क्रांतिकारी भगत सिंह का बम कांड और सीएम रेखा गुप्ता का इतिहास ज्ञान
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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता 6 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली में विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान बोलते हुए। (चित्र: @gupta_rekha/X)

क्रांतिकारी भगत सिंह का 'बम कांड' और सीएम रेखा गुप्ता का इतिहास ज्ञान

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर आरोप: 1929 की बमबारी में भगत सिंह की कार्रवाई को ब्रिटिश शासन के बजाय कांग्रेस के खिलाफ बताया


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कबीर दास जी अपने दोहे में कब का कह गए हैं-

"अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।

अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।"

दोहे का अर्थ तो स्पष्ट है लेकिन इसमें एक संदेश यह भी है कि बहुत अधिक बोलने से अनावश्यक बातें निकल सकती हैं। इसलिए भलाई इसी में है कि जहां पर जानकारी न हो, वहां पर चुप ही रहा जाए। बड़े बुजुर्ग भी जीवन का एक फलसफा समझा गए हैं- कम बोलना, सुखी रहना। लेकिन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कहां मानने वालीं ! वो सीएम की कुर्सी पाने के बाद से इतनी उत्साहित हैं कि उन्हें तो बोलना है और हर मुद्दे पर बोलना है। चाहे उस बोलने में तथ्य सही हों या न हों, लेकिन उन्हें तो बोलना है।

इसी चक्कर में वो इस बार फिर फंस गईं और उस पर एक नया राजनीत विवाद हो गया। हुआ ये कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में अपना भाषण दे रही थीं। उस दौरान का उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल है। वह वीडियो आम आदमी पार्टी के दिल्ली के इंचार्ज सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर शेयर किया।



भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1929 में दिल्ली की सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली में स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह द्वारा की गई बमबारी से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। हालांकि द फेडरल देश AAP के इन दावों की पुष्टि नहीं कर सका है, लेकिन आरोप है कि दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र को संबोधित करते हुए रेखा गुप्ता ने भगत सिंह की कार्रवाई को ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के बजाय कांग्रेस के खिलाफ बताया।

रेखा गुप्ता के भाषण के वीडियो साझा करते हुए AAP ने आरोप लगाया कि उन्होंने भगत सिंह के वीरतापूर्ण कृत्य को भारतीय इतिहास का एक अजीब और “अपडेटेड” संस्करण बताकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया। पार्टी नेताओं सौरभ भारद्वाज और संजीव झा ने मुख्यमंत्री की इस “भूल” पर तंज कसते हुए कहा, “लगता है इतिहास अब रिमिक्स मोड में चला गया है।”

भारद्वाज और झा द्वारा साझा किए गए वीडियो के मुताबिक, रेखा गुप्ता ने कथित तौर पर यह संकेत दिया कि 1929 में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली में की गई बमबारी ब्रिटिश शासन के खिलाफ नहीं, बल्कि कांग्रेस सरकार के विरोध में की गई थी।

सौरभ भारद्वाज ने तुरंत मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें यह तक नहीं पता कि शहीद भगत सिंह आज़ादी से पहले के दौर के क्रांतिकारी थे।

उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए कहा, “बिग बिग ब्रेकिंग, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भारत को शर्मसार कर दिया। रेखा गुप्ता जी को यह भी नहीं पता कि शहीद भगत सिंह आज़ादी से पहले के समय के क्रांतिकारी थे।”

सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि जहां स्कूल के बच्चे भी जानते हैं कि 1929 की बमबारी ब्रिटिश शासन के विरोध में थी, वहीं मुख्यमंत्री को लगता है कि यह आज़ादी के बाद कांग्रेस के खिलाफ हुई थी।

उन्होंने कहा, “उन्हें लगता है कि आज़ादी के बाद उन्होंने कांग्रेस के विरोध में बम फेंका। जबकि स्कूल के बच्चे भी जानते हैं कि शहीद भगत सिंह ने 1929 में ब्रिटिश सरकार के विरोध में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली में बम फेंका था।”

संजीव झा ने भी वही वीडियो साझा करते हुए व्यंग्य को और आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि वीडियो में ऐसा लगता है मानो रेखा गुप्ता ‘अंग्रेज़’ कहना चाह रही थीं, लेकिन जुबान फिसलने से ‘कांग्रेस की सरकार’ कह गईं।

झा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “अगली बार शायद हम यह भी सुन लें कि चंद्रगुप्त मौर्य ने गांधीजी के निर्देश पर अपना साम्राज्य फैलाया था!” उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ एक भूल नहीं, बल्कि इतिहास को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश है, जिसका मकसद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों की विरासत को कमजोर करना है।

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