अंकिता भंडारी केस में FIR दर्ज, माता-पिता से नहीं, पद्मभूषण अनिल जोशी से कराई गई FIR
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अंकिता भंडारी मर्डर केस करीब तीन साल बाद हाल में तब सुर्खियों में आया जब कुछ ऑडियो सोशल मीडिया पर रिलीज हुए जिनमें अंकिता केस में शामिल किसी वीआईपी का नाम लिया गया (फाइल)

अंकिता भंडारी केस में FIR दर्ज, माता-पिता से नहीं, पद्मभूषण अनिल जोशी से कराई गई FIR

सीबीआई जांच की घोषणा के कुछ घंटे बाद उत्तराखण्ड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस में ‘VIP’ के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज करा दिया गया है, लेकिन अंकिता के माता-पिता की ओर से नहीं बल्कि पद्म भूषण से सम्मानित अनिल जोशी की तरफ से।


शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की सिफारिश किए जाने की घोषणा के कुछ ही घंटे बाद, पद्म भूषण से सम्मानित अनिल जोशी ने इस मामले में कथित रूप से शामिल एक “VIP” के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई। इस संबंध में देहरादून में एफआईआर दर्ज की गई है।

डॉ. जोशी, जिन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण दोनों से सम्मानित किया जा चुका है, देहरादून स्थित एक पर्यावरणविद् हैं और हिमालयन एनवायरनमेंटल स्टडीज़ एंड कंज़र्वेशन ऑर्गनाइज़ेशन चलाते हैं। उन्होंने देर रात यह शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद विपक्ष की ओर से शिकायतकर्ता की मंशा और पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) को लेकर सवाल उठाए गए, क्योंकि अपराध ऋषिकेश में हुआ था और मुकदमे की सुनवाई कोटद्वार की अदालत में हुई थी।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संदेश में कहा गया, “अंकिता भंडारी के माता-पिता की मांग और भावनाओं का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री ने इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश को मंजूरी दे दी है।”

अंकिता भंडारी 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट थीं, जो ऋषिकेश के वनंत्रा रिसॉर्ट में काम करती थीं। उनकी हत्या रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य ने की थी, जो भाजपा के पूर्व नेता विनोद आर्य का बेटा है। रिसॉर्ट में काम शुरू करने के एक महीने से भी कम समय बाद अंकिता लापता हो गई थीं और छह दिन बाद उनका शव बरामद हुआ था।

गढ़वाल परिक्षेत्र के आईजी राजीव स्वरूप के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे की कार्रवाई वसंत विहार थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर की जाएगी।

उन्होंने कहा, “अंकिता की हत्या को लेकर कई तरह के आरोप और अफवाहें लगाई जा रही हैं और फैलाई जा रही हैं। इसी के चलते मुख्यमंत्री ने माता-पिता से बात की, जिन्होंने सीबीआई जांच की मांग की। मुख्यमंत्री ने हमें इसकी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। शनिवार को दर्ज की गई एफआईआर को पुलिस मुख्यालय (PHQ) भेज दिया गया है, जहां से इसे सचिवालय भेजा जाएगा और बाद में केंद्र सरकार को सीबीआई जांच के लिए अग्रेषित किया जाएगा।”

आईजी स्वरूप ने आगे कहा, “पहले दिन से ही मुख्यमंत्री ने हमें सक्रिय रूप से काम करने के निर्देश दिए थे। महिला अधिकारी के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने मामले की गहन जांच की। आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा दिलाई गई। पुलिस और सरकार ने सुनिश्चित किया कि न्याय मिले। हालांकि अब फिर से आरोप सामने आए हैं… इसलिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि मामले को उच्च स्तर तक ले जाया जाए।”

अपनी शिकायत में अनिल जोशी ने कहा कि सोशल मीडिया पर ऑडियो और वीडियो क्लिप्स के प्रसार के साथ यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ अज्ञात लोग, जिन्हें “VIP” कहा जा रहा है, अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े अपराध में शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “हालांकि अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल आरोपियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर यह दावा किया जा रहा है कि मामले से जुड़े कुछ सबूतों को छिपाया गया या नष्ट किया गया।”

उन्होंने आगे कहा, “इसलिए, पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि इस स्वतंत्र अपराध की जांच की जाए, जिसमें कथित तौर पर अज्ञात ‘VIP’ शामिल हैं। चूंकि पूरा मामला इन्हीं अज्ञात ‘VIPs’ से जुड़ा बताया जा रहा है, इसलिए सच्चाई सामने लाने के लिए एक अलग, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है।”

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भाजपा सरकार बेतरतीब कदम उठा रही है। उन्होंने कहा, “सीबीआई जांच की सिफारिश करने के बावजूद, कथित VIPs को बचाने की तैयारियां साथ-साथ शुरू कर दी गई हैं। इस दिशा में पहला कदम पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर है, जिस पर अब सीबीआई जांच करेगी।”

धस्माना ने कहा कि नई एफआईआर की कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि “अंकिता भंडारी मामला उस मूल एफआईआर के तहत आता है, जो पहले लक्ष्मणझूला थाने में दर्ज की गई थी।” उन्होंने कहा, “उस एफआईआर की जांच हुई, फिर चार्जशीट दाखिल की गई और कोटद्वार की सेशंस कोर्ट में मुकदमा चला, जिसके बाद तीन आरोपियों को दोषी ठहराया गया।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि केंद्र सरकार सीबीआई जांच की सिफारिश स्वीकार कर आदेश जारी करती है, तो सीबीआई को आगे की जांच के लिए कोटद्वार की सेशंस कोर्ट से अनुमति लेनी होगी और अदालत के पास मौजूद सभी केस से जुड़े दस्तावेज हासिल करने होंगे। उन्होंने जोड़ा, “लेकिन गढ़वाल आईजी के बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि इस स्थापित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बजाय, सीबीआई डॉ. अनिल प्रकाश जोशी द्वारा दर्ज कराई गई नई एफआईआर के आधार पर ही जांच आगे बढ़ा सकती है।”

सीपीआई(एमएल) के प्रदेश सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि अंकिता भंडारी के परिवार से एफआईआर दर्ज कराने के बजाय अनिल प्रकाश जोशी से एफआईआर दर्ज कराना उत्तराखंड सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा, “अनिल प्रकाश जोशी की इस मामले में कभी कोई भूमिका नहीं रही है और उन्हें आमतौर पर सरकार समर्थक रुख के लिए जाना जाता है। इससे यह आशंका पैदा होती है कि उत्तराखंड सरकार एक बार फिर इस मामले में लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।”

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