ट्र के अभयारण्यों में बाघों की संख्या बढ़ने और आवास क्षेत्र सिकुड़ने के कारण ये बाघ कावल टाइगर रिजर्व में आवास की तलाश में आए हैं। हाल ही में जन्नाराम वन प्रभाग में बाघों की हरकतें दर्ज की गई हैं।

मंचेरियल, चेनूर और सिंगरेनी ओपन-कास्ट खदान क्षेत्रों के ग्रामीणों ने पांच बाघों को देखा है। अधिकारियों ने उनके रास्ते का पता महाराष्ट्र के ताडोबा रिज़र्व से करजली जंगलों के कागज़नगर प्रभाग होते हुए कावल तक लगाया। तेलंगाना वन्यजीव विभाग के अधिकारी अंजनेयुलु ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र के टिप्पेश्वर टाइगर रिजर्व के बाघ भी आवास की तलाश में कावल में प्रवेश कर गए हैं, जिससे इलाके में बाघों की संख्या बढ़ गई है। पांच बाघों के प्रवेश के बाद कावल टाइगर रिजर्व में टाइगर सेल ने निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने कहा कि महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और झारखंड के रिज़र्व में बाघों की बढ़ती संख्या उपलब्ध आवास पर दबाव डाल रही है, जिससे कुछ बाघ अपने क्षेत्र, पानी और शिकार की तलाश में बाहर आ रहे हैं।

हमलों का डर

पिछले कुछ हफ्तों में कई जिलों में बाघों की sightings बढ़ी हैं। 30 दिसंबर 2025 को भूपालपल्ली जिले में एक बाघ ने बैल मारा और कई पास के मंडलों में देखा गया। 26 दिसंबर को सिद्धिपेट और 31 दिसंबर को करीमनगर के गांवों में पंजों के निशान मिलने की रिपोर्ट आई। इसके बाद राजन्ना सर्किला, पेड्डापल्ली, जगतियाल और आदिलाबाद जिलों में भी sightings दर्ज की गईं। cotton fields में बाघों की उपस्थिति के कारण किसानों को सलाह दी गई है कि वे अकेले बाहर न निकलें। इसके अलावा कोमारम भीम असीफाबाद जिले के जंगलों में भी बाघों की गतिविधियां दर्ज की गईं हैं, जिससे अलर्ट क्षेत्र और बढ़ गया है।

इतिहास में इस इलाके में बाघ हमलों से जान माल की हानि हो चुकी है। 11 नवंबर 2020 को दहेगांव मंडल के डिगिडी गांव में एक व्यक्ति का मछली पकड़ते समय बाघ ने शिकार किया। 29 नवंबर 2020 को पेंचीकल्पेट मंडल के कोन्दपल्ली गांव में एक महिला और 29 नवंबर, 2024 को कागजनगर मंडल के गन्नाराम गांव में एक और महिला की बाघ ने हत्या कर दी।

वन विभाग की सतर्कता और सलाह

बाघों की गतिविधियों के बढ़ने के कारण वन विभाग ने पेट्रोलिंग बढ़ा दी है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि लाल रंग के कपड़े न पहनें, समूह में रहें, रात में जंगल में न जाएँ और बाघ दिखाई देने पर अलार्म बजाएं। अधिकारियों ने बताया कि मोर या अन्य पक्षियों की मृत अवस्था अक्सर बाघ की मौजूदगी का संकेत देती है। इसके अलावा किसी भी तरह के जाल, जहरीले उपकरण या इलेक्ट्रिक फ़ेंसिंग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तेलंगाना टाइगर सेल ने महाराष्ट्र से आए पांच बाघों की निगरानी के लिए आधुनिक ई-सर्विलांस और जंगल में कैमरा ट्रैप लगाए हैं, जिनका नियंत्रण हैदराबाद स्थित कंट्रोल सेंटर से किया जा रहा है।

बाघों के लिए आवास

कावल के मुख्य क्षेत्र में बसे मैसामपेट और रामपुर गांवों के निवासियों को काडेम क्षेत्र में पुनर्वासित किया गया, ताकि बाघों के लिए सुरक्षित आवास क्षेत्र बनाया जा सके। कैमरा ट्रैप और जंगल चेक-पॉइंट्स बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने और शिकार को रोकने के लिए लगाए गए हैं। बाघों के लिए बड़े जंगल, पर्याप्त शिकार, पानी और आश्रय आवश्यक हैं। 2021 की बाघ जनगणना के अनुसार कावल के कागज़नगर वन प्रभाग में आठ बाघ महाराष्ट्र के ताडोबा और टिप्पेश्वर रिज़र्व से आए थे।

प्रोजेक्ट टाइगर के तहत पुनर्वास

महाराष्ट्र के ताडोबा, टिप्पेश्वर और कदम्बा रिज़र्व में बाघों की संख्या बढ़ गई है। ताडोबा में लगभग 50 और इंद्रावती नेशनल पार्क में 35 बाघ अनुमानित हैं। तेलंगाना वन विभाग ने महाराष्ट्र के बाघों को कावल में लाने का प्रस्ताव दिया, जिसे महाराष्ट्र सरकार और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने मंजूरी दे दी। तैयारी जारी है। कावल टाइगर रिज़र्व, जो पहले आदिलाबाद जिले में था, 2,015.44 वर्ग किमी में फैला है, जिसमें 892.23 वर्ग किमी मुख्य क्षेत्र और 1,123.21 वर्ग किमी बफर क्षेत्र शामिल है। यहाँ शिकार, पानी और घना जंगल पर्याप्त है।

19 जनवरी से बाघ गिनती

राष्ट्रीय बाघ गणना के तहत कावल टाइगर रिजर्व में 19 से 26 जनवरी तक गणना की जाएगी। पहले तीन दिन मांसाहारी और उसके बाद शाकाहारी पशुओं की गिनती की जाएगी, जिसमें पंजों के निशान, मल, बाल और कैमरा ट्रैप का इस्तेमाल किया जाएगा। वन अधिकारियों का कहना है कि पड़ोसी राज्यों से बाघों का आगमन तेलंगाना में जैव विविधता के लिए लाभकारी है, जबकि सुरक्षा और संरक्षण उपाय भी कड़े किए जा रहे हैं।

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