
ताजमहल में शाहजहाँ के उर्स के आयोजन पर विवाद बढ़ा, प्रशासन अलर्ट
हिंदूवादी संगठन लंबे समय से इस बात की माँग कर रहे हैं कि ताजमहल को 'तेजो महालय’ कहा जाए।अब 15-17 जनवरी तक होने वाले शाहजहाँ के उर्स को लेकर विवाद गहरा गया है। संगठनों का कहना है कि ताजमहल में किसी धार्मिक आयोजन के लिए कोई मुगलकालीन या ब्रिटिशकालीन आदेश उपलब्ध नहीं हैं।
Hindu Mahasabha opposes Shah Jahan’s Urs at Taj Mahal : उत्तर प्रदेश के आगरा में विश्व प्रसिद्ध ताजमहल में विवाद बढ़ गया है।15 से 17 जनवरी तक शाहजहाँ के उर्स के आयोजन का हिंदूवादी संगठनों ने विरोध करते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है।उनका कहना है कि एएसआई संरक्षित किसी इमारत में इस तरह के धार्मिक आयोजन की इजाज़त नहीं देनी चाहिए।इस बीच उर्स की तैयारी को लेकर आयोजक खुद्दाम ए रोज़ा कमेटी के साथ पुलिस और प्रशासन के प्रतिनिधियों ने बैठक की।इस विवाद को देखते हुए प्रशासन सतर्क है।मामले की अदालत में सुनवाई 15 जनवरी को ही होनी है।
हिंदू संगठनों का दावा-उर्स के लिए कोई मुगलकालीन या ब्रिटिशकालीन आदेश नहीं-
विश्व प्रसिद्ध ताज महल में मुगल बादशाह शाहजहाँ के 371वें उर्स (मृत्यु तिथि) को लेकर एक बार फिर विवाद गरमा गया है।यह तीन दिवसीय उर्स 15, 16 और 17 जनवरी को आयोजित किया जाएगा और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इस अवसर पर पर्यटकों के लिए बड़ी राहत देते हुए इन तीन दिनों में ताजमहल में फ्री एंट्री की घोषणा भी कर दी है।लेकिन इस बीच हिंदू संगठनों और अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने इस उर्स आयोजन का विरोध किया है। संगठन का दावा है कि ताजमहल एक एएसआई (ASI) संरक्षित इमारत है और ऐसी इमारत में किसी भी तरह के धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।हिंदूवादी संगठनों का कहना है कि पहले जन सूचना अधिकार( RTI) के तहत आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से इसके पुराने समय के किसी आदेश की जानकारी माँगी गई थी।उस समय यह स्पष्ट हो गया था कि ताजमहल में उर्स या किसी भी तरह के धार्मिक आयोजन का कोई लिखित मुगलकालीन या ब्रिटिशकालीन आदेश नहीं है।
मामले की कोर्ट में सुनवाई 15 जनवरी को-
इसके अलावा हिंदू महासभा ने पुराने विवाद का हवाला देते हुए यह भी कहा है कि ताजमहल वास्तव में 'तेजोमहालय’ (भगवान शिव का मंदिर) है और यहां मुस्लिम धार्मिक आयोजन (जैसे चादरपोशी, कव्वाली आदि) होने से हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचती है।उन्होंने ASI के आगरा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपा जिसमें कई कार्यकर्ता भगवान शिव की वेशभूषा में दिखे।इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान कई पोस्टर भी लगाये गए जिससे तनाव बढ़ गया।दरअसल यह विवाद नया नहीं है। अखिल भारत हिंदू महासभा और दूसरे हिंदू संगठन पहले भी ताजमहल को तेजो महालय बताकर कई बार यहाँ होने वाले आयोजनों का विरोध करते रहे हैं। फ़िलहाल आगरा कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी होनी है।
विरोध को देखते हुए प्रशासन अलर्ट, तीन दिन होगी फ्री एंट्री-
उर्स से पहले हुए इस विरोध के बाद से विवाद गहरा गया है।हिन्दुवादी संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर उर्स का आयोजन हुआ तो वो ताजमहल में 'शिव तांडव’ का पाठ करेंगे।इसके बाद से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।हिंदू संगठनों ने उर्स को ASI नियमों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी उल्लंघन बताते हुए तत्काल रद्द करने की मांग की है।इस विवाद के मद्देनजर प्रशासन ने ताजमहल परिसर में सुरक्षा कड़ी कर दी है।इधर कई इतिहासकार इसे सदियों पुरानी परंपरा बताते हुए विरोध पर सवाल उठा रहे हैं।
इस बीच उर्स की तैयारी करते हुए प्रशासन ने आयोजन करने वाले खुद्दाम ए रोज़ा कमेटी के साथ बैठक की है।पुरातत्व विभाग ने उर्स के दौरान तीन दिन तक ताजमहल में फ्री एंट्री की अनुमति दी है। विशेष रूप से पर्यटक शाहजहां और मुमताज़ महल की असली कब्र (तहखाने में) भी देख सकेंगे जो सामान्य दिनों में बंद रहती हैं। उर्स के अंतिम दिन (17 जनवरी) को चादर पोशी होगी।प्रशासन ने ताजगंज और आस- पास सतर्कता बढ़ा दी है।दरअसल यह विवाद नया नहीं है। अखिल भारत हिंदू महासभा और दूसरे हिंदू संगठन पहले भी ताजमहल को तेजो महालय बताकर कई बार यहाँ होने वाले आयोजनों का विरोध करते रहे हैं। फ़िलहाल आगरा कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई उर्स के पहले दिन 15 जनवरी होनी है।

