
गड्ढे में गिरने से पहले बाइकर ने घरवालों से कहा, 10 मिनट में पहुंच रहा हूं, 200 मीटर पहले ही मौत
परिवार और दोस्तों का कहना है कि पुलिस ने केवल 200 मीटर का दायरा बताया, जिससे मजबूर होकर दोस्तों को खुद तलाश करनी पड़ी। टॉर्च की रोशनी में गड्ढों और पार्कों की तलाशी ली गई लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ।
गुरुवार 5 फरवरी की रात 11:50 बजे का समय था, जब घरवालों को कमल ध्यानी की आख़िरी कॉल आई। घरवालों के मुताबिक उसने तब बताया कि वह पास में ही है और 10 मिनट में घर पहुँच जाएगा इसके बाद उसने कॉल उठाना बंद कर दिया। इससे उसके परिवार वाले और दोस्त चिंतित हो गए। कमल का कोई सुराग नहीं मिला तो सारी रात उसे ढूंढा गया। अगले दिन यानी शुक्रवार 6 फरवरी की सुबह दिल्ली के जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड के गड्ढे में उसकी लाश मिली। कमल बाइक समेत उस गड्ढे में जा गिरा था और रात को न जाने उसने कब वहां दम तोड़ दिया।
रोहिणी के कॉल सेंटर में काम करने वाला 25 साल का कमल ध्यानी 20×14×13 फुट के जानलेवा गड्ढे में गिरा और फिर कभी नहीं उठ पाया। वह अपने परिवार के साथ पालम में रहता था और मूल रूप से उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले का रहने वाला था। वह 5 फरवरी की रात करीब 11 बजे रोहिणी स्थित अपने कार्यालय से निकला था और फिर कभी घर नहीं लौट पाया।
पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप
रास्ते का पता लगाने पर परिवार ने पुष्टि की कि कमल अपने मैनेजर के साथ निकला था। पीरागढ़ी पर दोनों अलग हुए, उसके बाद उसका फोन बंद हो गया। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने रात में ही पुलिस को सूचना दे दी थी, लेकिन उन्हें अगले दिन थाने आने को कहा गया जिससे कार्रवाई में देरी हुई।
परिवार और दोस्तों का कहना है कि पुलिस ने केवल 200 मीटर का दायरा बताया, जिससे मजबूर होकर दोस्तों को खुद तलाश करनी पड़ी। टॉर्च की रोशनी में गड्ढों और पार्कों की तलाशी ली गई। खोज जनकपुरी, मंगोलपुरी, पश्चिम विहार और सागरपुर तक बढ़ाई गई।
परिवारवालों का आरोप है कि पहले भी उन्होंने गड्ढे के भीतर देखा था, लेकिन तब वह नहीं मिला। इससे वे साज़िश की आशंका जता रहे हैं। जब परिवार ने सीसीटीवी फुटेज माँगा, तो पुलिस ने कथित तौर पर कहा कि कैमरे केवल लाइव फीड देते हैं, रिकॉर्डिंग या प्लेबैक की सुविधा नहीं है।
पुलिस ने क्या कहा
पुलिस के मुताबिक रात 1:35 बजे कमल के भाई करण विकासपुरी थाने पहुँचे। पुलिस ने बताया कि किसी दुर्घटना या एमएलसी अथवा बाइक सवार की रिपोर्ट कमल से मेल नहीं खाती। रात 2:50 बजे करण ने जनकपुरी थाने में कमल की गुमशुदगी दर्ज कराई। आख़िरी मोबाइल लोकेशन पश्चिम पार्क के पास ट्रेस हुई।
कमल की फोटो और वाहन विवरण कंट्रोल रूम और पश्चिमी ज़िले के पुलिस समूहों में प्रसारित किए गए। पुलिस टीमों ने परिवार के साथ मिलकर पार्क, पार्किंग क्षेत्रों और आसपास की कॉलोनियों में घंटों तलाश की, लेकिन कुछ नहीं मिला।
अगली सुबह पीसीआर कॉल आई कि जोगिंदर सिंह मार्ग पर एक व्यक्ति गड्ढे में गिर गया है। उसी सुबह करीब 7 बजे परिवार ने फिर से कमल के फोन पर कॉल की। कॉल पुलिस ने उठाई। तब जाकर इसकी पुष्टि हुई कि गड्ढे में गिरा वह कमल ध्यानी ही था। उसकी मोटरसाइकिल और शव एक खुले गड्ढे में मिले। उसके सिर पर तब भी हेलमेट था।
इस मामले में ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 105 (ग़ैर-इरादतन हत्या) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। लेकिन इस मामले में नागरिक सुरक्षा और गुमशुदगी की शिकायत को संभालने के तरीके पर सवाल खड़े हो गए।

