माफी नहीं है काफी! इंदौर पानी कांड में नपे जाने के डर से निकली मंत्री की हेकड़ी
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माफी नहीं है काफी! इंदौर पानी कांड में नपे जाने के डर से निकली मंत्री की हेकड़ी

भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुरक्षा और सरकारी जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंत्री विजयवर्गीय की बहस और बाद में हुई माफी ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।


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मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों और बीमारियों के मामले पर एक पत्रकार के साथ बहस के बाद सार्वजनिक माफी मांगी है। यह विवाद 31 दिसंबर को तब हुआ, जब मंत्री से सवाल किया गया कि इस घटना में सरकार की जिम्मेदारी क्या है।

मंत्री का वायरल बयान और माफी

मंत्री विजयवर्गीय ने X पर एक पोस्ट में कहा कि उनकी कुछ बातें गलत तरीके से निकल गईं और इसके लिए उन्हें खेद है। उन्होंने लिखा कि मेरे लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हैं, तब तक मैं चुप नहीं बैठूंगा। वायरल वीडियो में मंत्री ने पत्रकार से कहा कि "छोड़ो, बेकार के सवाल मत पूछो।" इसके बाद मंत्री और पत्रकार के बीच बहस हो गई। पत्रकार ने मंत्री को उनकी भाषा के इस्तेमाल पर फटकार लगाई और गंभीर मामले को हल्का करने का आरोप लगाया।

दूषित पानी से मौतें

भागीरथपुरा, विजयवर्गीय के इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र में आता है, इसलिए मंत्री से सवाल ज्यादा पूछे गए। रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से अधिक लोग बीमार हैं। बीमार लोगों में से 212 को अस्पताल में भर्ती किया गया, जबकि 50 लोग इलाज के बाद घर लौटे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे "आपातकालीन स्थिति" बताया और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।

मंत्री के पास शहरी विकास और आवास विभाग की जिम्मेदारी है। शुरू में उन्होंने सवालों का जवाब शांति से दिया, लेकिन जब उन्हें सरकार की जवाबदेही पर दबाव डाला गया तो उनका नियंत्रण टूट गया। पत्रकार ने पूछा कि इस मामले की जिम्मेदारी मंत्री और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट पर क्यों नहीं है? अस्पतालों के बिल वापस क्यों नहीं दिए जा रहे? लोगों के लिए उचित पीने का पानी क्यों नहीं उपलब्ध कराया गया? इस पर मंत्री ने आहत प्रतिक्रिया दी और विवाद शुरू हो गया।

गंदे पानी की ‘मौत’ के असली गुनाहगार कौन?

पहली मौत 26 दिसंबर को हो चुकी थी, तब भी नगर निगम, पीएचई, स्वास्थ्य विभाग ने कुछ नहीं किया। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि 2024 से शिकायतें थीं, लेकिन खुद कुछ नहीं करवा पाए। 4 महीने पहले टेंडर जारी हो गया था। लेकिन निगम काम शुरू नहीं करवा सका। जिस पार्षद कमल वाघेला के पास इस वार्ड की जिम्मेदारी है, वो खुद बेखबर रहे। 4 महीने की शिकायतें, लगातार बीमार लोगों की सूचना, मौतें… सब होता रहा और वो अनजान रहे। जब भागीरथपुरा में मौतें हो रही थीं, लोग जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस समय का यहां के पार्षद का झूला झूलते हुए वीडियो सामने आ रहा है। 8 मौतें होने के बाद भी जिम्मेदार आंकड़े छिपा रहे थे। कभी 1 तो कभी 3 मौतें बताई, गंदे पानी के बजाय कार्डियक अरेस्ट बताते रहे… ऐसा क्यों?

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

विजयवर्गीय के बयान के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने वीडियो शेयर करते हुए कहा कि इंदौर में दूषित पानी से मौतों की संख्या 8 से बढ़कर 10 हो गई है। उन्होंने BJP नेताओं पर अहंकार का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि विजयवर्गीय से नैतिक आधार पर इस्तीफा लिया जाए।

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