
क्या नीतीश कुमार राज्यसभा जाने वाले हैं?, ऐसी अटकलों ने ज़ोर क्यों पकड़ा?
लगातार दो दशकों तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे जेडीयू के दिग्गज नेता नीतीश कुमार के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वे मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जा सकते हैं, जिससे बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है।
पिछले नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों में एनडीए की बड़ी जीत के बाद अब राज्य में नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है। सूत्रों के हवाले से आई खबरों में कहा गया है कि 1 मार्च को 75 वर्ष के हुए नीतीश कुमार के लिए राज्यसभा नामांकन पत्र तैयार हो चुका है और सिर्फ उनके हस्ताक्षर बाकी हैं। बताया जा रहा है कि वे गुरुवार (5 मार्च) को नामांकन दाखिल कर सकते हैं।
बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने मंगलवार (3 मार्च) को कहा कि राज्य से राज्यसभा की सीटों के लिए एनडीए के सभी उम्मीदवार गुरुवार को नामांकन दाखिल करेंगे। नामांकन की अंतिम तिथि भी 5 मार्च है, जबकि चुनाव 16 मार्च को कई राज्यों में एक साथ होंगे।
नीतीश और बिहार के भविष्य को लेकर अटकलें तेज
2005 से बिहार की राजनीति का चेहरा रहे नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने की खबरों के बाद यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा? क्या यही वह क्षण है जब उनके बेटे निशांत कुमार औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश करेंगे?
जेडीयू खेमे में इन अटकलों के बीच बैठकों का दौर तेज हो गया है। बुधवार (4 मार्च) को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा दिल्ली से पटना पहुंचे और नीतीश कुमार से बंद कमरे में लंबी बैठक की। केंद्रीय मंत्री और जेडीयू नेता ललन सिंह के भी गुरुवार को पटना पहुंचने की संभावना जताई गई, जिससे संकेत मिलता है कि चर्चाएं गंभीर मोड़ पर हैं।
सूत्रों के अनुसार, बुधवार दर रात तक मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, संजय झा, बृजेंद्र यादव, श्रवण कुमार, अशोक चौधरी और विजय कुमार चौधरी की बैठक में राज्यसभा उम्मीदवारों पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
क्या जाएंगे नीतीश? क्या आएंगे निशांत?
राजनीतिक गलियारों में कई संभावनाओं पर चर्चा चल रही है-
1. पहला विकल्प: नीतीश की जगह निशांत कुमार को राज्यसभा भेजा जाए और नीतीश अपने रिकॉर्ड 10वें कार्यकाल तक मुख्यमंत्री बने रहें।
2. दूसरा विकल्प: नीतीश को राज्यसभा भेजा जाए, 10 ऐन मार्ग पर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनाया जाए और निशांत को विधान परिषद का सदस्य बनाकर राज्य कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री बनाया जाए।
3. तीसरा विकल्प: निशांत कुमार को सीधे मुख्यमंत्री बना दिया जाए और फिलहाल दो बीजेपी उपमुख्यमंत्री बने रहें।
बताया जा रहा है कि जेडीयू में नीतीश के समर्थक उन्हें राज्यसभा भेजने के पक्ष में नहीं हैं और चाहते हैं कि निशांत को मौका मिले। वहीं, पार्टी का वह धड़ा जो बीजेपी के करीब माना जाता है, चाहता है कि नीतीश राज्यसभा जाएं।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव का एक और संकेत यह है कि नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ का अगला चरण, जो 8 मार्च से शुरू होना था, फिलहाल टल सकता है।
बिहार की राजनीति अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। आने वाले कुछ दिन यह साफ कर देंगे कि क्या सचमुच राज्य में “पोस्ट-नीतीश युग” की शुरुआत होने वाली है और क्या निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं।

