
भागीरथपुरा का नया सच: बदली जीवनशैली, रिश्तों और कारोबार तक पहुंचा डर!
Indore contaminated water: स्थानीय लोगों का कहना है कि रिश्तेदारों ने आना-जाना लगभग बंद कर दिया है। अगर कोई जरूरी काम से आता भी है तो घर के बाहर से ही बात करके निकल जाता है।
Bhagirathpura contaminated water: इंदौर के भागीरथपुरा में आए मौत और बीमारियों की लहर ने सिर्फ बस्ती की गलियों में डर नहीं फैलाया, बल्कि रिश्तों और कारोबार तक को अपनी चपेट में ले लिया। जो लोग कभी अपनापन मानकर आते थे, अब दूरी बनाए रखते हैं। सब्जी वाले, होटल वाले, यहां तक कि दोस्त भी अब सिर्फ फोन पर हालचाल पूछते हैं। महामारी ने इस छोटे से इलाके की दुनिया को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
रिश्तेदार और दोस्त अब रहते हैं दूर
स्थानीय लोगों का कहना है कि रिश्तेदारों ने आना-जाना लगभग बंद कर दिया है। अगर कोई जरूरी काम से आता भी है तो घर के बाहर से ही बात करके निकल जाता है। दूसरे इलाकों में रहने वाले दोस्त अब केवल फोन पर हालचाल पूछते हैं। उन्हें ऐसा महसूस कराया जा रहा है जैसे पूरा भागीरथपुरा ही संक्रमित हो गया हो। यहां सर्वे या मरम्मत के लिए आने वाले लोग भी पानी की बोतल लेकर आते हैं और चाय-नाश्ते के लिए भी बस्ती से दूर जाते हैं।
कारोबार भी प्रभावित
बस्ती में काम करने वाले दुकानदारों और छोटे व्यवसायियों पर भी महामारी का असर पड़ा है। सब्जी और फल बेचने वाले, चाय-नाश्ते के होटल चलाने वाले दुकानदार अब ग्राहकों का इंतजार करते हैं, लेकिन लोग अब सीधे निकल जाते हैं।
पहले मुख्य सड़क से गुजरते समय लोग रुककर सब्जियां खरीद लिया करते थे या होटल पर नाश्ता करते थे। अब संक्रमण के डर के कारण वे सीधे निकल जाते हैं। दूसरी बस्तियों से आने वाले ग्राहकों की संख्या भी काफी कम हो गई है। इस प्रकार भागीरथपुरा में महामारी का असर सिर्फ स्वास्थ्य तक ही नहीं, बल्कि सामाजिक रिश्तों और स्थानीय कारोबार पर भी गहरा पड़ा है।

