
Indore Water Crisis: फाइलों में अफसर लेते रहे झपकी और जहर बहता रहा , अब हुई कार्रवाई
मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर नगर निगम के कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की है। लेकिन लोगों का सवाल है कि क्या उन परिवारों के जख्म भरेंंगे जिन्होंने अपनों को खो दिया।
Indore Contaminated Water: देश के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक इंदौर। अगर आप इंदौर नहीं गए होंगे तो ऐसे शहर की तस्वीर दिमाग में आ रही होगी जहां साफ सफाई होगी, पीने के लिए अच्छा पानी मिलता होगा। कहीं पर कूड़े का ढेर नहीं होगा। यानी कि 100 फीसद व्यवस्था। लेकिन यहां कहानी कुछ और है। शहर का भागीरथपुरा इलाका, दूसरे हिस्सों से कम संपन्न और क्या यही दोष यहां के रहने वालों का था। लोगों के मुताबिक 15 परिवार उजड़ गए। हालांकि सरकारी आंकड़ा अभी चार का है। दूषित पानी से हुई मौतों पर जब होहल्ला मचा तो राज्य सरकार की तरफ से कुछ कार्रवाई हुई। यह कार्रवाई कितनी कामयाब होगी वो भविष्य के गर्भ में हैं। लेकिन किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई पहले उसे जानिए।
इंदौर दूषित पानी मामले में सीएम मोहन यादव ने इन अधिकारियों के खिलाफ ऐक्शन लिया है।
नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव हटाए गए, जिम्मेदारी- साफ पानी पर ध्यान देना था। लेकिन अनदेखी की
एडिशनल कमिश्वर रोहित सिसोनिया निलंबित, अगस्त 2024 के महीने में टेंडर हुआ था। लेकिन काम को रोक कर रखा
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव निलंबित, गंदे पानी की शिकायत आती रही। लेकिन कभी ध्यान ही नहीं दिया।
शुभम श्रीवास्तव, उपयंत्री, दूषित जल का निराकरण करना था, लेकिन नहीं की।
योगेश जोशी, उपयंत्री (जोन-4), हेल्पलाइन पर लीकेज संबंधी शिकायतों पर ध्यान ही नहीं दिया।
शालिग्राम सितोले, जोनल अधिकारी (जोन-4), जोन की जिम्मेदारी लेकिन जमीन पर काम नहीं किया।
शुक्रवार को मध्य प्रदेश सरकार ने हाइकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की जिसमें चार लोगों के मरने की बात बताई गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को होनी है। हाइकोर्ट ने 1 जनवरी को स्टेटस रिपोर्ट करने के लिए कहा था। खास बात यह है कि सरकार दूषित जल से मौत की बात पहले स्वीकार नहीं कर रही थी। स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि जितने लोगों की यानी जिन चार की मौत हुई है उनमें सभी की उम्र 60 साल से अधिक है। हालांकि स्थानीय लोग 15 मौत की बात कर रहे हैं जिसमें पांच महीने बच्चा भी था।
इंदौर के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ माधव प्रसाद हसानी ने कहा कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट मे खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि की। नगर निगम की तरफ से पानी के 80 सैंपल्स भेजे गए थे। बताया जा रहा है कि पानी में विब्रियो कोलेरो मिला है। हालांकि सरकारी विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की है। हालांकि फीकल कॉलिफॉर्म, ई कोलाई, प्रोटोजोआ की पुष्टि है। बता दें कि इंदौर-1 विधायक और मोहन यादव सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तब विवादों में आ गए थे जब उन्होंने सवाल पूछने वाले एक मीडियाकर्मी को फोकट का सवाल और घंटा जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।
इलाके के लोग कहते हैं कि उनकी भी पूछ हुई होती यदि वे आर्थिक तौर पर संपन्न होते। वो लोग लगातार निगम के अधिकारियों से अपनी समस्या बताते रहे। लेकिन क्या हुआ और उसका नतीजा क्या रहा हर किसी के सामने है। वार्ड नंबर 11 के पार्षद अपनी लाचारी का रोना कुछ इस तरह रोते हैं। वो कहते हैं कि समय पर और लगातार वो अपनी वार्ड की मु्श्किलों, जर्जर पाइपलाइन के बारे में बताते रहे है। लेकिन अधिकारियों मे एक ना सूनी। फाइलों पर अंगद की तरह पैर जमाकर बैठे रहे।

