हिमाचल में एंट्री अब और महंगी, 1 अप्रैल से चुकाना होगा ज्यादा टोल टैक्स
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हिमाचल में एंट्री अब और महंगी, 1 अप्रैल से चुकाना होगा ज्यादा टोल टैक्स

वित्तीय संकट से जूझ रही हिमाचल सरकार ने टोल टैक्स दरों में 130 रुपये तक की वृद्धि की। 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी नई दरें, कार और भारी वाहनों के लिए बढ़े दाम।


Himachal Pradesh Government : हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने प्रदेश के टोल बैरियरों पर टैक्स की दरों में बड़ी बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। भारी वित्तीय घाटे और आर्थिक तंगी से जूझ रही राज्य सरकार ने अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए यह सख्त कदम उठाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जारी अधिसूचना के अनुसार, टोल शुल्क में 30 रुपये से लेकर 130 रुपये तक का इजाफा किया गया है। ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में लागू हो जाएंगी। हिमाचल प्रदेश टोल्स एक्ट 1975 के तहत किए गए इस बदलाव का असर निजी और वाणिज्यिक दोनों तरह के वाहनों पर पड़ेगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य की खाली तिजोरी को भरना और लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज के बोझ को कम करने के लिए सरकार आने वाले समय में कुछ और कड़े फैसले ले सकती है। इस अधिसूचना के बाद अब पर्यटकों और स्थानीय माल ढुलाई करने वालों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी।


खाली खजाना भरने के लिए नई रणनीतियां

हिमाचल प्रदेश सरकार वर्तमान में गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है। राज्य पर बढ़ते कर्ज और सीमित आय के साधनों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। अपनी आर्थिक हालत सुधारने के लिए सरकार अब अलग-अलग नीतियां तैयार कर रही है। टोल टैक्स में बढ़ोतरी इसी रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का ध्यान अब उन क्षेत्रों पर है जहाँ से अतिरिक्त राजस्व जुटाया जा सके। इसके लिए आबकारी नीति, बिजली उपकर और अब परिवहन कर में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।


वाहनों की नई टोल दरें एक नजर में

अधिसूचना के अनुसार, अब कार, जीप और वैन जैसे हल्के वाहनों के लिए प्रतिदिन 170 रुपये टोल देना होगा। यात्री वाहनों में 12+1 क्षमता वालों के लिए 130 रुपये और मिनी बसों के लिए 320 रुपये शुल्क तय किया गया है। 32+1 से अधिक क्षमता वाली बसों के लिए 200 रुपये का भुगतान अनिवार्य होगा। भारी निर्माण मशीनरी और मल्टी-एक्सल वाहनों के लिए यह दर 800 रुपये तक पहुँच गई है। वहीं, 60,000 किलोग्राम से अधिक वजन वाले वाहनों पर 900 रुपये का भारी भरकम टोल लगेगा।


आर्थिक सुधारों की दिशा में कड़े कदम

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले ही संकेत दे चुके हैं कि राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कड़े फैसले जरूरी हैं। सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में वित्तीय घाटे को कम करना है। इसके लिए फिजूलखर्ची रोकने के साथ-साथ आय के नए स्रोत विकसित किए जा रहे हैं। टोल टैक्स में यह वृद्धि सीधे तौर पर राज्य के खजाने में करोड़ों रुपये का अतिरिक्त योगदान देगी। हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर सकता है, लेकिन आर्थिक स्थिति को देखते हुए इसे अपरिहार्य माना जा रहा है।


स्थानीय निवासियों और ट्रैक्टर मालिकों को राहत

बढ़ोतरी के बीच सरकार ने कुछ वर्गों को मामूली राहत देने की कोशिश भी की है। बैरियर के आसपास रहने वाले निजी वाहन मालिकों के लिए प्रतिदिन का शुल्क 100 रुपये रखा गया है। कमर्शियल परमिट वाले ट्रैक्टरों के लिए 100 रुपये और ऑटो-स्कूटर रिक्शा के लिए केवल 30 रुपये तय किए गए हैं। दो एक्सल वाले ट्रक और बसों के पुराने शुल्क (570 रुपये) में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे माल ढुलाई की लागत पर बहुत बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है।


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